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मौलाना अरशद मदनी ने उठाया सवाल- तबरेज अंसारी को भीड़ ने नहीं मारा तो कैसे हुई उसकी मौत

Fri, 13 Sep 2019 01:43 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 13 Sep 2019 01:43 AM IST
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Maulana Arshad Madni's question if Tabrez Ansari was not killed by the mob then how he died
मौलाना सैय्यद अरशद मदनी - फोटो : अमर उजाला

झारखंड के चर्चित तबरेज अंसारी प्रकरण में हत्या की धारा हटाए जाने को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह हत्या नहीं बल्कि दरिंदगी की एक ऐसी दुखद घटना है, इसमें एक निर्दोष और असहाय व्यक्ति को कुछ लोगों ने मौत के घाट उतार दिया। मदनी ने सवाल उठाया कि तबरेज अंसारी को भीड़ ने नहीं मारा तो उसकी मौत कैसे हुई। 

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गुरुवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हमारा देश सदियों से शांति, एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का केंद्र रहा है, लेकिन अफसोस कि घृणा और एक दूसरे को सहन न करने की खतरनाक सोच ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। मौलाना मदनी ने कहा कि बीते वर्षों में देश भर में धर्म आधारित भीड़ हिंसा हो रही है। घृणा में अंधे होकर झुंड के रूप में कुछ लोग किसी निहत्थे और निर्दोष व्यक्ति को पकड़ लेते हैं और उसे पीट-पीटकर मार देते हैं। इस प्रकार की घटनाएं भारत के माथे पर एक कलंक हैं। 
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मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि ऐसा लगता है कि झारखंड भीड़ हिंसा की प्रयोगशाला बन चुकी है और प्रशासन उसे बढ़ावा दे रहा है। कहा कि तबरेज अंसारी के मामले में अपराधियों को बचाने के लिए जिस प्रकार जान बूझकर हत्या की धारा हटाई गई और यह बताया गया कि उसकी मौत पिटाई से नहीं हार्टअटैक से हुई। पुलिस का यह कार्य न्याय का खून करने जैसा है।

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे को किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की याचिका दाखिल करेगी। इस सिलसिले में जमीयत के वकीलों का पैनल एक याचिका तैयार कर चुका है। इसमें प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट से कराने की मांग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए वहां की सरकार से इस तरह के मामलों में न्याय और कानून का पालन करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। 

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मदनी ने सवाल उठाया कि अगर तबरेज को भीड़ ने नहीं मारा तो उसकी मौत कैसे हुई। उन्होंने कहा कि झारखंड की पुलिस ऐसा करके आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रही है। यह केवल झारखंड का मामला नहीं है, बल्कि दूसरे राज्यों में भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा है। पहलू खां के मामले में जो कुछ हुआ वह यह बताता है कि न्याय भी अब नफरत की राजनीति का शिकार हो चुका है और पुलिस प्रशासन के लोग राजनीतिक दबाव में न्याय और संविधान का गला घोंट रहे हैं।

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