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टीले पर बैठा देखे तेंदुए, दहशत
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टीले पर बैठा देखे तेंदुए, दहशत
किठौर। छह दिन बाद भी तेंदुआ परिवार वन विभाग के अधिकारियों की पकड़ से दूर है। वन विभाग की प्लानिंग के साथ ही तेंदुओं का परिवार स्थान बदल रहा है। बृहस्पतिवार को असीलपुर-भड़ौली के खेतों में स्थित एक मिट्टी के टीले पर तेंदुओं का परिवार देखा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बाद भी वन विभाग के कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे।
फतेहपुर से पैदल लौट रहे बच्चों व भट्टे के एक कर्मचारी शमशाद ने असीलपुर के जंगल में खेत में टीले पर तेंदुआ को बैठा देखा था। ग्रामीणों को देख दो तेंदुए दूर निकल गए, जबकि एक काफी देर तक टीले पर बैठा रहा। टीम के कर्मचारियों ने टीले पर मिले पद् चिन्हों को फोटो भेजकर वन विशेषज्ञों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि दो मादा तेंदुआ जबकि एक नर तेंदुआ के है। जिसमें एक मादा तेंदुआ छोटा है। तेंदुआ टीले पर बैठना पसंद करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ होने की सूचना असीलपुर और भड़ौली गांव में आग की तरह फैल गई। ग्रामीण संदीप, विकास, विक्रांत आदि ने बताया कि पूरे दिन वन विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुओं को पकड़ने के लिए कांबिग नहीं की। उनका कहना है कि वन विभाग शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। तीनों गांवों के बीच तेंदुआ दिखने के बाद लोगों में दहशत है। उधर, फतेहपुर के खेतों में 24 घंटे से तेंदुआ नहीं देखा गया। फतेहपुर के जंगल में वन विभाग की टीम ने बकरी के साथ दो पिंजरे लगाएं थे, लेकिन तेंदुआ पिंजरे में नहीं फंसा।
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बृहस्पतिवार को एक और पिंजरा गाजियाबाद से फतेहपुर गांव में दोपहर 2 बजे लाया गया। इसके बाद भी कोई अधिकारी उसे लगाने नहीं पहुंच सका।
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किठौर। छह दिन बाद भी तेंदुआ परिवार वन विभाग के अधिकारियों की पकड़ से दूर है। वन विभाग की प्लानिंग के साथ ही तेंदुओं का परिवार स्थान बदल रहा है। बृहस्पतिवार को असीलपुर-भड़ौली के खेतों में स्थित एक मिट्टी के टीले पर तेंदुओं का परिवार देखा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बाद भी वन विभाग के कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे।
फतेहपुर से पैदल लौट रहे बच्चों व भट्टे के एक कर्मचारी शमशाद ने असीलपुर के जंगल में खेत में टीले पर तेंदुआ को बैठा देखा था। ग्रामीणों को देख दो तेंदुए दूर निकल गए, जबकि एक काफी देर तक टीले पर बैठा रहा। टीम के कर्मचारियों ने टीले पर मिले पद् चिन्हों को फोटो भेजकर वन विशेषज्ञों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि दो मादा तेंदुआ जबकि एक नर तेंदुआ के है। जिसमें एक मादा तेंदुआ छोटा है। तेंदुआ टीले पर बैठना पसंद करता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ होने की सूचना असीलपुर और भड़ौली गांव में आग की तरह फैल गई। ग्रामीण संदीप, विकास, विक्रांत आदि ने बताया कि पूरे दिन वन विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुओं को पकड़ने के लिए कांबिग नहीं की। उनका कहना है कि वन विभाग शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। तीनों गांवों के बीच तेंदुआ दिखने के बाद लोगों में दहशत है। उधर, फतेहपुर के खेतों में 24 घंटे से तेंदुआ नहीं देखा गया। फतेहपुर के जंगल में वन विभाग की टीम ने बकरी के साथ दो पिंजरे लगाएं थे, लेकिन तेंदुआ पिंजरे में नहीं फंसा।
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बृहस्पतिवार को एक और पिंजरा गाजियाबाद से फतेहपुर गांव में दोपहर 2 बजे लाया गया। इसके बाद भी कोई अधिकारी उसे लगाने नहीं पहुंच सका।