लोकसभा चुनाव 2019: वोटरों की चाल ने उलझा दिया दिग्गजों का गणित, पढ़िए खास रिपोर्ट
यह मतदान बेहद सधी रणनीति और गति का साबित हुआ। बिना हंगामे और हड़बड़ी के मतदान प्रतिशत तो बढ़ ही गया, साथ ही दिग्गजों के पेंच भी जबरदस्त तरीके से उलझ गए। प्रत्याशियों का यह गुमान भी टूटता नजर आया कि वोटर केवल उन्हीं के पक्ष में वोट ज्यादा कर रहे हैं।
इस बार चुनाव कुछ जुदा नजर आया। तमाम दल यह आकलन कर रहे थे कि मतदान प्रतिशत क्या होगा? कहीं कम न रह जाए। भाजपा का मानना था कि प्रतिशत बढ़ा तो फायदा उसी को होगा। गठबंधन कयास लगाता रहा कि बढ़ा प्रतिशत उसे लाभ पहुंचाएगा। इससे इतर वोटरों ने सधी गति से वोट किए। सुबह ही बूथों पर लाइनें तो लगीं, पर आपाधापी कहीं नहीं दिखाई दी। न ही कहीं लोगों के जत्थे दिखे। भाजपाई रणनीतिकारों को जब-जब लगा कि उनके पक्ष में वोटिंग हो रही है, तब-तब यह देखने में आया कि एससी-मुस्लिम बहुल बूथों पर भी काफी मतदान हो रहा है। यही हाल गठबंधन का रहा। उन्हें लगा कि इस बार एससी-मुस्लिम वोटों का प्रतिशत ज्यादा रहेगा, तो दिखा कि भाजपा के गढ़ वाले बूथों पर भी खूब मतदान हो रहा है। ऐसे में दोनों के पेंच उलझ गए। इस बीच कांग्रेस भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही। इसके बावजूद मतदान अपनी स्पीड से चलता रहा।
बता दें कि लिसाड़ी गेट के अहम बूथों पर सुबह नौ बजे तक मात्र 12 प्रतिशत ही मतदान हुआ था। बाद में यहां ऐसी गति बढ़ी कि एक बजे तक मतदान 50 प्रतिशत के पार चला गया। श्यामनगर, भूमिया पुल, आरटीओ, जाकिर कालोनी, इंदिरा चौक आदि में भी यही स्थिति रही। उधर, थापर नगर, साकेत, शास्त्रीनगर में भी कुछ ऐसा ही दिखा। शहर ही नहीं खरखौदा, अतराड़ा, असौड़ा, सौंदत्त, ललियाना, बढ़ला, किला परीक्षितगढ़, अब्दुल्लापुर आदि में भी मतदान में दोपहर को तेजी आ गई।
वहीं हस्तिनापुर विधानसभा बिजनौर लोकसभा से जुड़ी है, पर इससे जुड़े गांवों में भी यही स्थिति रही। उधर, विवि स्थित केंद्र में भी मतदान समान गति से चला। जानकारों का कहना है कि इस बार यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में बंपर मतदान हो रहा है या नहीं। सहारनपुर में भी हालात ऐसे ही थे। वहां दोपहर करीब एक बजे मतदान में तेजी आई और प्रतिशत 50 तक चला गया। मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत, कैराना में वोटरों की सधी चाल ने सारे प्रत्याशियों को उलझा दिया।
इस चक्कर में छूट भी गए
शाम ठीक छह बजे मतदान बंद करने का कार्यक्रम था। कई क्षेत्र ऐसे रहे, जहां लोग इंतजार करते रहे और सुरक्षाकर्मियों ने ठीक छह बजे गेट बंद कर दिए। बाहर के लोग बाहर ही रह गए। ऐसे में देर से वोट डालने की रणनीति भारी भी पड़ी।
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