{"_id":"5d264ace8ebc3e6cea175ee2","slug":"it-is-not-easy-to-get-rid-of-stranded-people-in-moh-chakr-mawana-news-mrt432560748","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोह चक्र में फंसे मनुष्य को छुटकारा आसन नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोह चक्र में फंसे मनुष्य को छुटकारा आसन नहीं
विज्ञापन
3ए - अष्टान्हिका पर्व में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। (हस्तिनापुर)
- फोटो : MAWANA
मोह चक्र में फंसे मनुष्य को छुटकारा आसान नहीं
हस्तिनापुर। हस्तिनापुर आषाढ़ की अष्टान्हिका के पावन पर्व स्वर्णमयी नन्दीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के सुसज्जित मांडले पर दूसरे दिन 16 व 32 अर्घ्य चढ़ाए गए।
सर्वप्रथम मुख्य वेदी में सभी पात्रों एवं श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान का जलाभिषेक किया। आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रेमचन्द जैन, कान्ता जैन को प्राप्त हुआ। वहीं, मांडले पर अर्घ्य चढ़ाने वालों में नरेंद्र सिंह जैन, आदर्श जैन, पारसनाथ जैन सतेन्द्र कुमार, विनोद जैन एवं संजय जैन आदि रहे। क्षेत्र पर विराजमान मुनिश्री 108 समाधी सागर जी महाराज व मुनिश्री 108 निर्वाण भूषण जी महाराज एवं मुनिश्री 108 भावभूषण व मुनि श्री 108 भव्य भूषण जी महाराज के धर्म प्रवचन में कहा कि अनादिकाल से संसारी प्राणी मोह चक्र से उलझकर निज स्वरूप को भूला हुआ है और जब तक मोह चक्र से यह जीव फंसा रहेगा। तब तक संसार चक्र से छुटकारा मिल नहीं सकता है। जब तक संसार चक्र चलता रहेगा तब तक सिद्धचक्र को यह जीव प्राप्त नहीं कर सकता। आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजन प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चों ने भाग लिया और कार्यक्रम के पुरस्कार महेश चन्द जैन दिल्ली वालों ने वितरित किए। समस्त कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषध्यक्ष सुनील कुमार, सतेन्द्र कुमार, राजीव जैन, राजेन्द्र जैन, विनय जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार, अशोक जैन, अतुल जैन, उमेश, कमल, नवनीत जैन व सुदर्शन जैन आदि ने सहयोग दिया।
विज्ञापन
हस्तिनापुर। हस्तिनापुर आषाढ़ की अष्टान्हिका के पावन पर्व स्वर्णमयी नन्दीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के सुसज्जित मांडले पर दूसरे दिन 16 व 32 अर्घ्य चढ़ाए गए।
सर्वप्रथम मुख्य वेदी में सभी पात्रों एवं श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान का जलाभिषेक किया। आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रेमचन्द जैन, कान्ता जैन को प्राप्त हुआ। वहीं, मांडले पर अर्घ्य चढ़ाने वालों में नरेंद्र सिंह जैन, आदर्श जैन, पारसनाथ जैन सतेन्द्र कुमार, विनोद जैन एवं संजय जैन आदि रहे। क्षेत्र पर विराजमान मुनिश्री 108 समाधी सागर जी महाराज व मुनिश्री 108 निर्वाण भूषण जी महाराज एवं मुनिश्री 108 भावभूषण व मुनि श्री 108 भव्य भूषण जी महाराज के धर्म प्रवचन में कहा कि अनादिकाल से संसारी प्राणी मोह चक्र से उलझकर निज स्वरूप को भूला हुआ है और जब तक मोह चक्र से यह जीव फंसा रहेगा। तब तक संसार चक्र से छुटकारा मिल नहीं सकता है। जब तक संसार चक्र चलता रहेगा तब तक सिद्धचक्र को यह जीव प्राप्त नहीं कर सकता। आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजन प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चों ने भाग लिया और कार्यक्रम के पुरस्कार महेश चन्द जैन दिल्ली वालों ने वितरित किए। समस्त कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषध्यक्ष सुनील कुमार, सतेन्द्र कुमार, राजीव जैन, राजेन्द्र जैन, विनय जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार, अशोक जैन, अतुल जैन, उमेश, कमल, नवनीत जैन व सुदर्शन जैन आदि ने सहयोग दिया।
विज्ञापन