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वैज्ञानिक दृष्टि से भी समृद्ध है जैन धर्म : सुरेश जैन ऋतुराज

Sun, 28 Jun 2026 01:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:40 AM IST
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Jainism is rich from a scientific perspective as well: Suresh Jain 'Rituraj'
- भारतीय जैन मिलन क्षेत्र-पांच की ओर से कराई गई वर्चुअल जैन सम्राट महारैली
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र-पांच की ओर से आयोजित वर्चुअल जैन सम्राट महारैली का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से 5000 से अधिक वीर एवं वीरांगनाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज रहे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी जैन धर्म समृद्ध है।

सुरेश जैन ऋतुराज ने कहा कि जैन धर्म विश्व का प्राचीन धर्म है। यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने कहा कि ध्वनि के संचरण और उसकी तीव्रता में दूरी के साथ होने वाले परिवर्तन का उल्लेख भगवान महावीर ने लगभग 2600 वर्ष पूर्व जैन आगम ग्रंथों में किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान ने बाद में जिन सिद्धांतों को स्थापित किया, उनका वर्णन जैन शास्त्रों में पहले से मौजूद है।
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उन्होंने पौधों में जीवन की अवधारणा का उल्लेख किया। ऋतुराज ने कहा कि वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने वर्ष 1901 में इस विषय पर शोध किया। जैन आगमों में भगवान महावीर ने सदियों पहले ही वनस्पतियों में जीवन होने का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने बिना किसी प्रयोगशाला और वैज्ञानिक उपकरणों के केवल साधना और आत्मज्ञान के बल पर इन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया। उन्होंने कहा कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खोदाई में प्राप्त प्रतिमाओं और अवशेषों को जैन परंपरा से जोड़कर देखा जाता रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक जैन सम्राटों और वीर व्यक्तित्वों ने राष्ट्र और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने महारानी अवक्का चौटा, दीवान टोडरमल, वीरचंद गांधी जैसे महान लोगों का उल्लेख किया।
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उन्होंने जैन समाज की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर हो रहे कथित हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जैन समाज की पहचान उसके साधु संतों और तीर्थ स्थलों से है। इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैन समाज अहिंसा में विश्वास रखता है। लेकिन समाज अपनी अस्मिता और धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए सदैव सजग रहेगा।
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