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श्रीमद्भागवत श्रवण से मोक्ष मार्ग होता है सरल : अंश वशिष्ठ
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- नर नारायण सेवा संस्थान की ओर से हुआ कार्यक्रम का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नर नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र ही जीव के लिए मुक्ति का मार्ग सुगम बना देता है।
उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला था। जो हमें यह संदेश देता है कि हमारी जीवन अवधि भी सीमित है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को धर्ममय बनाकर मोक्ष की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की मृत्यु को सरल बनाते हुए उसे ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग दिखाती है।
कथा व्यास ने बताया कि यह कथा इतनी प्रभावशाली है कि यदि कोई व्यक्ति जीवन भर पाप करता रहा हो और मृत्यु के बाद प्रेत योनि में भी चला गया हो तो भी उद्धार करने की क्षमता श्रीमद्भागवत में है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाना चाहिए। साथ ही सप्ताह में कुछ समय मंदिर में झाड़ू या पोछा लगाने जैसी सेवा भी करनी चाहिए। इससे मनुष्य के दुष्कर्मों का नाश होता है।
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कथा के यजमान दीपक शर्मा रहे जबकि पंडित ध्रुव वशिष्ठ वैदिक ने विधिवत पूजन कराया। कार्यक्रम में आचार्य कंवल नैन वशिष्ठ , ओम प्रकाश मखीजा, केवल खन्ना, पंडित मुकेश शर्मा, पंडित गौरव नौटियाल, पंडित शिव कुमार शर्मा, पंकज कतीरा, अभिनव सहित अन्य मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नर नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र ही जीव के लिए मुक्ति का मार्ग सुगम बना देता है।
उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला था। जो हमें यह संदेश देता है कि हमारी जीवन अवधि भी सीमित है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को धर्ममय बनाकर मोक्ष की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की मृत्यु को सरल बनाते हुए उसे ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग दिखाती है।
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कथा व्यास ने बताया कि यह कथा इतनी प्रभावशाली है कि यदि कोई व्यक्ति जीवन भर पाप करता रहा हो और मृत्यु के बाद प्रेत योनि में भी चला गया हो तो भी उद्धार करने की क्षमता श्रीमद्भागवत में है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाना चाहिए। साथ ही सप्ताह में कुछ समय मंदिर में झाड़ू या पोछा लगाने जैसी सेवा भी करनी चाहिए। इससे मनुष्य के दुष्कर्मों का नाश होता है।
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कथा के यजमान दीपक शर्मा रहे जबकि पंडित ध्रुव वशिष्ठ वैदिक ने विधिवत पूजन कराया। कार्यक्रम में आचार्य कंवल नैन वशिष्ठ , ओम प्रकाश मखीजा, केवल खन्ना, पंडित मुकेश शर्मा, पंडित गौरव नौटियाल, पंडित शिव कुमार शर्मा, पंकज कतीरा, अभिनव सहित अन्य मौजूद रहे।