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मार्कशीट चाहिए! वो पड़ी हैं, जाओ ढूंढ़ लो
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 21 Jan 2016 01:53 AM IST
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मेरठ। मेरठ कॉलेज में प्राइवेट कक्षाओं की मार्कशीट ‘लावारिस’ की तरह फेंक दी गई हैं। रख-रखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। छात्रों को मार्कशीट खुद खोजनी पड़ रही हैं। मार्कशीट के गुम होने और खराब होने का खतरा है। कॉलेज को मार्कशीट देने के लिए 10 रुपये दिए जाते हैं, फिर भी लापरवाही हो रही है।
रिजल्ट जारी करने के बाद विश्वविद्यालय रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों की मार्कशीट कॉलेज भेज देता है। कॉलेज आकर छात्र मार्कशीट लेते हैं। मेरठ कॉलेज ने प्राइवेट छात्रों में बीए और एमए की मार्कशीट फिजिकल एजूकेशन विभाग और बीकॉम तथा एमकॉम की मार्कशीट हॉस्टल ऑफिस में रखी हैं।
मार्कशीट देने का काम कॉलेज के ऑफिस का है न कि विभाग का। हॉस्टल ऑफिस कभी-कभी खुलता है। पहले तो छात्रों को मार्कशीट लेने के लिए पूछताछ करनी पड़ती है। दोनों जगह कॉलेज कैंपस के एकदम बाहर हैं। छात्र किसी तरह वहां पहुंचते हैं तो उन्हें मार्कशीट खुद खोजनी पड़ती है।
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एडमिट कार्ड दिखाने के बाद छात्रों से मार्कशीट खोजने को कह दिया जाता है। अहम बात यह है कि विभाग के जिम परिसर में टेबल टेनिस की टेबल पर मार्कशीट रखी हैं। वह खुले में ही रहती हैं। मार्कशीट की जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है।
10 रुपये किस बात के
मार्कशीट देने के लिए कॉलेज को 10 रुपये मिलते हैं। लेकिन जिस तरह लापरवाही बरती जा रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि रेग्युलर छात्रों की मार्कशीट संभालकर रखी जाती है।
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रिजल्ट जारी करने के बाद विश्वविद्यालय रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों की मार्कशीट कॉलेज भेज देता है। कॉलेज आकर छात्र मार्कशीट लेते हैं। मेरठ कॉलेज ने प्राइवेट छात्रों में बीए और एमए की मार्कशीट फिजिकल एजूकेशन विभाग और बीकॉम तथा एमकॉम की मार्कशीट हॉस्टल ऑफिस में रखी हैं।
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मार्कशीट देने का काम कॉलेज के ऑफिस का है न कि विभाग का। हॉस्टल ऑफिस कभी-कभी खुलता है। पहले तो छात्रों को मार्कशीट लेने के लिए पूछताछ करनी पड़ती है। दोनों जगह कॉलेज कैंपस के एकदम बाहर हैं। छात्र किसी तरह वहां पहुंचते हैं तो उन्हें मार्कशीट खुद खोजनी पड़ती है।
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एडमिट कार्ड दिखाने के बाद छात्रों से मार्कशीट खोजने को कह दिया जाता है। अहम बात यह है कि विभाग के जिम परिसर में टेबल टेनिस की टेबल पर मार्कशीट रखी हैं। वह खुले में ही रहती हैं। मार्कशीट की जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है।
10 रुपये किस बात के
मार्कशीट देने के लिए कॉलेज को 10 रुपये मिलते हैं। लेकिन जिस तरह लापरवाही बरती जा रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि रेग्युलर छात्रों की मार्कशीट संभालकर रखी जाती है।