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क्रांति की सरजमीं पर दिखा युवा जोश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:07 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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क्रांति की सरजमीं पर रविवार को हुए राष्ट्रोदय समागम में युवाओं का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। 12 साल के बच्चे से लेकर 40 साल के युवाओं की भीड़ देखकर सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत और महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज भी गदगद हो गए। उन्होंने मंच से कहा कि मेरठ से ही क्रांति की शुरुआत हुई थी, यहीं से अब नए राष्ट्र का उदय होगा।
रविवार को जागृति विहार में हजारों बीघा जमीन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय समागम में संघ का चेहरा बदला नजर आया। सुबह दस बजे से ही यहां पर स्वयंसेवकों का पहुंचना शुरू हो गया। समागम में शामिल होने के लिए बनाए गए 13 गेट में से कोई ऐसा नहीं था जिस पर स्वयंसेवकों की लाइन न लगी हो। 12 साल के बच्चों से लेकर 40 साल के युवाओं की इतनी बड़ी भागीदारी को देखकर ऐसा लगा रहा मानो ये संघ का समागम नहीं बल्कि कॉलेज और स्कूल की पाठशाला हो। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला हर्षित हो या फिर अमनदीप। उनको आरएसएस के बारे में तो ज्ञान नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि यहां पर वे अनुशासन सीखने के लिए आएं हैं। मलियाना, सुभाषनगर, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, तमाम जिलों से गणवेश में आए बच्चे भी दूसरे स्वयंसेवकों को देखकर अपनी पानी की खाली बोतल को जमीन से उठाकर बैग में रखने से पीछे नहीं हट रहे थे।
10वीं कक्षा का रोहन और 12वीं कक्षा के छात्र मोहित से यहां आने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले शाखा में गए तो देश के बारे में बहुत कुछ जानने का मौका मिला। जो किताबों में नहीं पढ़ा था वो सब वहां पता चल गया। ऐसे में उनको इस कार्यक्रम की जानकारी हुई तो वे खुद को रोक नहीं सके। इंजीनियर के छात्र हों या फिर मेडिकल के स्टूडेंट्स। ये वे छात्र थे जिन्होंने मोहन भागवत को यू-ट्यूब पर बोलते देखा था। आरएसएस से जुड़ने के कारण पर उनका जवाब साफ था कि संस्कृति और राष्ट्र के लिए जो युवा काम न करे वो युवा नहीं। वो भारतीय नहीं। युवा उद्यमी, युवा किसान और युवा अधिवक्ताओं की संख्या भी अच्छी खासी नजर आई। अधिवक्ता सचिन देव और विकास तेवतिया ने कहा कि धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं। हर कोई समागम का हिस्सा बनने को उत्साहित नजर आ रहा था। ठीक तीन बजे सर संघचालक मोहन भागवत ने मैदान का निरीक्षण किया तो सभी अनुशासित हो गए। राष्ट्रोदय गीत विश्व गगन में फिर से गूंजे, भारत माता की जय जय जय, बढ़ते जाएं हो निर्भय, बढ़ते जाएं हो निर्भय...सुनकर हर कोई भावों में बहने लगा।
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रविवार को जागृति विहार में हजारों बीघा जमीन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय समागम में संघ का चेहरा बदला नजर आया। सुबह दस बजे से ही यहां पर स्वयंसेवकों का पहुंचना शुरू हो गया। समागम में शामिल होने के लिए बनाए गए 13 गेट में से कोई ऐसा नहीं था जिस पर स्वयंसेवकों की लाइन न लगी हो। 12 साल के बच्चों से लेकर 40 साल के युवाओं की इतनी बड़ी भागीदारी को देखकर ऐसा लगा रहा मानो ये संघ का समागम नहीं बल्कि कॉलेज और स्कूल की पाठशाला हो। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला हर्षित हो या फिर अमनदीप। उनको आरएसएस के बारे में तो ज्ञान नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि यहां पर वे अनुशासन सीखने के लिए आएं हैं। मलियाना, सुभाषनगर, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, तमाम जिलों से गणवेश में आए बच्चे भी दूसरे स्वयंसेवकों को देखकर अपनी पानी की खाली बोतल को जमीन से उठाकर बैग में रखने से पीछे नहीं हट रहे थे।
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10वीं कक्षा का रोहन और 12वीं कक्षा के छात्र मोहित से यहां आने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले शाखा में गए तो देश के बारे में बहुत कुछ जानने का मौका मिला। जो किताबों में नहीं पढ़ा था वो सब वहां पता चल गया। ऐसे में उनको इस कार्यक्रम की जानकारी हुई तो वे खुद को रोक नहीं सके। इंजीनियर के छात्र हों या फिर मेडिकल के स्टूडेंट्स। ये वे छात्र थे जिन्होंने मोहन भागवत को यू-ट्यूब पर बोलते देखा था। आरएसएस से जुड़ने के कारण पर उनका जवाब साफ था कि संस्कृति और राष्ट्र के लिए जो युवा काम न करे वो युवा नहीं। वो भारतीय नहीं। युवा उद्यमी, युवा किसान और युवा अधिवक्ताओं की संख्या भी अच्छी खासी नजर आई। अधिवक्ता सचिन देव और विकास तेवतिया ने कहा कि धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं। हर कोई समागम का हिस्सा बनने को उत्साहित नजर आ रहा था। ठीक तीन बजे सर संघचालक मोहन भागवत ने मैदान का निरीक्षण किया तो सभी अनुशासित हो गए। राष्ट्रोदय गीत विश्व गगन में फिर से गूंजे, भारत माता की जय जय जय, बढ़ते जाएं हो निर्भय, बढ़ते जाएं हो निर्भय...सुनकर हर कोई भावों में बहने लगा।
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