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मेरठ विकास प्राधिकरण के सीमा क्षेत्र का होगा विस्तार

Tue, 19 Jul 2016 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Tue, 19 Jul 2016 02:13 AM IST
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mda ki seema
एमडीए - फोटो : अमर उजाला
शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही आबादीके दबाव को कम करने के लिए मेरठ विकास विकास प्राधिकरण (एमडीए) के सीमा क्षेत्र के विस्तार का फैसला लिया गया है। एमडीए के जरिये आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को प्रदेश कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है। सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत प्रस्ताव के मुताबिक, सीमा विस्तार के तहत 6 स्थानीय निकाय के नगरीय क्षेत्रों समेत 124 राजस्व गावों को भी विकास प्राधिकरण सीमा क्षेत्र में शामिल किया जाएगा।
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दरअसल, प्रदेश के विकास प्राधिकरण वाले शहरों में आबादी के दबाब को देखते हुए सरकार ने सभी विकास प्राधिकरणों की सीमा के विस्तार के लिए प्रस्ताव मांगे थे। फिलहाल, एमडीए ने शहरी क्षेत्र में आवासीय व बढ़ती जनसंख्या की समस्या के निदान को ध्यान में रखकर वर्ष-2014 में ही प्रस्ताव तैयार कर आवास विकास को भेज दिया था। प्रस्ताव के विधिक परीक्षण के बाद आवास विकास ने इसे कैबिनेट में रखा, जिसे मंजूरी मिल गई।
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प्रस्ताव के मुताबिक, प्राधिकरण सीमा क्षेत्र में 6 स्थानीय निकाय के नगरीय क्षेत्रों के अलावा 124 राजस्व ग्रामों को शामिल किया जाएगा। जिन निकायों के नगरीय क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, उनमें खरखौदा नगर पंचायत, मवाना नगर पालिका परिषद, हस्तिनापुर नगर पंचायत, बहसूमा नगर पंचायत, सरधना नगर पालिका परिषद और लावड़ नगर पंचायतों के नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि सरकार के इस निर्णय से आवासीय समस्याओं के निदान के साथ-साथ अनियोजित निर्माण को रोकने और शहर के सुनियोजित विकास में मदद मिलेगी।
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ये निकाय बनेंगे एमडीए का हिस्सा
मवाना नगर पालिका परिषद
सरधना नगर पालिका परिषद
खरखौदा नगर पंचायत
हस्तिनापुर नगर पंचायत
बहसूमा नगर पंचायत
लावड़ नगर पंचायत

अब विकास के ट्रैक पर होंगे गांव
इन इलाकों में जल्द ही एमडीए अपने मास्टर प्लान के हिसाब से काम करेगा। नई आवासीय योजनाओं के साथ व्यवसायिक योजनाएं डेवलप होंगी। सड़कों के अलावा आवासीय नियोजन होगा। विकास की राह पर ये गांव अब तेजी से चल सकेेंगे।

जानिये, कहां तक पहुंचेगा एमडीए
तहसील मेरठ
नगरीय क्षेत्र - खरखौदा
ग्रामीण क्षेत्र : मुजफ्फरनगर सैनी (आंशिक), पबला, खरदौनी शेखूपुर, मसूरी, इंचौली (आंशिक), शौलाना (आंशिक), नंगलापातू (आंशिक), खानपुर (आंशिक), खरखौदा, सादुल्लापुर, बिजौली (आंशिक), खड़खड़ी, छतरी, सेतकुआं, नालपुर।

तहसील मवाना
नगरीय क्षेत्र - मवाना नगर पालिका, हस्तिनापुर और बहसूमा नगर पंचायत
ग्रामीण क्षेत्र : अकबरपुर सादात, अस्सा, कौल, सालारपुर, निलोहा, अक्खेपुर, बिसौला, भगवानपुर, पहाड़पुर, दूधली बांगर, बना, नंगला ईसा, मवाना खुर्द, राफन, फिटकरी, तिगरी, मुबारिकपुर, सैदीपुर सेठ, नीमका वीरान, खेड़ी मनिहार, भैंसा, कटरा, मवाना कलां ग्रामीण, ढिकौली, राजपुर, समसपुर, बसी वीरान, बहसूमा देहात, फतेहपुर हंसापुर, जीतपुर, मोड़कलां, मोहम्मदपुर शकिस्त मुकर्री, सैफपुर फिरोजपुर, मोड़ खुर्द, सदरपुर, हस्तिनापुर, कौरवान, हस्तिनापुर पांडवान, तेजपुरा, माखन नगर, रहमापुर, भिंडौरा, करीमपुर, हजरतपुर, गणेशपुर, अफजलपुर उर्फ रानी नंगला, पलड़ा, बहोड़ुपुर, कूड़ी कमालपुर, नंगला जरीफ।

तहसील सरधना
नगरीय क्षेत्र - सरधना नगर पालिका, लावड़ नगर पंचायत
ग्रामीण क्षेत्र : मेहरमती गणेशपुर, जलालपुर खिर्वा, जाफराबाद दुर्वेशपुर, बहादुरपुर, बुबकपुर, दबथुवा, दबथुवा गढ़ी, छबड़िया, चांदना, जुल्हैड़ा, सरधना ग्रामीण, मदारपुरा, एतमादनगर अल्लीपुर, टेहरकी, जाफरनगर बेगमाबाद, कमरुद्दीन नगर मढ़ियाई, दादरी दौराला, नंगला सानी, शाहपुर पीरपुर, मदारीपुर, सकौती, कनौड़ा, जसरथपुर, जीतपुर, भरोठा, जमालपुर गोमा, नंगली मजरा मटौर, वलीदपुर, लोइया, मछरी, सहीपुर दौराला, समसपुर सुरानी, गेसूपुर बफावत, खिर्वा नौआबाद, पोहल्ली, बटजेवरा (आंशिक), सरसवा, समसपुर, लावड़ अली ग्रामीण, लावड़ खास ग्रामीण, मवीमीरा, खेड़ी टप्पा, जैनपुर, अझौटा, मीठेपुर, जमालपुर जलालपुर, लावड़ी हरनपुर, मामुरपुर उर्फ देदवा, मैल, अंदावली, बीहटा, जलालबाद उर्फ जलालपुर, खनौदा, मैथन इंदर सिंह (आंशिक), उलखपुर (आंशिक)।


प्रस्ताव पर पहले लगी थी आपत्ति
इस संबंध में मूल प्रस्ताव वर्ष-2003 में भी भेजा गया गया था। इसके बाद संशोधित प्रस्ताव भेजा गया। इस पर प्रमुख सचिव ने पूछा कि इस योजना के वर्ष-2003 के प्रस्ताव में बहसूमा, लावड़ और खरखौदा शमिल नहीं था। बाद में इन्हें शामिल किया गया। क्या यह अब इंटीग्रेटेड प्रस्ताव है। क्या इस प्रस्ताव के बाद शहर को रेग्युलेटेड विकास की तरफ ले जाया जा सकेगा। भू उपयोग कैसे परिवर्तित होगा। इसका क्या प्लान बनाया गया है? एमडीए ने इस बाबत फिर प्लान पेश किया। आपत्ति का निस्तारण होने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा गया।
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