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आचार्य श्री 108 निशंक भूषण महाराज का वर्षायोग मवाना में।
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मवाना में जैन धर्म के कार्यक्रम के दौरान श्रद्घालु।
- फोटो : MAWANA
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मवाना। जैन समाज मवाना को आचार्य श्री 108 निशंक भूषण महाराज का मंगल वर्षायोग 2019 करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
रविवार को आचार्य श्री के 15वें पावन वर्षायोग की स्थापना हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल वर्षायोग कलशयात्रा से हुआ। कलश को अपने शीश पर धारण कर लेकर चलने का सौभाग्य जैन समाज मवाना के संरक्षक जयप्रकाश जैन व उनकी पत्नी सरोजबाला जैन को प्राप्त हुआ। मंगल वर्षायोग की कलश यात्रा श्री जैन मंदिर से प्रारंभ हुई तथा बैंडबाजों के साथ धूमधाम से जैन अतिथि भवन पहुंची।
जैन अतिथि भवन पहुंचकर आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। यह सौभाग्य ब्रह्मचारी अशोक जैन तपोवन गणेशपुर वालों को प्राप्त हुआ। पूजन भक्तिभाव से किया गया। समाज ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल चढ़ाकर मंगल चातुर्मास करने का निवेदन किया। आचार्य श्री ने समाज का निवेदन स्वीकार करते हुए सभी को आशीर्वचन देते हुए कहा कि निग्ररंथ दिगंबर मुनिराज वर्षा के चार माह में जीवों की अत्यधिक उत्पत्ति होने के कारण विहार नहीं करते है। इस दौरान एक ही स्थान पर रुककर धर्म साधना व धर्म प्रभावना करते हैं। वर्षायोग आत्मशोधन का पर्व है। इसके पश्चात साधर्मी बंधुओं ने आचार्य श्री को शास्त्र भेंटकर स्वयं को कृतार्थ किया। कार्यक्रम के पश्चात अल्पहार की व्यवस्था आदेश कुमार, दिनेश जैन परिवार की ओर से की गई।
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रविवार को आचार्य श्री के 15वें पावन वर्षायोग की स्थापना हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल वर्षायोग कलशयात्रा से हुआ। कलश को अपने शीश पर धारण कर लेकर चलने का सौभाग्य जैन समाज मवाना के संरक्षक जयप्रकाश जैन व उनकी पत्नी सरोजबाला जैन को प्राप्त हुआ। मंगल वर्षायोग की कलश यात्रा श्री जैन मंदिर से प्रारंभ हुई तथा बैंडबाजों के साथ धूमधाम से जैन अतिथि भवन पहुंची।
जैन अतिथि भवन पहुंचकर आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। यह सौभाग्य ब्रह्मचारी अशोक जैन तपोवन गणेशपुर वालों को प्राप्त हुआ। पूजन भक्तिभाव से किया गया। समाज ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल चढ़ाकर मंगल चातुर्मास करने का निवेदन किया। आचार्य श्री ने समाज का निवेदन स्वीकार करते हुए सभी को आशीर्वचन देते हुए कहा कि निग्ररंथ दिगंबर मुनिराज वर्षा के चार माह में जीवों की अत्यधिक उत्पत्ति होने के कारण विहार नहीं करते है। इस दौरान एक ही स्थान पर रुककर धर्म साधना व धर्म प्रभावना करते हैं। वर्षायोग आत्मशोधन का पर्व है। इसके पश्चात साधर्मी बंधुओं ने आचार्य श्री को शास्त्र भेंटकर स्वयं को कृतार्थ किया। कार्यक्रम के पश्चात अल्पहार की व्यवस्था आदेश कुमार, दिनेश जैन परिवार की ओर से की गई।
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