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संशोधितः मुजफ्फरनगर को दहलाना चाहते थे आतंकी
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जाटान बम ब्लास्ट: मुजफ्फरनगर को दहलाना चाहते थे आतंकी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जाटान बम ब्लास्ट के मामले में आतंकियों की मदद करने वाले पांच लोगों को लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने तीन से सात साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। खंडवा जेल से फरार हुए प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े छह आतंकी बिजनौर में छिपकर रह रहे थे और यहां आईईडी बम बनाते समय विस्फोट हो गया था। उस समय इन्होंने एक मददगार अब्दुल्ला का बताया था कि वह मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने आए हैं। उन्हें एक विस्फोट मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर आरएसएस शिविर में और दूसरा वहां करना था, जहां महिलाओं के साथ दरिंदगी हुई थी।
आठ साल पहले हुए इस चर्चित मामले में एनआईए की अदालत ने अब्दुल्ला पुत्र रईस अहमद, रईस अहमद पुत्र बशीर अहमद निवासी भाटान, नदीम निवासी उमरी, फुरकान निवासी झालू और हुस्ना उर्फ हुसैना निवासी उमरी को सजा सुनाई गई है। ये पांचों फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद हैं। आतंकियों से इनका गहरा नाता था और ये आतंकियों के साथ गैर जिलों में भी घूमने जाते थे। रईस और हुसैना उर्फ हुस्ना आतंकियों के साथ दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद भी घूमने गए थे। हुस्ना अपनी बहन के साथ रईस के मकान में किराए पर रहती थी और वह आतंकियों से पूरी तरह से घुल मिल गई थी। विस्फोट के बाद मौके से नाइन एमएम की पिस्टल, लैपटॉप, छोटा गैस सिलेंडर, मोबाइल, सिम कार्ड, बम बनाने की सामग्री और तीन आईईडी बम बरामद किए थे। बता दें कि आतंकियों की मदद करने में जिले के आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। तीन की जमानत हो गई थी। हुस्ना, फुरकान, नदीम, अब्दुल्ला और रईस के खिलाफ एनआईए चार्जशीट दाखिल की थी।
ब्लास्ट हुआ तो बताया था कुकर फट गया
आतंकियों ने खुद को मजदूर बताकर मोहल्ला जाटान में कमरा लिया था। 12 सितंबर 2014 को बम बनाते समय विस्फोट हो गया था। विस्फोट में एक आतंकी महबूब गंभीर रूप से घायल हुआ था और विस्फोट के बाद आतंकी महबूब को लेकर कुकर फटने की बात कहते हुए घर से निकलकर फरार हो गए थे।
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बाद में जांच के दौरान पता चला कि ये खंडवा जेल से फरार प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े आतंकी अमजद, असलम, एजाजुद्दीन, महबूब, सालिक और जाकिर हुसैन थे। इनकी मंशा मुजफ्फरनगर विस्फोट कर देश को दहलाने की थी। ये खंडवा में एटीएफ जवान सीताराम यादव हत्याकांड में शामिल थे। इस मामले का ट्रायल पूरा हो चुका था। फैसला होना था। इन छह आतंकियों सहित आठ आरोपी 13 अक्तूबर 2013 को शौचालय की खिड़की तोड़कर बाहर निकले और उसके बाद चादरों से रस्सी बनाकर सभी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गए थे। इस दौरान ये जेल प्रहरी को घायल कर वायरलेस सेट व उसकी रायफल लेकर भागे थे।
दो तेलांगना और चार भोपाल में मुठभेड़ में मारे गए थे
बम ब्लास्ट के बाद बिजनौर से भागे आतंकियों में से असलम और एजाजुद्दीन का तीन अप्रैल 2015 में तेलांगना में पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। बाकी चार अमजद, महबूब, सालिक और जाकिर को उड़ीसा में 2016 को दबोचा लिया था। बाद में भोपाल जेल से फरार होने के बाद मुठभेड़ में मारे गए आठ आतंकियों में यह चारों भी शामिल थे।
जाटान और भाटान में बनाया था ठिकाना
सभी छह आतंकियों ने बिजनौर के मोहल्ला जाटान व भाटान में अपना ठिकाना बना लिया था। जाटान में रहने वाले तीन आतंकी महबूब, एजाजुददीन, महबूब व सालिक लीलो देवी व बाकी रईस के मकान में रहते थे। लीलो देवी के मकान में रहने वाले आतंकी अपने को हिंदू और मजदूर बताकर रह रहे थे। ये अलग-अलग रहते जरूर थे, लेकिन एक दूसरे के कमरे में खूब आते जाते रहते। लीलो देवी के मकान में हुए विस्फोट में झुलसे आतंकी महबूब को लेकर तीन आतंकी दो दिन तक उमरी गांव के जंगल में पनाह लिए रहे थे। कुछ दिन बाद से यहां से भाग गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जाटान बम ब्लास्ट के मामले में आतंकियों की मदद करने वाले पांच लोगों को लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने तीन से सात साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। खंडवा जेल से फरार हुए प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े छह आतंकी बिजनौर में छिपकर रह रहे थे और यहां आईईडी बम बनाते समय विस्फोट हो गया था। उस समय इन्होंने एक मददगार अब्दुल्ला का बताया था कि वह मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने आए हैं। उन्हें एक विस्फोट मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर आरएसएस शिविर में और दूसरा वहां करना था, जहां महिलाओं के साथ दरिंदगी हुई थी।
आठ साल पहले हुए इस चर्चित मामले में एनआईए की अदालत ने अब्दुल्ला पुत्र रईस अहमद, रईस अहमद पुत्र बशीर अहमद निवासी भाटान, नदीम निवासी उमरी, फुरकान निवासी झालू और हुस्ना उर्फ हुसैना निवासी उमरी को सजा सुनाई गई है। ये पांचों फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद हैं। आतंकियों से इनका गहरा नाता था और ये आतंकियों के साथ गैर जिलों में भी घूमने जाते थे। रईस और हुसैना उर्फ हुस्ना आतंकियों के साथ दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद भी घूमने गए थे। हुस्ना अपनी बहन के साथ रईस के मकान में किराए पर रहती थी और वह आतंकियों से पूरी तरह से घुल मिल गई थी। विस्फोट के बाद मौके से नाइन एमएम की पिस्टल, लैपटॉप, छोटा गैस सिलेंडर, मोबाइल, सिम कार्ड, बम बनाने की सामग्री और तीन आईईडी बम बरामद किए थे। बता दें कि आतंकियों की मदद करने में जिले के आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। तीन की जमानत हो गई थी। हुस्ना, फुरकान, नदीम, अब्दुल्ला और रईस के खिलाफ एनआईए चार्जशीट दाखिल की थी।
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ब्लास्ट हुआ तो बताया था कुकर फट गया
आतंकियों ने खुद को मजदूर बताकर मोहल्ला जाटान में कमरा लिया था। 12 सितंबर 2014 को बम बनाते समय विस्फोट हो गया था। विस्फोट में एक आतंकी महबूब गंभीर रूप से घायल हुआ था और विस्फोट के बाद आतंकी महबूब को लेकर कुकर फटने की बात कहते हुए घर से निकलकर फरार हो गए थे।
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बाद में जांच के दौरान पता चला कि ये खंडवा जेल से फरार प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े आतंकी अमजद, असलम, एजाजुद्दीन, महबूब, सालिक और जाकिर हुसैन थे। इनकी मंशा मुजफ्फरनगर विस्फोट कर देश को दहलाने की थी। ये खंडवा में एटीएफ जवान सीताराम यादव हत्याकांड में शामिल थे। इस मामले का ट्रायल पूरा हो चुका था। फैसला होना था। इन छह आतंकियों सहित आठ आरोपी 13 अक्तूबर 2013 को शौचालय की खिड़की तोड़कर बाहर निकले और उसके बाद चादरों से रस्सी बनाकर सभी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गए थे। इस दौरान ये जेल प्रहरी को घायल कर वायरलेस सेट व उसकी रायफल लेकर भागे थे।
दो तेलांगना और चार भोपाल में मुठभेड़ में मारे गए थे
बम ब्लास्ट के बाद बिजनौर से भागे आतंकियों में से असलम और एजाजुद्दीन का तीन अप्रैल 2015 में तेलांगना में पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। बाकी चार अमजद, महबूब, सालिक और जाकिर को उड़ीसा में 2016 को दबोचा लिया था। बाद में भोपाल जेल से फरार होने के बाद मुठभेड़ में मारे गए आठ आतंकियों में यह चारों भी शामिल थे।
जाटान और भाटान में बनाया था ठिकाना
सभी छह आतंकियों ने बिजनौर के मोहल्ला जाटान व भाटान में अपना ठिकाना बना लिया था। जाटान में रहने वाले तीन आतंकी महबूब, एजाजुददीन, महबूब व सालिक लीलो देवी व बाकी रईस के मकान में रहते थे। लीलो देवी के मकान में रहने वाले आतंकी अपने को हिंदू और मजदूर बताकर रह रहे थे। ये अलग-अलग रहते जरूर थे, लेकिन एक दूसरे के कमरे में खूब आते जाते रहते। लीलो देवी के मकान में हुए विस्फोट में झुलसे आतंकी महबूब को लेकर तीन आतंकी दो दिन तक उमरी गांव के जंगल में पनाह लिए रहे थे। कुछ दिन बाद से यहां से भाग गए।