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कंधा भी नहीं हुआ नसीब
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 09 Oct 2016 02:27 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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शनिवार दोपहर 2:45 बजे व्यापारी मोहन अरोड़ा, पत्नी कृष्णा अरोड़ा, पुत्र विनीत अरोड़ा, पुत्रवधू पूजा अरोड़ा और पोते अभिषेक अरोड़ा के शव पोस्टमार्टम के बाद डीसीएम से सूरजकुंड श्मशान घाट लाए गए।
पांचों शवों को फिर चिता तक पहुंचाने के लिए कंधे भी नसीब नहीं हुए। मौजूद लोगों ने शवों को जैसे-तैसे अर्थी तक पहुंचाया गया। सांसद राजेंद्र अग्रवाल और कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल के अलावा न कोई नेता श्मशान घाट पहुंचा और न ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी। अंतिम संस्कार कराने वाले पं. एसके आचार्य ने भी इस पर दुख जताया कि एक साथ तीन पीढ़ियां खत्म हो गईं और उनकी अर्थी को कंधा भी नसीब नहीं हुआ। व्यापारी नेता लल्लू मक्कड़ ने बताया कि मोहन अरोड़ा के भाई के परिजनों ने मिलकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई।
पूजा के मायके वालों का बुरा हाल
विनीत की पत्नी पूजा का मायका देवपुरी में है। पूजा के मायके वाले भी श्मशान घाट पहुंचे थे, लेकिन दुख के मारे उनके हाथ-पांव इस कदर कांप रहे थे कि वे अर्थियों को उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
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पांचों शवों को फिर चिता तक पहुंचाने के लिए कंधे भी नसीब नहीं हुए। मौजूद लोगों ने शवों को जैसे-तैसे अर्थी तक पहुंचाया गया। सांसद राजेंद्र अग्रवाल और कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल के अलावा न कोई नेता श्मशान घाट पहुंचा और न ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी। अंतिम संस्कार कराने वाले पं. एसके आचार्य ने भी इस पर दुख जताया कि एक साथ तीन पीढ़ियां खत्म हो गईं और उनकी अर्थी को कंधा भी नसीब नहीं हुआ। व्यापारी नेता लल्लू मक्कड़ ने बताया कि मोहन अरोड़ा के भाई के परिजनों ने मिलकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई।
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पूजा के मायके वालों का बुरा हाल
विनीत की पत्नी पूजा का मायका देवपुरी में है। पूजा के मायके वाले भी श्मशान घाट पहुंचे थे, लेकिन दुख के मारे उनके हाथ-पांव इस कदर कांप रहे थे कि वे अर्थियों को उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
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