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Meerut News: रोगियों को दी जाने वाली दवाएं जलती मिली
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आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जलाई जा रही दवाईयां। (परीक्षितगढ)
गांव खजूरी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कूड़े के ढेर में जलती मिली दवाइयां
संवाद न्यूज एजेंसी
परीक्षितगढ़। गांव खजूरी में स्वास्थ्य विभाग की एक करतूत ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीजों को दी जाने वाली जीवन रक्षक दवाइयों को कूड़े के ढेर में फेंक कर आग लगाई जा रही है। इससे स्वास्थ्य विभाग के प्रति ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने सीएमओ से स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
गांव खजूरी में आयुष्मान आरोग्य सेंटर बना हुआ है। सेंटर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात है। ग्रामीणों का आरोप है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर अधिकांश समय बंद रहता है और मरीजों को पूरी दवा नहीं दी जाती है। ग्रामीणों को जैसे ही पता चला कि जीवन रक्षक दवाइयां व किट में आग लगाकर नष्ट किया जा रहा है तो वह मौके पर पहुंचे। ग्रामीण विनोद शर्मा, संजू, मंटू, रक्षित ने जब आयुष्मान आरोग्य मंदिर परिसर से आग से दवाइयों को निकाला तो वह एक्सपायर नहीं बल्कि 2026-27 की निकली। इससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति आक्रोश है। जबकि एक्सपायर दवा को भी जलाने के लिए सरकार की गाइड लाइन नहीं है। इन जीवन रक्षक दवाइयां व किट से मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकता है और किसी की जान बच सकती थी। स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के चलते लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षणों की भी पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों ने सीएमओ से स्वास्थ्य कर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
दो माह पूर्व राज्य मंत्री ने सीएमओ से की थी शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि खजूरी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर तैनात सामुदायिक अधिकारी मरीजों को पूरी दवाइयां नहीं देते हैं। इससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए परीक्षितगढ़ सीएचसी पर आने के लिए मजबूर हैं। इस मामले की शिकायत राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने सीएमओ अशोक कटारिया से की थी।
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वर्जन...
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर इस तरह से दवाइयों को जलाए जा रहा है तो मामले की जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. रविशंकर शर्मा, प्रभारी, सीएचसी, परीक्षितगढ़
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संवाद न्यूज एजेंसी
परीक्षितगढ़। गांव खजूरी में स्वास्थ्य विभाग की एक करतूत ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीजों को दी जाने वाली जीवन रक्षक दवाइयों को कूड़े के ढेर में फेंक कर आग लगाई जा रही है। इससे स्वास्थ्य विभाग के प्रति ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने सीएमओ से स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
गांव खजूरी में आयुष्मान आरोग्य सेंटर बना हुआ है। सेंटर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात है। ग्रामीणों का आरोप है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर अधिकांश समय बंद रहता है और मरीजों को पूरी दवा नहीं दी जाती है। ग्रामीणों को जैसे ही पता चला कि जीवन रक्षक दवाइयां व किट में आग लगाकर नष्ट किया जा रहा है तो वह मौके पर पहुंचे। ग्रामीण विनोद शर्मा, संजू, मंटू, रक्षित ने जब आयुष्मान आरोग्य मंदिर परिसर से आग से दवाइयों को निकाला तो वह एक्सपायर नहीं बल्कि 2026-27 की निकली। इससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति आक्रोश है। जबकि एक्सपायर दवा को भी जलाने के लिए सरकार की गाइड लाइन नहीं है। इन जीवन रक्षक दवाइयां व किट से मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकता है और किसी की जान बच सकती थी। स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के चलते लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षणों की भी पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों ने सीएमओ से स्वास्थ्य कर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
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दो माह पूर्व राज्य मंत्री ने सीएमओ से की थी शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि खजूरी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर तैनात सामुदायिक अधिकारी मरीजों को पूरी दवाइयां नहीं देते हैं। इससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए परीक्षितगढ़ सीएचसी पर आने के लिए मजबूर हैं। इस मामले की शिकायत राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने सीएमओ अशोक कटारिया से की थी।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर इस तरह से दवाइयों को जलाए जा रहा है तो मामले की जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. रविशंकर शर्मा, प्रभारी, सीएचसी, परीक्षितगढ़

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जलाई जा रही दवाईयां। (परीक्षितगढ)