भारत-पाकिस्तान युद्ध में सेना की 9 डिवीजन ने रचा था इतिहास
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पांच दिसंबर 1971 का दिन जैसोर की जीत के साथ भारतीय सेना के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया था। जब मेरठ में तैनात सेना की नाइन डिवीजन ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बांग्लादेश पर जीत पा ली थी। हर साल की तरह इस बार भी सेना पांच दिसंबर को जैसोर डे की जीत के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है। इस मौके पर वीर नारियों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित कर युद्ध में शामिल रहे जवानों को याद किया जाएगा।
सन 1971 की बात है। भारत-पाकिस्तान युद्ध में मेरठ स्थित सेना की नाइन डिवीजन की अहम भूमिका थी। इस युद्ध के बाद ही बांग्लादेश आजाद हुआ। 14 दिन तक चले युद्ध के बाद सेना की नाइन डिवीजन जैसोर पहुंची तो लड़ाई में भारतीय सेना हावी होती चली गई। पांच दिसंबर को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को नाकों चने चबवा दिए। यहीं की ताकत के बूते भारतीय सेना को जीत हासिल हुई। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना के हजारों जवानों को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।
इसी के चलते सेना पांच दिसंबर को जैसोर में भारतीय सेना की जांबाजी के किस्सों को नए सैनिकों और अफसरों को बताती है। सेना के अफसरों ने बताया कि इस बार भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें वीर नारियों के सम्मान के साथ पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया जाएगा। जैसोर के युद्ध के बारे में पूर्व अफसर एवं सैनिक अनुभव बयां करेंगे।
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