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कैराना उपचुनाव: विपक्षी दलों के गठबंधन की कवायद तेज, रालोद के शामिल होने पर सस्पेंस

Sun, 29 Apr 2018 11:30 AM IST
आनंद प्रकाश, अमर उजाला, शामली
आनंद प्रकाश, अमर उजाला, शामली Updated Sun, 29 Apr 2018 11:30 AM IST
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Kairana by election Talks on the issue of re introduction of RLD in coalition
फाइल फोटो

कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को लेकर एक बार फिर से विपक्षी दलों के गठबंधन की कवायद तेज हुई है। गठबंधन में रालोद शामिल होगा या नहीं, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है, लेकिन रालोद और सपा नेताओं की माने तो इस पर बातचीत चल रही है। 

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दिल्ली में रालोद नेताओं की अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ वार्ता हुई है और  शनिवार तक विपक्षी गठबंधन को लेकर अहम फैसला लिया जा सकता है। यदि गठबंधन में रालोद शामिल होता है, तो यह भाजपा के लिए मुश्किलें जरूर बढ़ा देगा। यही वजह है कि अभी तक कैराना लोकसभा सीट को लेकर किसी भी पार्टी ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। 
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एक तरफ समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन बसपा की तरफ से तैयारी नहीं हैं। इससे यह भी साफ है कि गोरखपुर और फूलपुर की तरह ही कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी बसपा समर्थन करेगी। पूर्व में चर्चा थी कि गठबंधन में रालोद भी रहेगा, लेकिन बीच में गठबंधन को लेकर बात बिगड़ने के संकेत मिल रहे थे। 
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दो दिन पूर्व ही कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने बयान दिया था कि कैराना लोकसभा सीट का उपचुनाव रालोद और कांग्रेस संयुक्त रूप से लड़ेंगी। इस बयान से गठबंधन खटाई में पड़ता दिखाई दे रहा था। यह भी स्पष्ट है कि रालोद और कांग्रेस अगर गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़े, तो कहीं न कहीं उसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता था।

लेकिन अब फिर से गठबंधन की कवायद चल रही है, कुछ स्थानीय नेताओं की माने तो बीते दो दिनों से फिर से विपक्षी एकता को मजबूत करने के प्रयास चल रहे हैं। सपा नेता सुधीर पंवार और रालोद जिलाध्यक्ष योगेंद्र सिंह चेयरमैन का कहना है कि भाजपा को परास्त करने के लिए एकजुटता तो जरूरी है। अभी गठबंधन पर कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बात खत्म भी नहीं हुई है। पार्टी नेतृत्व जो फैसला लेगा, पार्टी संगठन मजबूती से उस पर काम करेगा। 

कैराना सीट पर रालोद की स्थिति 
इस सीट पर रालोद भी कई चुनाव जीत चुका है। 2004 में इस सीट पर रालोद से अनुराधा चौधरी सांसद बनी थीं, तो 1999 में अमीर आलम रालोद से ही चुनाव जीते थे। वहीं, 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी कैराना सीट से सांसद चुनी गई थीं, जबकि 1977 में भारतीय लोकदल (बीएलडी) के टिकट पर चंदन सिंह सांसद चुने गए थे। 
तो प्रत्याशी कौन होगा 
जिस तरह की अटकलें चल रही हैं कि कैराना सीट के उपचुनाव में विपक्षी दलों का गठबंधन होगा, उसमें अहम सवाल यही है कि गठबंधन की तरफ से प्रत्याशी कौन होगा। अभी तक कैराना सीट पर समाजवादी पार्टी अपना दावा करती आई है, जबकि रालोद का भी यही प्रयास है कि गठबंधन में इस सीट से रालोद का प्रत्याशी उतारा जाए। अब देखना यह है कि यदि विपक्षी दलों का गठबंधन हुआ, तो उसमें प्रत्याशी किसे बनाया जाएगा। 

बढ़ जाएगी भाजपा की चुनौती 
कैराना 2014 में भाजपा ने इस सीट को जीता था, तब हुकुम सिंह 565909 वोट लेकर सांसद चुने गए थे, दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी नाहिद हसन को 329081 वोट मिले थे। गत तीन फरवरी को हुकुम सिंह का निधन होने पर यह सीट रिक्त हुई। अब उपचुनाव में मृगांका सिंह को भाजपा की तरफ से प्रत्याशी बनाया जा रहा है, जिसके चलते भाजपा का यही प्रयास होगा कि कैराना सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा जाए।

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