फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Medical college becomes hub for treatment of TB patients

मेडिकल कॉलेज बना टीबी मरीजों के इलाज का हब

Thu, 25 Mar 2021 01:43 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 01:43 AM IST
विज्ञापन
Medical college becomes hub for treatment of TB patients
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

मेरठ। अब टीबी के मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंस (एमडीआर) मरीजों की जांच के लिए सैंपल आगरा की लैब नहीं भेजने पड़ेंगे। टीबी के मरीजों की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज में लाइन प्रोब एस्सै (एलपीए) लैब शुरू की गई है। इसे मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों से जोड़ा जाएगा। 72 घंटे में रिपोर्ट आ जाएगी। आगरा के बाद पश्चिम उत्त्तर प्रदेश में यह दूसरी एलपीए लैब होगी। अभी तक दोनों मंडलों से हर माह 300 सैंपल जांच के लिए आगरा भेजे जाते थे।
बुधवार को विश्व क्षय रोग दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर से डिजिटल माध्यम इसका लोकार्पण किया। मेडिकल कॉलेज में विधायक सोमेंद्र तोमर ने इसका उद्घाटन किया। प्रधानाचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, उप अधीक्षक डॉ. दिनेश राणा और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार भी इस दौरान मौजूद रहे।
विज्ञापन

----
मेरठ में एमडीआर के 235 मरीज
लैब प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि टीबी के मरीजों को मुख्यत: 13 तरह की दवाएं दी जाती हैं। एमडीआर के मरीज पर अगर दवा असर नहीं करती तो फिर उसकी जांच करनी पड़ती है। इससे यह पता चल जाएगा कि मरीज के लिए कौन सी दवा चलाई जाए। मेरठ में इस समय एमडीआर के 235 मरीज हैं। अभी तक मेडिकल कॉलेज में टीबी के लिए सीबी नाट, कल्चर एंड डीएसटी जांच की सुविधा उपलब्ध थी। अब विस्तृत जांच हो सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

--------
जिला क्षय रोग विभाग में डिजिटल एक्सरे भी शुरू
मुख्यमंत्री ने जिला क्षय रोग विभाग में डिजिटल एक्सरे की भी शुरुआत की। अभी तक टीबी के मरीजों को डिजिटल एक्सरे कराने के लिए मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल की लैब में भेजना पड़ता था। अब टीबी विभाग में ही यह जांच हो जाएगी। लगभग हर टीबी के मरीज को डिजिटल एक्स-रे की जरूरत पड़ती है। इस दौरान जिला क्षय रोग विभाग में मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन रहे।
---इनसेट------
तीन साल में 20 हजार से ज्यादा ने टीबी को मात दी
मेरठ। टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह फेफड़ों को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। बावजूद इसके हौसला हो और नियमित इलाज कराने पर यह बीमारी टिक नहीं पाती है। जिला क्षय रोग विभाग की रिपोर्ट के अनुसार तीन साल में 20 हजार से अधिक लोगों ने टीबी को हराया है। 2018 में टीबी के 6703 ठीक हुए, 2019 में 7281 मरीज ठीक हुए, जबकि 2020 में 6051 ने टीबी को मात दी। टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त करना चाहती है।

टीबी के मरीजों को तीन वर्गों में चिह्नित कर इलाज किया जाता है। पहले वर्ग में नए या फिर एक माह से कम दवा खाने वाले मरीज होते हैं। उनका छह माह तक इलाज चलता है। दूसरे वर्ग में दो महीने तक दवाई खाने वाले मरीज होते हैं। उनका 9 महीने तक इलाज चलता है। वहीं, तीसरे वर्ग में एमडीआर मरीज का 24 महीने तक चलता है। एक दवा से रेजिस्टेंस होने पर 11 से 13 महीने तक दवाई दी जाती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।
ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed