यहां टूटा था अर्जुन का अभिमान, श्रीकृष्ण ने ली थी राजा मोरध्वज की परीक्षा
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श्रीकृष्ण ने राजा मोरध्वज के दरबार में पहुंचने से पहले ही अपना और अर्जुन का वेश साधु का बना लिया। राजा मोरध्वज के दरबार में जाकर भगवान श्रीकृष्ण ने राजा से अपने भूखे शेर के लिए भोजन की याचना की। जैसे ही राजा मोरध्वज ने दरबारियों से शेर के लिए खाने की व्यवस्था करने का आदेश दिया तो श्रीकृष्ण ने कहा कि मेरा शेर सिर्फ बच्चे का ताजा मांस ही खाता है।
राजा मोरध्वज रानी पद्मावती के पास गए और पत्नी से अपने इकलौते पुत्र को शेर की भूख मिटाने के लिए देने की बात कही। राजा मोरध्वज ने दरबार में आकर अपने इकलौते पुत्र का मांस शेर को खिलाने का एलान किया। लेकिन श्रीकृष्ण ने यह भी शर्त रख दी कि आंख में बिना आंसू आए राजा व रानी अपने पुत्र को आरी से कटाकर एक भाग शेर को अपने हाथों से दें।
राजा मोरध्वज ने रानी पद्मावती के साथ अपने इकलौते पुत्र ताम्रध्वज को आरी से चीरकर भूखे शेर को दे दिया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति राजा मोरध्वज की भक्ति को देखकर अर्जुन का अभिमान चूर-चूर हो गया। राजा मोरध्वज की परीक्षा लेने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने राजा के पुत्र को दोबारा जीवित कर दिया।