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भक्तों की मनमानी से शिवलिंग को हो रही हानि

Mon, 13 May 2019 04:40 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 13 May 2019 04:40 AM IST
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Loss of devotees to Shivling from arbitrariness
शिवलिंग पर गन्ने का जूस चढ़ाते भक्त - फोटो : अमर उजाला
 बाबा औघड़नाथ के भक्तों के लिए बुरी खबर है। भक्तों द्वारा औघड़नाथ मंदिर में स्थित शिविलिंग पर लगातार जल, दूध, शहद, दही, भस्म के साथ विभिन्न प्रकार की सामग्रियों का पूजन में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके चलते शिविलिंग का क्षरण हो रहा है। स्वयंभू माने जाने वाले बाबा औघड़नाथ तो भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं, लेकिन भक्त उनका ख्याल नहीं रख रहे हैं। यही हालात रहे तो भविष्य में शिवलिंग विलुप्त होने के कगार पर भी पहुंच सकता है।
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काली पलटन स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। इस स्थान का एतिहासिक महत्व भी है। इस स्थल को देखने के साथ बाबा औघड़नाथ का दर्शन करने के लिए देशभर से भक्त आते हैं। तीज-त्योहारों पर तो यहां भक्तों का सैलाब सा उमड़ता है। सालों के भक्त अपने अंदाज में भी शिवलिंग की पूजा करते आ रहे हैं। कोई शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करता है तो कोई भांग और भस्म आदि से। यहां तक कि लोग कई पूजन सामग्रियों को शिवलिंग पर काफी देर तक मलते रहते हैं। इससे शिवलिंग को क्षति होती है। भक्तों का आलम ये है कि वह धातु (लोहा, सोना, चांदी) को भी शिवलिंग से स्पर्श कराने से नहीं चूकते।
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संदेशों का भी नहीं कोई असर
बाबा औघड़नाथ शिव मंदिर समिति की ओर से कई बार भक्तों आग्रह किया गया कि पूजन में ऐसी किसी वस्तु का प्रयोग न करें, जिससे शिवलिंग को नुकसान हो। मंदिर में जगह जगह संदेश भी लगाए गए हैं। लेकिन भक्तों पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा है। समिति सदस्यों का भी मानना है कि अगर भक्त प्रतिबंधित वस्तुओं का शिवलिंग पूजन में प्रयोग करते रहे तो भविष्य में शिवलिंग को काफी नुकसान हो सकता है।
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इस तरह पूजन करना है प्रतिबंधित
- शिवलिंग को न स्पर्श करें और न ही हाथों से रगड़ें।
- पिंडी को सिर न लगाएं।
- पिंडी को अंगूठी या चाबी आदि न छुआएं।
- पिंडी से गले की माला आदि न डालें।

अंधविश्वास में पड़कर कुछ भक्त पूजन में गन्ने का रस, दही, शहद आदि प्रतिबंधित वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं। मंदिर के पुजारी से भी निवेदन किया गया है कि ऐसे भक्तों को समझाने का प्रयास करें। ताकि आने वाली पीढ़ी को भी मंदिर में शिवलिंग के दर्शन मिलते रहें। अगर भक्त जागरूक नहीं हुए तो भविष्य में शिवलिंग के दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे। -डा. महेश बंसल, अध्यक्ष, बाबा औघड़नाथ शिव मंदिर समिति

भक्तों को खुद विचार करना चाहिए कि जिस सामग्री से शिवलिंग को नुकसान पहुंचने की आशंका है, उसका प्रयोग न करें। इससे संबंधित प्रचार सामग्री भी मंदिर में लगाई गई है, लेकिन भक्त इस ओर ध्यान नहीं देते। भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। उन्हें ध्यान कर प्रणाम करने से मनोकामना पूरी हो सकती है।

-श्रीधर त्रिपाठी, मुख्य पुजारी, बाबा औघड़नाथ मंदिर  

महाकालेश्वर मंदिर में भी बने हैं नियम
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी शिवलिंग के क्षरण होने की समस्या के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के जलाभिषेक के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल के लिए कई मानक तय किए हैं, जिनका पालन करना सबके लिए अनिवार्य होगा। इन नियमों के तहत भक्त मंदिर में आधा लीटर पानी ही ले जा पाएंगे। भस्म आरती के दौरान शिवलिंग को सूती कपड़े से ढका जाएगा। शिवलिंग पर चीनी पाउडर लगाने की मनाही होगी। नमी से बचाने के लिए पंखे लगाए जाएंगे। शाम 5 बजे के बाद सूखी पूजा की जाएगी।
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