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सिटी डेवलपमेंट प्लान को झटका, एमडीए ने निरस्त किया टेंडर
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सिटी डेवलपमेंट प्लान को झटका, एमडीए ने निरस्त किया टेंडर
मेरठ। सरकार की प्राथमिकता में शामिल सिटी डेवलपमेंट प्लान को करारा झटका लगा है। दो महीने पहले शुरू हुई सिटी डेवलपमेंट प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद एमडीए अधिकारियों ने उसे निरस्त कर दिया है। अयोध्या का सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने वाली कंपनी ली एसोसिएटस साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ही मेरठ का सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने की प्रक्रिया में सबसे आगे थी। लेकिन वित्तीय बोली में लगभग चार करोड़ 50 लाख की मांग करने वाली कंपनी से एमडीए की बात नहीं बन सकी। तीन बार एमडीए और कंपनी में वार्ता के बाद शनिवार को टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। अब सिटी डेवलपमेंट प्लान के लिए नए सिरे से शुरुआत की जाएगी।
एक जुलाई 2021 को एमडीए ने सिटी डेवलपमेंट का ई-टेंडर निकाला था। इसमें पांच कंपनियों ने तकनीकी बोली में भाग लिया। इसमें से दो कंपनियां वित्तीय बोली तक पहुंची। उसमें से भी ली एसोसिएट्स आगे रही। लेकिन एमडीए की अपेेक्षा से अधिक ली एसोसिएट्स की कंसल्टेंसी फीस रही। जिससे बार-बार कम करने के लिए एमडीए ने कंपनी प्रतिनिधियों को बोला। अब इसके लिए एमडीए ने नए सिरे से टेंडर को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इसके लिए बोली तीन सितंबर से शुुरू होकर 11 सितंबर तक चलेंगी। तकनीकी बोली 13 सितंबर और वित्तीय बोली 17 सितंबर को खोली जाएगी।
ऐसे तो शहर का नहीं होगा विकास
सरकार ने एमडीए को खुद बजट की व्यवस्था कर सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं, जबकि अयोध्या को इसके लिए अलग से बजट दिया गया है। ऐसे में शहर का विकास नहीं हो सकता है। जब सरकार की बजट के लिए हाथ पीछे खींच रही है। इससे पहले एमडीए ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए खुद धन जुटाया है। इसमें भी सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए थे। यही हाल इसमें भी दिखाई दे रहा है। चार करोड़ रुपये जुटाना एमडीए के लिए कठिन कार्य हो रहा है। हर महीने एमडीए में कर्मचारियों की सैलरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए आय बढ़ाने के लिए एमडीए हर महीने अपनी योजनाओं में संपत्तियों की ई-नीलामी कर रहा है।
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गुजर गए दो महीने, कैसे बनेगा प्लान
सरकार सिर्फ चुनाव से पहले जनता को जुमला दिखाना चाह रही है। सिटी डेवलपमेंट प्लान के टेंडर प्रक्रिया को करने में दो महीने पूूरे हो गए हैं। इससे पहले ही टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। अब दोबारा से टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें तकनीकी बोली में आने वाली कंपनियों का प्रेजेंटेशन होगा। इसके बाद उन्हें मानक देखे जाएंगे। उसमें से कंपनियों का चयन होगा। फिर वित्तीय बोली देखी जाएगी। उसके बाद सिटी डेवलपमेंट प्लान फाइनल प्रक्रिया तक पहुंचेगा। ऐसे में अभी दो से तीन महीने लग जाएंगे। इसके बाद विधानसभा चुनावों का आगाज हो जाएगा। ऐसे में साफ है कि प्रक्रिया बीच में ही अटक सकती है।
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मेरठ। सरकार की प्राथमिकता में शामिल सिटी डेवलपमेंट प्लान को करारा झटका लगा है। दो महीने पहले शुरू हुई सिटी डेवलपमेंट प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद एमडीए अधिकारियों ने उसे निरस्त कर दिया है। अयोध्या का सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने वाली कंपनी ली एसोसिएटस साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ही मेरठ का सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने की प्रक्रिया में सबसे आगे थी। लेकिन वित्तीय बोली में लगभग चार करोड़ 50 लाख की मांग करने वाली कंपनी से एमडीए की बात नहीं बन सकी। तीन बार एमडीए और कंपनी में वार्ता के बाद शनिवार को टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। अब सिटी डेवलपमेंट प्लान के लिए नए सिरे से शुरुआत की जाएगी।
एक जुलाई 2021 को एमडीए ने सिटी डेवलपमेंट का ई-टेंडर निकाला था। इसमें पांच कंपनियों ने तकनीकी बोली में भाग लिया। इसमें से दो कंपनियां वित्तीय बोली तक पहुंची। उसमें से भी ली एसोसिएट्स आगे रही। लेकिन एमडीए की अपेेक्षा से अधिक ली एसोसिएट्स की कंसल्टेंसी फीस रही। जिससे बार-बार कम करने के लिए एमडीए ने कंपनी प्रतिनिधियों को बोला। अब इसके लिए एमडीए ने नए सिरे से टेंडर को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इसके लिए बोली तीन सितंबर से शुुरू होकर 11 सितंबर तक चलेंगी। तकनीकी बोली 13 सितंबर और वित्तीय बोली 17 सितंबर को खोली जाएगी।
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ऐसे तो शहर का नहीं होगा विकास
सरकार ने एमडीए को खुद बजट की व्यवस्था कर सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं, जबकि अयोध्या को इसके लिए अलग से बजट दिया गया है। ऐसे में शहर का विकास नहीं हो सकता है। जब सरकार की बजट के लिए हाथ पीछे खींच रही है। इससे पहले एमडीए ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए खुद धन जुटाया है। इसमें भी सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए थे। यही हाल इसमें भी दिखाई दे रहा है। चार करोड़ रुपये जुटाना एमडीए के लिए कठिन कार्य हो रहा है। हर महीने एमडीए में कर्मचारियों की सैलरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए आय बढ़ाने के लिए एमडीए हर महीने अपनी योजनाओं में संपत्तियों की ई-नीलामी कर रहा है।
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गुजर गए दो महीने, कैसे बनेगा प्लान
सरकार सिर्फ चुनाव से पहले जनता को जुमला दिखाना चाह रही है। सिटी डेवलपमेंट प्लान के टेंडर प्रक्रिया को करने में दो महीने पूूरे हो गए हैं। इससे पहले ही टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। अब दोबारा से टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें तकनीकी बोली में आने वाली कंपनियों का प्रेजेंटेशन होगा। इसके बाद उन्हें मानक देखे जाएंगे। उसमें से कंपनियों का चयन होगा। फिर वित्तीय बोली देखी जाएगी। उसके बाद सिटी डेवलपमेंट प्लान फाइनल प्रक्रिया तक पहुंचेगा। ऐसे में अभी दो से तीन महीने लग जाएंगे। इसके बाद विधानसभा चुनावों का आगाज हो जाएगा। ऐसे में साफ है कि प्रक्रिया बीच में ही अटक सकती है।