एक्टिव है चंद्रशेखर, कांग्रेस की पैनी नजर, क्या बसपा के लिए खड़ी करेगा बड़ी मुश्किल?
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प्रदेश क्या पूरे देश में अपनी पहचान बनाने वाले चंद्रशेखर पर हर राजनीतिक पार्टी की निगाह है। हमेशा अपने आप को राजनीति से दूर बताने वाले चंद्रशेखर की प्रियंका गांधी के साथ हुई एक मुलाकात ने सियासी मायने काफी हद तक साफ कर दिए है। सवाल सीधा है कि अगर कांग्रेस ने किसी तरह चंद्रशेखर को पार्टी में शामिल कर लिया तो इससे पश्चिमी यूपी में बसपा को नुकसान पहुंच सकता है। इसकी वजह यह है कि चंद्रशेखर ने पश्चिमी यूपी में युवाओं के बीच अपनी अच्छी पकड़ बना रखी है। उदाहरण के तौर इसका अंदाजा ऐसे भी लगाया जा सकता है कि मुजफ्फरगर, बिजनौर और मेरठ में जब- जब चंद्रशेखर ने सभाएं की तो उस दौरान उनके समर्थन में बड़ी संख्या में युवाओं को देखा गया है। क्या चंद्रशेखर बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ है या नहीं ? आगे जानिए:-
भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर इन दिनों सुर्खियों में हैं। उन्होंने हाल ही में एलान किया था कि सहारनपुर से दिल्ली के जंतर- मंतर तक बहुजन हुंकार रैली निकाली जाएगी। इसके बाद उन्होंने बिना अनुमति के रैली निकाली तो पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने रैली निकालने से मना किया लेकिन, भीम आर्मी के समर्थक नहीं माने, इस बीच पुलिस ने चंद्रशेखर को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेते ही चंद्रशेखर की तबीयत बिगड़ गई। वहीं पुलिस ने आनन- फानन में चंद्रशेखर को मेरठ के आनंद अस्पताल में भर्ती कराया। इस बीच कांग्रेस ने अचानक एक बड़ा दांव खेल दिया।
जहां बसपा सुप्रीमो मायवती ने कांग्रेस के साथ किसी भी राज्य में गठबंधन करने से साफ मना कर दिया। तो वहीं कांग्रेस ने भी अगले ही दिन एक बड़ा दांव खेला। पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और पश्चिमी यूपी के कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया अचानक चंद्रशेखर ने मिलने मेरठ के आनंद अस्पताल पहुंच गए। प्रियंका के मेरठ पहुंचते ही बसपा में खलबली मच गई और सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई। इस दौरान प्रियंका ने चंद्रशेखर से सात मिनट तक मुलाकात की और उन्होंने कहा था कि मुझे इस लड़के का जोश और संघर्ष पसंद आया है। उन्होंने यह भी कहा था कि मोदी सरकार इस युवा की आवाज को कुचलना चाहती है। वहीं चंद्रशेखर ने कहा था कि मेरा कांग्रेस से कोई लेना- देना नहीं है। मैं गठबंधन के साथ हूं। लेकिन इस दौरान चंद्रशेखर ने एक ऐसा एलान किया जो कि पूरे देश में गूंज गया। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी जहां से भी चुनाव लड़ेंगे मैं उनके खिलाफ वहीं से चुनाव लड़ूंगा। अब आगे जानिए प्रियंका और चंद्रशेखर की मुलाकात कराने के पीछे कौन बड़ा नेता?
दरअसल, बात पांच मई 2017 की है। इस दौरान सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में शोभा यात्रा निकालने को लेकर ठाकुर और अनुसूचित जाति के लोगों में बवाल हो गया था। बवाल इतना बढ़ गया था कि पूरे एक महीने तक दोनों समाज के लोगों में हिंसा फैली रही। वहीं इस बीच 21 मई को बसपा सुप्रीमो मायावती सहारनपुर पहुंची और पीड़ित लोगों से मिलकर उनका हाल जाना। हालांकि उसी दिन फिर से ठाकुर और अनुसूचित जाति के लोगों में बवाल हो गया था। इस जातीय संघर्ष में दो लोगों की मौत तो दर्जनों लोग घायल हो गए थे। उधर, पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए चंद्रशेखर समेत दोनों समाज के कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद भीम आर्मी के समर्थकों ने खूब धरने- प्रदर्शन किए। इसी दौरान भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को कांग्रेस के दिग्गज नेता इमरान मसूद का साथ मिला। इमरान ने चंद्रशेखर की खूब मदद की। इस दौरान दोनों के बीच काफी नजकियां बन गई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जेल से बाहर आने के बाद चंद्रशेखर ने एलान किया था कि मुस्लिम भाइयों के लिए खून भी देने को तैयार हूं। बस यही से कांग्रेस ने चंद्रशेखर पर पैनी नजर बना ली थी।
अनुसूचित जाति के लोग कहते हैं कि वोट बहन जी को ही देंगे-
इन सभी बातों के बीच एक सवाल यह भी है कि जब सहारनपुर में अनुसूचित जाति के लोगों से पूछा गया था कि अगर चंद्रशेखर चुनाव लड़ते हैं तो आप वोट मायावती को देंगे या चंद्रशेखर को? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि हम चंद्रशेखर के पूरी तरह से साथ हैं लेकिन चुनाव में वोट सिर्फ मायावती को ही देंगे। वैसे तो चंद्रशेखर भी हमेशा यही कहते हैं कि मायावती मेरी बुआ है और हम सभी उन्हें पूरा सपोर्ट करेंगे। लेकिन मायावती उनके इस बयान को कोई खास तवज्जो नहीं देती, वह कई बार कह चुकी है कि मेरा भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से कोई रिश्ता नहीं है। लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए यह कोई नहीं जानता। अगर कांग्रेस ने चंद्रशेखर को पार्टी में शामिल कर मैदान में उतार दिया तो पश्चिमी में समीकरण बदल सकते हैं।
क्या है भीम आर्मी
सहारनपुर बवाल से पहले कोई नहीं जानता था कि भीम आर्मी कोई संगठन है, लेकिन अनुसूचित जाति के लोगों के सहारे हवा लेकर दिल्ली पहुंचे भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को आज हर कोई जान गया है कि यह दलितों का युवा नेता बनकर सामने आ रहा है। पिछले दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान चंद्रशेखर को भारी समर्थन मिलता दिखा। इस रैली में यूपी के अलावा बिहार, हरियाणा, झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में युवा यहां पहुंचे थे।
बता दें कि भीम आर्मी संगठन ही वो नाम है जिसे अनुसूचित जाति के लोग पूर्ण समर्थन कर रहे हैं। वहीं अनुसूचित जाति के लोग इस संगठन से तेजी के साथ जुड़ रहे हैं।
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