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जानिए, बिजनौर से दबोचे गये मुंबई धमाकों के आरोपी कादिर से जुड़ी ये बड़ी बातें

Tue, 11 Jul 2017 03:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर Updated Tue, 11 Jul 2017 03:00 PM IST
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Know, these big things related to Kadir, accused of Mumbai blasts in Bijnor
आरोपी कादीर

19 साल मुंबई में गुजारने के बाद कदीर 1990 में मुंबई से नजीबाबाद लौट तो आया, लेकिन उसका मुंबई और गुजरात आना जाना लगा रहा। इस दौरान दाऊद गैंग के गुर्गों से भी उसका संपर्क बना रहा था। बम धमाकों से उसे सीधे जुड़े होने का मामला सामने आने के बाद भी वह 24 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा।

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पुलिस की मानें तो कल्हेडी के रहने वाले कदीर के पिता अमीर अहमद 1971 में अपना परिवार लेकर मुंबई चले गए थे। उस समय कदीर की उम्र करीब 15 साल थी। वह वहां पर मछली का कारोबार करने लगे। उम्र के साथ बड़ा होता गया कदीर भी मछलियों के धंधे से जुड़ गया। सलीम कुत्ता के साथ उसकी दोस्ती बढ़ती गई। इस दौरान ये तस्करी करने वालों से जुड़े। तस्करी के दौरान ही इनकी टाइगर मेमन से नजदीकियां बढ़ती गई, जो इन्हें दाऊद तक ले गई। दाऊद के कहने पर मुंबई धमाकों के लिए विस्फोटक सामग्री पहुंचाने के लिए जिन लोगों का चयन टाइगर मेमन ने किया, उनमें सलीम कुत्ता और कदीर भी था। पुलिस का कहना है कि दाऊद 1986 में दुबई चला गया था, 1990 में कदीर भी नजीबाबाद आ गया। लेकिन उसका आना जाना मुंबई और गुजरात लगा रहा और उसके संपर्क दाऊद गैंग से बने रहे। मुंबई धमाकों में विस्फोटक सामग्री पहुंचाने में भी वह शामिल रहा था, जिसका मामला गुजरात के जामनगर में दर्ज है।
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शराफत का लबादा ओढ़ रखा था
मुंबई धमाकों का आरोपी कदीर शराफत का लबादा ओढ़ नजीबाबाद में जिंदगी बशर कर रहा था। पुलिस से बचने के बाद कदीर नजीबाबाद में अपना करोबार बढ़ता गया। आज कदीर के बेटे की नजीबाबाद में कपड़े की दुकान है। रोज कदीर बेटे के साथ दुकान पर बैठता था। कदीर प्रॉपर्टी के कारोबार से भी जुड़ा है। नजीबाबाद में उसने भाइयों के साथ मिलकर मोहल्ला सब्नीग्राम में बाजार बनाया है। कदीर हज पर भी गया था। लोगों से इस कदर घुला मिला रहता था कि कोई उसके व्यवहार को देखकर नहीं कह सकता था कि वह गुजरात से इतने बड़े मामले में वांछित होगा। परिजनों के अनुसार पांचों वक्त नमाज पढ़ने वाले कदीर का अपराध की दुनिया से कोई ताल्लुक नहीं था।

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एक मात्रा के फेर से बचता रहा, पुलिस रिकॉर्ड में कदीर नहीं कादिर है नाम

Know, these big things related to Kadir, accused of Mumbai blasts in Bijnor
मुंबई बम धमाकों का आरोपी कादीर गिरफ्तार

उल्लेखनीय है कि गुजरात एटीएस, यूपी एटीएस और नजीबाबाद पुलिस की टीम ने शनिवार को कल्हेड़ी मार्ग नजीबाबाद (बिजनौर) से मुंबई बम धमाकों के आरोपी और दाउद इब्राहिम के गुर्गे 60 साल के कादिर उर्फ कदीर अहमद को गिरफ्तार किया था। गुजरात पुलिस को 1993 से उसकी तलाश थी। उसके खिलाफ जामनगर टाडा कोर्ट में कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। धमाकों के लिए जामनगर से विस्फोटक सामग्री मुंबई पहुंचाने वालों में वह भी एक आरोपी है। 

कदीर कल्हेड़ी गांव का रहने वाला है। उसके गांव में ही होने की सटीक सूचना गुजरात एटीएस को मिली थी। इसी आधार पर गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) के इंस्पेक्टर एनके भट्ट, एनएल देसाई उसकी गिरफ्तारी के लिए यूपी एटीएस और बिजनौर पुलिस के अधिकारियों से बात की। इसके बाद यूपी एटीएस के इंस्पेक्टर विश्वजीत, नजीबाबाद कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार की टीम के साथ गुजरात एटीएस ने दबिश देकर गांव कल्हेड़ी से ही उसको गिरफ्तार कर लिया। गुजरात एटीएस के मुताबिक वर्ष 1993 में थाना जामनगर पर कदीर के खिलाफ धारा 120बी, 121, 121सी, 9/बी विस्फोटक सामग्री अधिनियम और प्रिवेंशन ऑफ टाडा एक्ट की सेक्शन 3/4/5/6 के अंतर्गत राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का मामला दर्ज किया गया था। चार मई 1995 को जामनगर टाडा कोर्ट ने उसे फरार घोषित किया था।

कदीर का नाम पाकिस्तान में बैठे आतंकी दाऊद इब्राहिम के दाहिना हाथ माने जाने वाले टाइगर मेमन के साथ भी जुड़ा था। गुजरात पुसिल ने अगस्त 2015 में भी इसकी तलाश में नजीबाबाद में छापा मारा था, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। उस समय गुजरात पुलिस एक अन्य वांछित खाईखेड़ी निवासी इश्त्याक को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई थी। इश्त्याक के बड़े भाई इफ्तखार को गुजरात पुलिस पहले गिरफ्तार कर चुकी है। इफ्तखार 1999 से जमानत पर है। कदीर के परिजनों का कहना है कि वह वर्ष 1988-1989 में ही मुंबई छोड़ चुका था। इस मामले में उसका का नाम कैसे आया, वह कुछ कह नहीं सकते। 

एक मात्रा के फेर से बचता रहा, पुलिस रिकॉर्ड में कदीर नहीं कादिर है नाम
मुंबई धमाकों का आरोपी कदीर अपने नाम में सिर्फ एक मात्रा के फेर से शराफत का लबादा ओढ़ नजीबाबाद में शराफत की जिंदगी बिता रहा था। कल्हेड़ी में सब लोग उसे कदीर के नाम से ही जानते थे। गुजरात पुलिस के रिकार्ड में उसका नाम कादिर दर्ज था। रिकॉर्ड में उसके पिता का नाम नहीं है, जबकि गांव का नाम दर्ज है। इसी नाम से गुजरात पुलिस वारंट लेकर आती थी। कई बार उसे इसका पता भी चला। वारंट को लेकर नजीबाबाद पुलिस ने जब भी उससे संपर्क किया तो वह कादिर के नाम के अपना वारंट होने से मुकर जाता था। 24 साल तक एक मात्रा के अंतर से वह बचा रहा, जबकि उसके सभी साथी पकड़े जा चुके थे। एक 47 राइफल भी बरामद हुई थी। वारंट दबने पर उसे लगा कि अब उसका कुछ नहीं होगा। शनिवार को जब वह नजीबाबाद दुकान पर जा रहा था। तभी उसे दबोचा लिया गया।

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