Meerut: सेलिब्रिटी सुसाइड मामलों का युवाओं पर पड़ रहा बुरा प्रभाव, खुदकुशी का खयाल आए तो करें ये उपाय
सेलिब्रिटी की आत्महत्याओं का युवा पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका असर पिछले कुछ दिनों में मेरठ में देखने को मिला है। यही कारण है कि युवाओं द्वारा आत्महत्या किए जाने में मामले भी बढ़ें हैं। पढ़ें ये रिपोर्ट।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ जिले में आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने पिछले साल मानसिक रोग विभाग में 15-29 साल के एक हजार से बातचीत कर यह निष्कर्ष निकाला है कि सेलिब्रिटी की आत्महत्याओं का युवा पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इन युवाओं में आत्महत्या का विचार आया, लेकिन काउंसिलिंग कर इन्हें ठीक किया गया।
यह स्टडी मेडिकल कॉलेज की आचार्य डॉ. सीमा जैन, आचार्य डॉ. संजीव कुमार और सहायक आचार्य डॉ. नीलम गौतम ने की है। डॉ. सीमा जैन ने बताया कि हाल ही में युवा फिल्म अभिनेत्री तुनिशा शर्मा, इससे पहले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत, टीवी अभिनेता मनमीत ग्रेवाल, कन्नड़ अभिनेत्री सुशील गौड़ा, अभिनेत्री निशा शर्मा, अभिनेता आसिफ बसरा सहित भारत में कई मशहूर हस्तियों की आत्महत्या या संदिग्ध मृत्यु हुई है। इस तरह की घटनाओं से युवा पीढ़ी के मनोविज्ञान पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। उदासी की प्रवृत्ति पैदा होती है और आत्मघाती प्रवृत्ति को तेज करता है।
यह भी पढ़ें: अवनि आत्महत्या मामला: शोक में डूबी कॉलोनी, एक माह तक नहीं होगा कोई आयोजन, वसंत पंचमी पर नहीं बजेगा डीजे
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि युवा आजकल मोबाइल या कंप्यूटर जैसे उपकरणों पर इंटरनेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इनमें नकारात्मक चीजों पर ज्यादा समय व्यतीत करते हैं और अपनी पसंदीदा हस्ती को आदर्श मानते हैं। उनके व्यवहार, आदतों और जीवन शैली का अनुकरण करते हैं।
कई मशहूर हस्तियां स्वतंत्र रूप से शराब या नशीली दवाओं के उपयोग को स्वीकार करती हैं, जिससे युवा मस्तिष्क को यह धारणा मिलती है कि ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है। डॉ. नीलम गौतम ने बताया कि भारत में 15 से 29 आयु वर्ग सबसे अधिक असुरक्षित हैं।
इनमें लगभग पांच प्रतिशत आत्महत्या किसी सेलिब्रिटी की मृत्यु के बाद करते हैं। आत्महत्या अपने स्वयं के जीवन का जानबूझकर अंत करना है। यह मुख्य रूप से निराशा, अवसाद, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और विभिन्न व्यक्तिगत व वित्तीय तनाव कारकों की लगातार भावना के कारण किया जाता है।
यह भी पढ़ें: Meerut Suicide Case: महिलाएं चिल्लाईं, CCTV फुटेज देख कांप उठे लोग, इंजीनियर बनना चाहती थी अवनि
ऐसे करें आत्महत्या से बचाव
-आत्महत्या का विचार आए तो मदद मांगने में संकोच न करें।
-सोचें, हर समस्या का समाधान है, हिम्मत करें, तकलीफ साझा करें।
-सही दिनचर्या अपनाएं, अच्छा खाएं।
-अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाएं, खुलकर हंसे।
-अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।
-नकारात्मक बातों, चीजों और लोगों से दूर रहें।
दबाव में टूट जाते हैं युवा
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि पढ़ाई का हो या नौकरी का, या फिर कोई और दबाव हो, युवा इसमें टूट जाते हैं, असफलता को सहन नहीं कर पाते। उन्हें आत्महत्या ही आसान उपाय नजर आता है। इससे बचने के लिए परिजनों और शिक्षकों को छात्र-छात्राओं की काउंसिलिंग करनी चाहिए। उन्हें यह एहसास कराना चाहिए कि कम अंक आना या किसी चीज में असफल हो जाना जीवन का अंत नहीं है। उन्हें बताएं कि यह तो सीख है आगे बढ़ने के लिए। जरूरत हो तो मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए।