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Meerut News: समेकित कृषि प्रणाली मॉडल है बेहद उपयोगी
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भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान में मुख्य द्वार का उद्घाटन करते अतिथि।
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भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान में बुधवार को 37वें स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप-महानिदेशक डॉ. एके नायक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
डॉ. नायक ने बताया कि संस्थान के समेकित कृषि प्रणाली मॉडल उपयोगी हैं। ये मॉडल किसानों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। बढ़ती खेती लागत और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण के बीच ये सहायक हैं। ये खाद्य, पोषण, आय, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एग्रीवोल्टाइक आधारित कृषि प्रणाली को ऊर्जा और खेती का भविष्य बताया। उपमहानिदेशक डॉ. राजवीर सिंह ने 350 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर बल दिया। सहायक महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि संस्थान कृषि जलवायु क्षेत्रों के लिए मॉडल विकसित कर रहा है।
संस्थान निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि मॉडल किसानों की आय तीन से पांच गुना बढ़ा सकते हैं। इनसे पानी की बचत होती है, उर्वरकों की लागत 40 से 60 फीसदी घटती है। ये मॉडल ग्रीनहाउस गैसों को कम करते हैं और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारते हैं। डॉ. एके मोहंती ने उच्च उत्पादकता वाली नस्लों को कृषि प्रणाली में शामिल करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य द्वार का उद्घाटन और पौधारोपण भी किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अमृतलाल मीणा, डॉ. टीपी स्वर्णम, डॉ. आरपी मिश्र, डॉ. राघवेंद्र सिंह, डॉ. एन रविशंकर, डॉ. पीसी जाट आदि मौजूद रहे।
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डॉ. नायक ने बताया कि संस्थान के समेकित कृषि प्रणाली मॉडल उपयोगी हैं। ये मॉडल किसानों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। बढ़ती खेती लागत और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण के बीच ये सहायक हैं। ये खाद्य, पोषण, आय, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एग्रीवोल्टाइक आधारित कृषि प्रणाली को ऊर्जा और खेती का भविष्य बताया। उपमहानिदेशक डॉ. राजवीर सिंह ने 350 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर बल दिया। सहायक महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि संस्थान कृषि जलवायु क्षेत्रों के लिए मॉडल विकसित कर रहा है।
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संस्थान निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि मॉडल किसानों की आय तीन से पांच गुना बढ़ा सकते हैं। इनसे पानी की बचत होती है, उर्वरकों की लागत 40 से 60 फीसदी घटती है। ये मॉडल ग्रीनहाउस गैसों को कम करते हैं और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारते हैं। डॉ. एके मोहंती ने उच्च उत्पादकता वाली नस्लों को कृषि प्रणाली में शामिल करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य द्वार का उद्घाटन और पौधारोपण भी किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अमृतलाल मीणा, डॉ. टीपी स्वर्णम, डॉ. आरपी मिश्र, डॉ. राघवेंद्र सिंह, डॉ. एन रविशंकर, डॉ. पीसी जाट आदि मौजूद रहे।
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