महापौर बोलीं- मुख्यमंत्री से बड़े हो गए नगरायुक्त, विकास के मुद्दों पर नहीं करना चाहते बैठक
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मेरठ शहर के विकास और जनसमस्याओं के निस्तारण के लिए मंगलवार को बुलायी गयी निगम कार्यकारिणी की बैठक को लेकर सियासी पारा गरमा गया। नगरायुक्त और महापौर के बीच चल रही खींचतान भी सड़क पर आ गई है। बैठक में नगरायुक्त या निगम का कोई अधिकारी टाउन हॉल नहीं पहुंचा। टाउन हॉल के तिलक हॉल पर ताले लटके रहे। महापौर और कार्यकारिणी सदस्य व पार्षद करीब आधा घंटा धूप में खड़े रहे। महापौर ने नगरायुक्त पर तीखे आरोप लगाए हैं कि वे मुख्यमंत्री से भी बड़े हो गए हैं क्योंकि मुख्यमंत्री तो विकास चाहते हैं। लेकिन नगरायुक्त नहीं।
महापौर सुनीता वर्मा द्वारा कई बार कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक के लिए पत्र भेजा गया। इसकी सूचना भले ही नगर निगम प्रशासन की तरफ से कार्यकारिणी सदस्यों को नहीं दी गयी थी। लेकिन महापौर ने फोन पर निगम कार्यकारिणी सदस्यों को कार्यकारिणी बैठक की सूचना दी थी। सूचना के आधार पर कार्यकारिणी उपाध्यक्ष इकरामुद्दीन, सदस्य मो. कासिम, धर्मवीर, रंगीता, संगीता, जुबैर, दिलशाद और पार्षद गफ्फार, कुलदीप सैन, कयूम अंसारी, शहजाद मेवाती, रंजन शर्मा आदि बैठक के निर्धारित समय 11:00 बजे से पहले 10:30 बजे ही तिलक भवन पहुंच गए। 11:00 बजे महापौर सुनीता वर्मा भी तिलक भवन पहुंच गईं। लेकिन तिलक भवन के दोनों गेटों पर ताला पाकर उनका पारा चढ़ गया। मीडिया के पहुंचने पर 11:42 पर ताले खुले और महापौर करीब 10 मिनट सभाकक्ष में बैठीं।
नगरायुक्त नहीं चाहते, हो शहर का विकास
टाउन हॉल परिसर स्थित गांधी पार्क में महापौर ने कार्यकारिणी सदस्यों और अन्य पार्षदों के साथ वार्ता की। तिलक हॉल का गेट खुलवाने और निगम कार्यकारिणी बैठक में न आने का कारण पूछने के लिए नगरायुक्त, अपर नगरायुक्त और नगरायुक्त के स्टेनो को कॉल की। लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। उसके बाद महापौर मीडिया से रूबरू हुईं। कहा कि नगरायुक्त उनकी कॉल भी रिसीव नहीं करते हैं। नगरायुक्त का स्टेनो मेरा नंबर देखकर मोबाइल स्विच ऑफ कर लेता है। शहर में न तो विकास कार्य हो रहे हैं न ही हैंडपंप ठीक। सफाई की स्थिति सभी के सामने है। नगरायुक्त शहर का विकास चाहते ही नहीं हैं। निगम में भ्रष्टाचार को जन्म दिया जा रहा है। सफाई कर्मियों की भर्ती को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। नगरायुक्त की हिम्मत नहीं है कि वह निगम बोर्ड और शहर की जनता के सामने आ सकें।
महापौर को भेजे पत्र में भी कर गए गड़बड़
महापौर ने जनहित के विभिन्न बिंदुओं को लेकर 17 जुलाई को टाउन हॉल के तिलक भवन में कार्यकारिणी बैठक बुलाने के लिए 12 जुलाई को नगरायुक्त को पत्र भेजा था। महापौर का आरोप है कि नगरायुक्त मनोज कुमार से वह लगातार फोन पर वार्ता करने का प्रयास करती रही हैं। लेकिन उन्होंने न तो 16 जुलाई शाम तक फोन पर ही कार्यकारिणी बैठक निरस्त करने की बात कही और न ही पत्र भिजवाया। देर रात्रि 9:30 बजे घर पहुंचने पर गार्ड से पता चला कि निगम के कर्मचारी द्वारा एक पत्र दिया गया है। हमने रात्रि में पत्र खोलकर नहीं देखा। निर्णय लिया था कि मीडिया के सामने ही पत्र को खोला जाएगा। महापौर ने बताया कि जो पत्र 16 जुलाई के रात्रि में उनके आवास पर भेजा गया है, उसमें पत्र व्यवहार की तिथि 13 जून लिखी है। जिसमें कार्यकारिणी बैठक न किए जाने के पीछे मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले बिंदु पॉलिथीन, पौधरोपण और कांवड़ यात्रा हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में बैठक करने की बात कही गयी है।
मुख्यमंत्री, मंत्री और कमिश्नर को लिखूंगी पत्र
महापौर ने कहा कि नगरायुक्त मेरे साथ ही नहीं बल्कि सभी पार्षदों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। टाउन हॉल में हमारा बैठने तक का अधिकार छीन लिया है। जनता की समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। पार्षद अपने घर पर न सोने को मजबूर हो रहे हैं। इन सभी बिंदुओं पर मैं सीएम, नगर विकास मंत्री और कमिश्नर को पत्र लिखूंगी। पूछूंगी कि क्या इस तरह प्रदेश का विकास संभव है। क्या सीएम ने कोई ऐसा आदेश दिया है कि नगरायुक्त महापौर सहित पूरे सदन का अपमान करेंगे और शहर का विकास ठप कर देंगे। निगम अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली ने शहर को दस साल पीछे धकेल दिया है।
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