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Meerut News: सूफी गायन के बीच कश्मीर के लोकगीत, संतूर वादन ने दिलों को छुआ
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सरगम मंदिर द्वारा आयोजित सतरंगी संगीत संध्या में तबले व परवाज की संगत ने किया आनंदित
वाद्य वृंद का फ्यूजन के बीच तबला ढोलक ने शास्त्रीय गायन में भरी मिठास
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सरगम मंदिर द्वारा आयोजित सतरंगी संगीत संध्या का आयोजन बच्चा पार्क आईएमए हॉल में हुआ। कार्यक्रम में संतूर के महान पुरोधा पंडित अभय सोपोरी ने सुमधुर संतूर वादन से दिलों को छू लिया। कश्मीर के लोक संगीत ने मन मोह लिया। इस दौरान तबले व परवाज का संगम अनूठी प्रस्तुति रही।
यह कार्यक्रम मेरठ कॉलेज के विधि विभाग पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर मुकेश चंद्र की स्मृति में किया किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार, एसके अग्रवाल, डॉ. युद्धवीर सिंह ने प्रोफेसर मुकेश के संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम डॉ. रागिनी प्रताप और वेदांश मोहन ने शिव स्तुति प्रस्तुत की। यह स्तुति पांच रोगों में निबद्ध रही।
मुंबई से आए लोकप्रिय गायक शुभम गौड़ ने गजल और सूफी गायन से हर किसी के दिलों को छू लिया। कार्यक्रम वाद्य वृंद का फ्यूजन तबला, ढोलक, पैड, गिटार की ध्वनि को सुन हर कोई झूम उठा। वेदांश मोहन ने शास्त्रीय गायन और डॉ. रागनी ने ठुमरी गायन किया। उन्होंने होली के फाग रंग बिरंगी होली प्रस्तुति दी। मैराज खान ने हारमोनियम, मिंटल गाजी ने गिटार, राहुल ने तबला और ऋषि ने मृंदग पर संगत की। कार्यक्रम में सुनंदा मुकेश, सीमा अदलखा, सुधा गुप्ता, गुंजन गुप्ता, लक्ष्मी, कमला जैन, अनूप सिंघल आदि लोग रहे।
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- पंडित अभय सोपोरी संतूर के महान पुरोधा
- पंडित अभय रुस्तुम सोपोरी कश्मीर के 300 वर्ष पुराने सोपोरी सूफियाना घराने के संरक्षक हैं। एक ख्यातिलब्ध संतूर वादक और संगीत रचयिता हैं। उन्होंने अपने दादा और पिता से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। जिन्होंने उन्हें शास्त्रीय संगीत के पिता और संतूर का संत जैसी उपाधियों से सम्मानित किया।सम्मान और परोपकार उन्हें संयुक्त राष्ट्र महात्मा गांधी वैश्विक शांति पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कश्मीर भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में लाखों रुपये जुटाए।
- संगीत की दुनिया के उभरते सितारे वेदांश
- वेदांश मोहन ने संगीत में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। वे लेफ्ट पंडित जगदीश मोहन के पौत्र हैं। जिनसे उन्होंने किराना घराने की प्रारंभिक शिक्षा ली। पुणे में पंडित मुकुल कुलकर्णी से ग्वालियर घराने की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, वे वर्तमान में डॉ. रागिनी प्रताप से किराना घराने की शिक्षा ले रहे हैं। उनके गायन में दोनों घरानों की विशेषताएं झलकती हैं।
- मिंटाल गाजी अनुभवी गिटार वादक
- गाजी एक अनुभवी गिटार वादक और संगीत शिक्षक को जैज हार्मोनी, इम्प्रोवाइजेशन और भारतीय संगीत की गहरी समझ है। उन्होंने भारत और विदेश में कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शन किया है और ऑल इंडिया रेडियो तथा टेलीविजन के लिए रिकॉर्डिंग भी की है। प्रस्तुतियों के अलावा, गाजी ने डीएवी स्कूल, विकासपुरी में प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया। संगीत शिक्षा और मार्गदर्शन में अपने अनुभव का विस्तार किया है।
- शुभम गौर ने मेरठ से बॉलीवुड तक का किया सफर
- शुभम गौर एक लेखक और कास्टिंग डायरेक्टर है। उन्होंने यश राज फिल्म्स से अपना कॅरिअर शुरू किया। उन्होंने सहेर लतीफ के साथ कई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर काम किया। जिनमें द लंचबॉक्स और होमलैंड सीजन 4 शामिल हैं। स्वतंत्र कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में वेटिंग फिल्म से शुरुआत करने के बाद उन्होंने त्रिशान एंड शुभम कास्टिंग की स्थापना की। हे जल्द ही अपनी शॉर्ट फिल्म डायरेक्ट करने वाले हैं।
- संगीत की साधिका डॉ. रागिनी प्रताप
- डॉ. रागिनी प्रताप एक प्रतिष्ठित संगीतकार, सेवानिवृत्त प्राचार्या और संगीत विभागाध्यक्ष हैं। वे सीसीएस विश्वविद्यालय से जुड़ी रहीं और किराना घराने की शास्त्रीय गायिका के रूप में विख्यात हैं। वे पंडित जगदीश मोहन की पुत्री हैं जो स्वयं किराना घराने के एक प्रमुख संगीतकार थे। डॉ. प्रताप रेडियो एवं टीवी की स्वीकृत ए ग्रेड कलाकार हैं। वे सरगम मंदिर संगीत संघ की निदेशक एवं अध्यक्ष के रूप में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित हैं।
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वाद्य वृंद का फ्यूजन के बीच तबला ढोलक ने शास्त्रीय गायन में भरी मिठास
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सरगम मंदिर द्वारा आयोजित सतरंगी संगीत संध्या का आयोजन बच्चा पार्क आईएमए हॉल में हुआ। कार्यक्रम में संतूर के महान पुरोधा पंडित अभय सोपोरी ने सुमधुर संतूर वादन से दिलों को छू लिया। कश्मीर के लोक संगीत ने मन मोह लिया। इस दौरान तबले व परवाज का संगम अनूठी प्रस्तुति रही।
यह कार्यक्रम मेरठ कॉलेज के विधि विभाग पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर मुकेश चंद्र की स्मृति में किया किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार, एसके अग्रवाल, डॉ. युद्धवीर सिंह ने प्रोफेसर मुकेश के संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम डॉ. रागिनी प्रताप और वेदांश मोहन ने शिव स्तुति प्रस्तुत की। यह स्तुति पांच रोगों में निबद्ध रही।
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मुंबई से आए लोकप्रिय गायक शुभम गौड़ ने गजल और सूफी गायन से हर किसी के दिलों को छू लिया। कार्यक्रम वाद्य वृंद का फ्यूजन तबला, ढोलक, पैड, गिटार की ध्वनि को सुन हर कोई झूम उठा। वेदांश मोहन ने शास्त्रीय गायन और डॉ. रागनी ने ठुमरी गायन किया। उन्होंने होली के फाग रंग बिरंगी होली प्रस्तुति दी। मैराज खान ने हारमोनियम, मिंटल गाजी ने गिटार, राहुल ने तबला और ऋषि ने मृंदग पर संगत की। कार्यक्रम में सुनंदा मुकेश, सीमा अदलखा, सुधा गुप्ता, गुंजन गुप्ता, लक्ष्मी, कमला जैन, अनूप सिंघल आदि लोग रहे।
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- पंडित अभय सोपोरी संतूर के महान पुरोधा
- पंडित अभय रुस्तुम सोपोरी कश्मीर के 300 वर्ष पुराने सोपोरी सूफियाना घराने के संरक्षक हैं। एक ख्यातिलब्ध संतूर वादक और संगीत रचयिता हैं। उन्होंने अपने दादा और पिता से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। जिन्होंने उन्हें शास्त्रीय संगीत के पिता और संतूर का संत जैसी उपाधियों से सम्मानित किया।सम्मान और परोपकार उन्हें संयुक्त राष्ट्र महात्मा गांधी वैश्विक शांति पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कश्मीर भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में लाखों रुपये जुटाए।
- संगीत की दुनिया के उभरते सितारे वेदांश
- वेदांश मोहन ने संगीत में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। वे लेफ्ट पंडित जगदीश मोहन के पौत्र हैं। जिनसे उन्होंने किराना घराने की प्रारंभिक शिक्षा ली। पुणे में पंडित मुकुल कुलकर्णी से ग्वालियर घराने की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, वे वर्तमान में डॉ. रागिनी प्रताप से किराना घराने की शिक्षा ले रहे हैं। उनके गायन में दोनों घरानों की विशेषताएं झलकती हैं।
- मिंटाल गाजी अनुभवी गिटार वादक
- गाजी एक अनुभवी गिटार वादक और संगीत शिक्षक को जैज हार्मोनी, इम्प्रोवाइजेशन और भारतीय संगीत की गहरी समझ है। उन्होंने भारत और विदेश में कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शन किया है और ऑल इंडिया रेडियो तथा टेलीविजन के लिए रिकॉर्डिंग भी की है। प्रस्तुतियों के अलावा, गाजी ने डीएवी स्कूल, विकासपुरी में प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया। संगीत शिक्षा और मार्गदर्शन में अपने अनुभव का विस्तार किया है।
- शुभम गौर ने मेरठ से बॉलीवुड तक का किया सफर
- शुभम गौर एक लेखक और कास्टिंग डायरेक्टर है। उन्होंने यश राज फिल्म्स से अपना कॅरिअर शुरू किया। उन्होंने सहेर लतीफ के साथ कई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर काम किया। जिनमें द लंचबॉक्स और होमलैंड सीजन 4 शामिल हैं। स्वतंत्र कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में वेटिंग फिल्म से शुरुआत करने के बाद उन्होंने त्रिशान एंड शुभम कास्टिंग की स्थापना की। हे जल्द ही अपनी शॉर्ट फिल्म डायरेक्ट करने वाले हैं।
- संगीत की साधिका डॉ. रागिनी प्रताप
- डॉ. रागिनी प्रताप एक प्रतिष्ठित संगीतकार, सेवानिवृत्त प्राचार्या और संगीत विभागाध्यक्ष हैं। वे सीसीएस विश्वविद्यालय से जुड़ी रहीं और किराना घराने की शास्त्रीय गायिका के रूप में विख्यात हैं। वे पंडित जगदीश मोहन की पुत्री हैं जो स्वयं किराना घराने के एक प्रमुख संगीतकार थे। डॉ. प्रताप रेडियो एवं टीवी की स्वीकृत ए ग्रेड कलाकार हैं। वे सरगम मंदिर संगीत संघ की निदेशक एवं अध्यक्ष के रूप में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित हैं।