कत्ल असगर हो मेरा सर भी जुदा हो जाये
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मेरठ के अब्दुलापुर में शिया सोगवारों ने आशूर के अमाल किए। मौलाना हामिद हुसैन ने जियारत आशूर पढ़ाई। कदीमी जुलूस ताजिया इमामबारगाह असगर हुसैन से बरामद हुआ। इसमें मुख्तार हुसैन और उनके हमनवा ने ये मरसिया पढ़ा-
अब न कासिम मेरा बाकी है न अकबर बाकी
न अलमदार सलामत है न लश्कर बाकी
अब फकत सर मेरा बाकी है और असगर बाकी
कत्ल असगर हो मेरा सर भी जुदा हो जाये
इस अमानत से भी सबीर अदा हो जाए।
इसके बाद ताजिये का जुलूस मोहल्ला बाजार मस्जिद इमामबारगाह से होता हुआ मोहल्ला गढ़ी चौक पहुंचा। जुमे की नमाज के बाद फिर जुलूस ए ताजिया बरामद हुआ। उधर, अजाखाना शाबिर महल से जुलजुनाह हजरत इमाम हुसैन और विभिन्न अजाखानों से ताजिये, अलम बरामद हुए। दोनों जुलूस हुसैन चौक पर पहुंचे। यहां मौलाना की तकरीर के बाद हजारों सोगवारो ने जंजीरों से मातम किया। मुहर्रम के बैनर, होर्डिंग, स्लोगन का एहतमाम नादिर अब्बास फैसल नकवी, मंसूर अली, साहिल अब्बास, शन्नी नकवी, शबाब ,अमजद, जुऐब, आमिर नकवी ने किया। जुलूस करबला में पहुंचकर संपन्न हुआ। ताजिये दफन किए गए। रात मे एक मजलिस इमामबाड़ा कोट में शामें गरिबा मे हुई। शरबत पे हजरत इमाम हुसैन और 72 शहीदों की नजर दिलाई गई। नायब अली एडवोकेट ने बताया कि मुहर्रम की 11 तारीख शनिवार को सोगवार महिलाएं और पुरुष करबला मे चिरांगा करेंगे। 12 तारीख को इमाम हुसैन और 72 शहीदों के सोयम की मजलिस होगी। मौलाना ने बताया कि दुनिया में जितनी भी दहशत गर्दी है वह सिर्फ हुकूमत हासिल करने के लिए है जिसका इस्लाम मजहब से कोई लेना देना नहीं है।
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