लेफ्टिनेंट आकाश की बहन ने आर्मी अफसरों से कहा- तुम ही बांध लेना राखी लेकिन भाई की मौत का सच बता दो
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रक्षाबंधन से पूर्व ही उन्होंने डाक से भाई के लिए राखी भेजी थी। पर उन्हें नहीं पता था कि इस बरस रेशम की डोर आकाश की कलाई पर सजी हुई वह नहीं देख सकेंगी। भाई के सेना में अफसर बनने को लेकर बहनों ने भी काफी सपने संजोए थे, लेकिन वह एक ही झटके में टूटकर बिखर गए। अब रह गई सिर्फ भाई की यादें। इन्हीं के सहारे अब दोनों बहनों को आगे बढ़ना होगा।
ये तो बस शुरुआत है..अभी तो आगे बढ़ना है
समय बड़ा बलवान होता है। कब क्या हो जाए ये कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही हुआ सरहद पर तैनात लेफ्टिनेंट आकाश चौधरी के साथ। मेरठ निवासी आकाश अपनी पहली पोस्टिंग पर मई-2020 में असम में सिख रेजीमेंट के साथ जुड़े।
महज डेढ़ महीने के अंतराल में देश सेवा करते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली। लेकिन इस दौरान जब कभी भी वह घर पर बात करते थे तो कहते थे कि ये तो बस शुरुआत है...अभी तो आगे बढ़ना है। पिता केपी सिंह बेटे को याद कर फफक पड़ते हैं। कहते हैं बेटा तुमने सेना में बड़ा अधिकारी बनने का जो सपना संजोया था, उसे लेफ्टिनेंट बनकर पूरा किया लेकिन आप हमारे आंगन में ही हमसे दूर हो गए।
घर पर भी लगातार करते रहे व्यायाम
लेफ्टिनेंट आकाश घर पर भी सुबह-शाम दो-दो घंटे व्यायाम करते थे। हाईवे स्थित सिल्वर सिटी कॉलोनी में वह दौड़ लगाते थे। ट्रेनिंग के दौरान घुड़सवारी करते हुए वह गिर गए थे। जिससे उनके हाथ व कंधे में चोट आई थी, लेकिन हाथ में दर्द के बावजूद उन्होंने सुबह-शाम दो-दो घंटे की दौड़ व ट्रेनिंग जारी रखी। सात मार्च 2020 को चेन्नई में पासिंग आउट परेड हुई। पोस्टिंग पर जाने से पहले 20 दिन की छुट्टी मिली। इतने में ही लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन के दौरान भी आकाश ने अपनी फिटनेस बनाए रखने को व्यायाम जारी रखा।
ड्रेस पहनकर चेक करते थे वजन
मां के दुलार के चलते आकाश को खाने में कोई कमी नहीं रहती थी। अधिक व्यायाम करने से उनकी डाइट का ध्यान रखा जाता था। इसी को देखते हुए वह शाम को ड्रेस पहनकर देखते कि कहीं वह मोटे तो नहीं हो रहे। अगर उन्हें जरा भी अंतर नजर आता था तो वह तुरंत अगले दिन अधिक व्यायाम करते थे।
रात में चल रहा था ऑपरेशन
बृहस्पतिवार शाम लेफ्टिनेंट आकाश फॉरवर्ड ऑपरेशन के लिए निकले थे। सैन्य अधिकारियों ने परिवार को बताया रात के समय बिना किसी शोर-शराबे के उनकी टीम को फॉरवर्ड पोजीशन पर पहुंचना था। रात में बिना किसी रोशनी के अंधेरे में ही आगे बढ़ना होता है। उनके कंधे पर लगभग 40 किलो सामान व हाथ में गन होती है। शाम करीब 7 बजे बजे रास्ते में पहाड़ी पर चढ़ाई के दौरान ही लेफ्टिनेंट आकाश लगभग 100-150 मीटर नीचे गिर पड़े। यूनिट के अन्य सैनिकों ने उन्हें खोजना शुरू किया। बिना शोर किए सर्च ऑपरेशन चलाया। सुबह करीब सात बजे पहाड़ी के नीचे लेफ्टिनेंट आकाश को खोज निकाला। वह पेड़ और पहाड़ों के बीच से जमीन पर गिरे थे।