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कोरोना काल में टीबी खत्म करने की मुहिम को झटका
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मेरठ। कोरोना काल में टीबी खत्म करने की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। पिछले दो माह से औसतन हर माह 85 फीसदी मरीजों की पहचान नहीं हो पा रही है। इस साल जनवरी से मार्च तक 1991 मरीज मिले थे, यानी हर माह 663 से ज्यादा मरीज। अप्रैल और मई में महज 204 मरीज मिले हैं। छह माह में 10-10 दिन के दो जांच सर्वे होने थे, मगर सिर्फ फ़रवरी में एक ही सर्वे हो सका। इसमें 150 से ज्यादा मरीज मिले थे। दूसरा सर्वे कोरोना की भेंट चढ़ गया।
प्रधानमंत्री ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत की मुहिम शुरू की थी। इसे अमली जामा पहनाने के लिए लगातार सर्वे, निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी के मरीजों की रिपोर्ट देने की अनिवार्यता की गई। वहीं, पोर्टल पर हर मरीज का रिकॉर्ड अपलोड करने का आदेश दिया गया। हालांकि कोरोना संक्रमण ने इस मुहिम को पलीता लगा दिया। टीबी मरीजों की पहचान कम होने से इसके फैलने का ज्यादा खतरा है। यदि टीबी का मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 15 लोगों को टीबी कर सकता है।
डाक से आएंगे टीबी जांच के लिए सैंपल
ओपीडी नहीं चल रही है। वहीं, सर्वे नहीं हो सका है। इससे टीबी के मरीजों की पहचान में कमी आई है। अब डाक के जरिए सैंपल कलेक्शन किया जाएगा। इसलिए लोग स्थानीय पोस्ट आफिस में सैंपल दे सकेंगे। इससे जांच के लिए लोगों को अस्पताल आना नहीं पड़ेगा। बीच में इलाज छोड़ना या जांच न कराना गलत है। इससे बीमारी बढ़ सकती है।-डॉ. एमएस फौजदार, जिला क्षय रोग अधिकारी
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ये लक्षण दिखें तो कराएं तुरंत जांच
दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
बुखार आना एवं भूख न लगना
रात में पसीना आना
वजन में लगातार गिरावट
यह है टीबी
टीबी गंभीर, संक्रामक एवं बैक्टीरिया जनित रोग है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह जानलेवा हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवा मुफ्त मिलती है।
जिला अस्पताल में इसका केंद्र
निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को भी टीबी के मरीजों का ब्योरा जिला क्षय रोग कार्यालय में देना होता है। ऐसा नहीं करने पर छह माह से दो साल तक की सजा का प्रावधान है।
छह साल में 40,822 मरीज
वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य है। टीबी को तब तक खत्म नहीं किया जा सकता है, जब तक टीबी के सभी मरीज जांच कराकर पूरा इलाज न कराएं। दरअसल टीबी का एक मरीज अगर साल भर इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 15 लोगों को टीबी का मरीज बना सकता है। पिछले छह साल में 40,822 मरीज मिले हैं।
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प्रधानमंत्री ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत की मुहिम शुरू की थी। इसे अमली जामा पहनाने के लिए लगातार सर्वे, निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी के मरीजों की रिपोर्ट देने की अनिवार्यता की गई। वहीं, पोर्टल पर हर मरीज का रिकॉर्ड अपलोड करने का आदेश दिया गया। हालांकि कोरोना संक्रमण ने इस मुहिम को पलीता लगा दिया। टीबी मरीजों की पहचान कम होने से इसके फैलने का ज्यादा खतरा है। यदि टीबी का मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 15 लोगों को टीबी कर सकता है।
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डाक से आएंगे टीबी जांच के लिए सैंपल
ओपीडी नहीं चल रही है। वहीं, सर्वे नहीं हो सका है। इससे टीबी के मरीजों की पहचान में कमी आई है। अब डाक के जरिए सैंपल कलेक्शन किया जाएगा। इसलिए लोग स्थानीय पोस्ट आफिस में सैंपल दे सकेंगे। इससे जांच के लिए लोगों को अस्पताल आना नहीं पड़ेगा। बीच में इलाज छोड़ना या जांच न कराना गलत है। इससे बीमारी बढ़ सकती है।-डॉ. एमएस फौजदार, जिला क्षय रोग अधिकारी
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ये लक्षण दिखें तो कराएं तुरंत जांच
दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
बुखार आना एवं भूख न लगना
रात में पसीना आना
वजन में लगातार गिरावट
यह है टीबी
टीबी गंभीर, संक्रामक एवं बैक्टीरिया जनित रोग है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह जानलेवा हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवा मुफ्त मिलती है।
जिला अस्पताल में इसका केंद्र
निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को भी टीबी के मरीजों का ब्योरा जिला क्षय रोग कार्यालय में देना होता है। ऐसा नहीं करने पर छह माह से दो साल तक की सजा का प्रावधान है।
छह साल में 40,822 मरीज
वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य है। टीबी को तब तक खत्म नहीं किया जा सकता है, जब तक टीबी के सभी मरीज जांच कराकर पूरा इलाज न कराएं। दरअसल टीबी का एक मरीज अगर साल भर इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 15 लोगों को टीबी का मरीज बना सकता है। पिछले छह साल में 40,822 मरीज मिले हैं।