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कपसाड़ कांड : गांव की सीमा से लेकर पीड़िता के घर की दहलीज तक खाकी का पहरा
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कपसाड़ में अनुसूचित जाति की युवती रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के बाद सुरक्षा को पूरी तरह कड़ा कर दिया गया है। हालांकि आरोपी पारस सोम जेल जा चुका है। रूबी भी अपने घर आ चुकी है। बावजूद इसके पीड़िता रूबी के घर की दहलीज से लेकर कपसाड़ गांव की सीमा तक पुलिस और अर्द्ध सैनिक बल के जवान लगातार पहरा दे रहे हैं।
पुलिस प्रशासन ने कपसाड़ में आरआरएफ, पीएसी और स्थानीय पुलिस बल तैनात कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी है कि बाहरी लोग और मीडियाकर्मी भी गांव में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। सभी आगंतुकों के पहचान पत्र चेक किए जा रहे हैं और केवल आवश्यक व्यक्तियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। रूबी के मकान के आसपास सुरक्षा के लिए 5 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, पीड़िता रूबी के साथ महिला दरोगा तैनात हैं जो उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं और सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं।
पुलिस प्रशासन को राहत, ग्रामीणों को नहीं
रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी पारस सोम को जेल भेज दिया है। इसके बाद प्रशासन ने कुछ राहत की सांस तो ली, लेकिन ग्रामीण अभी भी दहशत और कैद की स्थिति में हैं। छठे दिन भी कोई ढील नहीं दी गई और पुलिस अधिकारी किसी भी कोताही के मूड में नहीं हैं।
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बता दें कि बीते आठ जनवरी बृहस्पतिवार को रूबी के अपहरण और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से हत्या के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था। तब से ही बाहरी जिले की पुलिस के साथ आरआरएफ और पीएसी बल तैनात हैं। गांव और आसपास के सभी रास्तों को सील किया गया है। हालांकि मंगलवार सुबह ग्रामीणों को राहत की उम्मीद थी लेकिन पुलिस ने कोई ढील नहीं दी। ऐसे में दिनभर अपने घरों में ही कैद रहे। सब्जी और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित रही, जिससे ग्रामीणों को अब रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों के आदेश पर गांव की चारों तरफ सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, सलावा से सरधना, चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग, कपसाड़ को अटेरना, कैली, सकौती और चकबंदी से जोड़ने वाले सभी रास्तों पर आरएएफ और पीएसी के साथ पास के जनपद की पुलिस तैनात की गई है।
इन रास्तों पर पुलिस की नाकेबंदी
सुरक्षा के मद्देनजर मुजफ्फरनगर की ओर से आने वाले वाहनों को खतौली में रोका गया, जबकि मेरठ-करनाल हाईवे पर नानू गंगनहर पुल से दौराला और अटेरना पुल तक कई चरणों में सुरक्षा बल तैनात रहे। इस वजह से दिनभर यातायात बाधित रहा और अपने गंतव्य तक जाने वाले लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ा।
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पुलिस प्रशासन ने कपसाड़ में आरआरएफ, पीएसी और स्थानीय पुलिस बल तैनात कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी है कि बाहरी लोग और मीडियाकर्मी भी गांव में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। सभी आगंतुकों के पहचान पत्र चेक किए जा रहे हैं और केवल आवश्यक व्यक्तियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। रूबी के मकान के आसपास सुरक्षा के लिए 5 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, पीड़िता रूबी के साथ महिला दरोगा तैनात हैं जो उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं और सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं।
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पुलिस प्रशासन को राहत, ग्रामीणों को नहीं
रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी पारस सोम को जेल भेज दिया है। इसके बाद प्रशासन ने कुछ राहत की सांस तो ली, लेकिन ग्रामीण अभी भी दहशत और कैद की स्थिति में हैं। छठे दिन भी कोई ढील नहीं दी गई और पुलिस अधिकारी किसी भी कोताही के मूड में नहीं हैं।
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बता दें कि बीते आठ जनवरी बृहस्पतिवार को रूबी के अपहरण और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से हत्या के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था। तब से ही बाहरी जिले की पुलिस के साथ आरआरएफ और पीएसी बल तैनात हैं। गांव और आसपास के सभी रास्तों को सील किया गया है। हालांकि मंगलवार सुबह ग्रामीणों को राहत की उम्मीद थी लेकिन पुलिस ने कोई ढील नहीं दी। ऐसे में दिनभर अपने घरों में ही कैद रहे। सब्जी और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित रही, जिससे ग्रामीणों को अब रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों के आदेश पर गांव की चारों तरफ सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, सलावा से सरधना, चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग, कपसाड़ को अटेरना, कैली, सकौती और चकबंदी से जोड़ने वाले सभी रास्तों पर आरएएफ और पीएसी के साथ पास के जनपद की पुलिस तैनात की गई है।
इन रास्तों पर पुलिस की नाकेबंदी
सुरक्षा के मद्देनजर मुजफ्फरनगर की ओर से आने वाले वाहनों को खतौली में रोका गया, जबकि मेरठ-करनाल हाईवे पर नानू गंगनहर पुल से दौराला और अटेरना पुल तक कई चरणों में सुरक्षा बल तैनात रहे। इस वजह से दिनभर यातायात बाधित रहा और अपने गंतव्य तक जाने वाले लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ा।