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Meerut News: स्मार्ट क्लास में पढ़ाई, पेयजल और जलभराव की समस्या
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सरधना। बीआरसी परिसर में निकासी नहीं होने से भरा बारिश का पानी। संवाद
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- तीन साल पहले विद्यालय को तत्कालीन डीएम ने लिया था गोद
- 490 बच्चों वाले विद्यालय में पेयजल व्यवस्था भी बदहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। नगर के बीआरसी परिसर में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सुविधाएं बढ़ाए जाने के बावजूद शिक्षकों की कमी बच्चों की पढ़ाई में बड़ी चुनौती बनी हुई है। विद्यालय में 490 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि जूनियर कक्षाओं के लिए मानक के अनुसार पांच शिक्षकों की जरूरत है। इसके सापेक्ष यहां केवल तीन शिक्षक तैनात हैं। दो शिक्षकों की कमी का असर जूनियर कक्षाओं की पढ़ाई और कक्षाओं के संचालन पर पड़ रहा है। सोमवार को 422 बच्चे विद्यालय में उपस्थित मिले।
विद्यालय में कुल 14 शिक्षक तैनात हैं, जिनमें एक पुरुष और 13 महिला शिक्षक हैं। नौ कमरों वाले विद्यालय में 490 बच्चों के पंजीकृत होने के कारण कक्षाओं पर भी दबाव बना रहता है। बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता नहीं होने से शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ रही हैं। बच्चों ने बताया कि शिक्षक कम होने के कारण प्रत्येक विद्यार्थी पर पर्याप्त ध्यान देना मुश्किल होता है।
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टोंटी और टंकी टूटी
विद्यालय में पेयजल सुविधा की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान बच्चे सरकारी नल से पानी पीते मिले, जबकि पेयजल व्यवस्था के लिए लगी टोंटी और टंकी टूटी पड़ी है। विद्यालय में तीन शौचालय हैं। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के लिहाज से शौचालयों की उपलब्धता के साथ उनकी नियमित साफ-सफाई और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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परिसर में भरता है बारिश का पानी
विद्यालय परिसर में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी रहती है। इससे बच्चों और शिक्षकों को परेशानी होती है। विद्यालय तक करीब ढाई से तीन किलोमीटर दूर स्थित गांवों और इलाकों से भी बच्चे पढ़ने आते हैं। बारिश के दौरान रास्तों की स्थिति खराब होने पर दूर से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्मार्ट क्लास में पढ़ते मिले बच्चे
विद्यालय में स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। विद्यालय में बिजली कनेक्शन के साथ 24 पंखे लगे हैं। भवन के तीन और पांच नंबर कमरों में वृहद मरम्मत का कार्य कराया गया है। कायाकल्प योजना के तहत नगर पालिका की ओर से भी विद्यालय में विभिन्न कार्य कराए गए हैं। इसके बावजूद पेयजल, जल निकासी और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
...और बेहतर किए जाने की जरूरत
करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन जिलाधिकारी ने विद्यालय को गोद लिया था। इसके बाद विद्यालय में सुविधाओं के विकास और कायाकल्प के तहत कई कार्य कराए गए। हालांकि, मौजूदा स्थिति में शिक्षकों की कमी समेत कुछ बुनियादी व्यवस्थाओं को और बेहतर किए जाने की जरूरत है।
प्रधानाध्यापिका ने बताई शिक्षकों की कमी
प्रधानाध्यापिका कुसुम ने बताया कि विद्यालय में 490 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें निरीक्षण के दिन 422 विद्यार्थी उपस्थित रहे। जूनियर स्तर पर शिक्षकों की कमी है। इससे उपलब्ध शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी रहती है और कक्षा के संचालन में भी दबाव बनता है।
बयान...
विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की विभागीय स्तर पर निगरानी की जाती है। मानक के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - सुदर्शन लाल, खंड शिक्षा अधिकारी
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- 490 बच्चों वाले विद्यालय में पेयजल व्यवस्था भी बदहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। नगर के बीआरसी परिसर में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सुविधाएं बढ़ाए जाने के बावजूद शिक्षकों की कमी बच्चों की पढ़ाई में बड़ी चुनौती बनी हुई है। विद्यालय में 490 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि जूनियर कक्षाओं के लिए मानक के अनुसार पांच शिक्षकों की जरूरत है। इसके सापेक्ष यहां केवल तीन शिक्षक तैनात हैं। दो शिक्षकों की कमी का असर जूनियर कक्षाओं की पढ़ाई और कक्षाओं के संचालन पर पड़ रहा है। सोमवार को 422 बच्चे विद्यालय में उपस्थित मिले।
विद्यालय में कुल 14 शिक्षक तैनात हैं, जिनमें एक पुरुष और 13 महिला शिक्षक हैं। नौ कमरों वाले विद्यालय में 490 बच्चों के पंजीकृत होने के कारण कक्षाओं पर भी दबाव बना रहता है। बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता नहीं होने से शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ रही हैं। बच्चों ने बताया कि शिक्षक कम होने के कारण प्रत्येक विद्यार्थी पर पर्याप्त ध्यान देना मुश्किल होता है।
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टोंटी और टंकी टूटी
विद्यालय में पेयजल सुविधा की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान बच्चे सरकारी नल से पानी पीते मिले, जबकि पेयजल व्यवस्था के लिए लगी टोंटी और टंकी टूटी पड़ी है। विद्यालय में तीन शौचालय हैं। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के लिहाज से शौचालयों की उपलब्धता के साथ उनकी नियमित साफ-सफाई और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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परिसर में भरता है बारिश का पानी
विद्यालय परिसर में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी रहती है। इससे बच्चों और शिक्षकों को परेशानी होती है। विद्यालय तक करीब ढाई से तीन किलोमीटर दूर स्थित गांवों और इलाकों से भी बच्चे पढ़ने आते हैं। बारिश के दौरान रास्तों की स्थिति खराब होने पर दूर से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्मार्ट क्लास में पढ़ते मिले बच्चे
विद्यालय में स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। विद्यालय में बिजली कनेक्शन के साथ 24 पंखे लगे हैं। भवन के तीन और पांच नंबर कमरों में वृहद मरम्मत का कार्य कराया गया है। कायाकल्प योजना के तहत नगर पालिका की ओर से भी विद्यालय में विभिन्न कार्य कराए गए हैं। इसके बावजूद पेयजल, जल निकासी और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
...और बेहतर किए जाने की जरूरत
करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन जिलाधिकारी ने विद्यालय को गोद लिया था। इसके बाद विद्यालय में सुविधाओं के विकास और कायाकल्प के तहत कई कार्य कराए गए। हालांकि, मौजूदा स्थिति में शिक्षकों की कमी समेत कुछ बुनियादी व्यवस्थाओं को और बेहतर किए जाने की जरूरत है।
प्रधानाध्यापिका ने बताई शिक्षकों की कमी
प्रधानाध्यापिका कुसुम ने बताया कि विद्यालय में 490 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें निरीक्षण के दिन 422 विद्यार्थी उपस्थित रहे। जूनियर स्तर पर शिक्षकों की कमी है। इससे उपलब्ध शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी रहती है और कक्षा के संचालन में भी दबाव बनता है।
बयान...
विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की विभागीय स्तर पर निगरानी की जाती है। मानक के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - सुदर्शन लाल, खंड शिक्षा अधिकारी

सरधना। बीआरसी परिसर में निकासी नहीं होने से भरा बारिश का पानी। संवाद

सरधना। बीआरसी परिसर में निकासी नहीं होने से भरा बारिश का पानी। संवाद