गठबंधन ने भाजपा के लिए खींची चिंता की लकीर, पश्चिमी यूपी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
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लोकसभा चुनाव में यूपी के भीतर गठबंधन के आंकड़े साल 2022 के विधानसभा चुनाव की भी तस्वीर को प्रस्तुत कर गए हैं। यदि विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन हुआ तो भाजपा को मुश्किल पड़ सकती है। क्योंकि जो आंकड़े विधानसभावार मतगणना के आए हैं, वह बहुत ही चौंकाने वाले हैं। ऐसे में गठबंधन ने जो आईना दिखाया है, उसे लेकर भाजपा नेतृत्व को सूरत-ए-हाल बदलने के लिए नए सिरे से मंथन करना होगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रथम चरण में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, कैराना, बागपत और मेरठ की लोकसभा सीटों पर चुनाव हुआ। जिसमें भाजपा ने चार लोकसभा सीटों पर जीत जरूर दर्ज की है। लेकिन विधानसभावार आंकड़े यूपी विधानसभा को लेकर कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। इन आंकड़ों ने आने वाले समय में भाजपा के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। क्योंकि दलित-मुस्लिम समीकरण के बीच जातिगत आंकड़ों के बीच फंसने वाले चुनाव में भाजपा के विधायक अपने ही क्षेत्र में लोकसभा प्रत्याशी को जीत नहीं दिला सके।
बागपत लोकसभा में सभी पांचों विधानसभाओं में इस समय भाजपा के विधायक हैं। लेकिन दो विधानसभा सिवालखास और छपरौली ऐसी रहीं जहां पर भाजपा बढ़त बनाने में कामयाब नहीं हो सकी। मेरठ लोकसभा सीट में पांच विधानसभा आती हैं और चार में भाजपा विधायक हैं। इनमें तीन विधानसभा किठौर, मेरठ दक्षिण और हापुड़ विधानसभा जहां भाजपा से विधायक हैं, वहां पर भाजपा की करारी हार हुई। अकेली कैंट विधानसभा ने ही भाजपा की जीत का रास्ता तैयार किया।
मुजफ्फरनगर विधानसभा में सभी विधानसभाओं में भाजपा विधायक हैं। लेकिन दो विधानसभा चरथावल और बुढ़ाना में भाजपा पिछड़ गई। खतौली, सरधना और मुजफ्फरनगर में भाजपा को बढ़त मिली। लेकिन यह बढ़त भी बहुत कम रही, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती है। ऐसा ही हाल कैराना की नकुड़ विधानसभा में हुआ, जहां पर भाजपा से विधायक होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी पिछड़ गए।
सहारनपुर में तो सबसे अलग स्थिति बनी। यहां पर सहारनपुर नगर विधानसभा से ही भाजपा प्रत्याशी को बढ़त मिली, जबकि इस विधानसभा में सपा विधायक हैं। जबकि देवबंद और रामपुर मनिहारन में भाजपा विधायक होने के बावजूद हार मिली। बिजनौर लोकसभा सीट की सभी विधानसभा में भाजपा के विधायक हैं। मेरठ जनपद की हस्तिनापुर में जहां भाजपा प्रत्याशी को हार मिली, तो पुरकाजी, मीरापुर और बिजनौर में भी भाजपा को झटका लगा। सिर्फ चांदपुर में ही भाजपा बढ़त बनाने में कामयाब हो सकी।
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