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खाद्य तेलों में महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट
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खाद्य तेलों में महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट
मुजफ्फरनगर। खाद्य तेलों में महंगाई की मार से गृहिणियों की रसोई का बजट बिगाड़ रखा है। वहीं, कोरोना काल में तेलों के दाम नीचे नहीं आने से उपभोक्ता परेशान हैं। व्यापारी पैदावार कम होना महंगाई का कारण मान रहे हैं। दो महीने पहले दालों के दामों में उछाल आया था, वह अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
महंगाई की मार से हर कोई त्रस्त है। खाद्य तेलों से निर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। स्टॉक पर सरकारी नियंत्रण नहीं होना भी खाद्य वस्तुओं में महंगाई बढ़ने की वजह मानी जा रही है। खुदरा व्यापारी को थोक में भाव मिलता है, उसके किराए और अपने मुनाफे को जोड़कर उसी औसत में बेचते हैं। प्रतिस्पर्धा के कारण बाजार रेट पर सामान बेचना पड़ता है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं किराना के थोक एवं खुदरा व्यापारी अनुज गर्ग ने बताया रोजाना कोरोना में मिली लॉकडाउन की चर्चा से बाजार में तेजी आ रही है। कई राज्यों में रात का लॉकडाउन लगाया भी गया है, जिससे ग्राहक को जरूरत से ज्यादा सामान खरीद कर घर रखने की आदत पड़ गई है।
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नवीन मंडी कूकड़ा के व्यापारी अनुज डिंपल बताते हैं कि बड़े पूंजीपतियों द्वारा खाद्य पदार्थों का स्टॉक महंगाई का कारण है। उन्हें बड़ी मंडियों के भाव पर जो माल मिलता है, उस पर उचित मुनाफा लिया जाता है। हालांकि बाहरी प्रांतों में कोरोना की वजह से मार्केट में कई वस्तुओं पर उछाल है।
- शहर के मिमलाना रोड पर किराना व्यापारी अरविंद गर्ग खुदरा भाव थोक के आधार पर तय होता है। पैदावार कम होना और बाहर से आयात नहीं होने के कारण कई वस्तुओं में उतार चढ़ाव है। खाद्य तेलों में लगातार रेट बढ़ने से व्यापारी भी चिंतित है और अनिश्चितता के कारण कई बार घाटा उठाना पड़ता है।
रामलीला टिल्ला निवासी अनीता अग्रवाल, शिव नगर निवासी मोनिका शर्मा और मंजू वर्मा, आदर्श कालोनी निवासी कविता त्यागी कहती है तेलों में महंगाई ने किचन की खुशबू छीन ली है। रसोई में रोजमर्रा लगने वाले तेल, रिफाइंड और आलू प्याज में बढ़ती महंगाई से बजट बिगड़ गया है।
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खाद्य पदार्थ रेट तीन महीने पहले रेट
तेल सरसों 135 105 प्रति लीटर
तेल सरसों 145-150 120-125 लीटर
रिफाइंड तेल 1820 (15 लीटर) 1400(15 लीटर)
उड़द दाल 130-135 किलो 115
चाय पत्ती 320-340 220-240
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मुजफ्फरनगर। खाद्य तेलों में महंगाई की मार से गृहिणियों की रसोई का बजट बिगाड़ रखा है। वहीं, कोरोना काल में तेलों के दाम नीचे नहीं आने से उपभोक्ता परेशान हैं। व्यापारी पैदावार कम होना महंगाई का कारण मान रहे हैं। दो महीने पहले दालों के दामों में उछाल आया था, वह अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
महंगाई की मार से हर कोई त्रस्त है। खाद्य तेलों से निर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। स्टॉक पर सरकारी नियंत्रण नहीं होना भी खाद्य वस्तुओं में महंगाई बढ़ने की वजह मानी जा रही है। खुदरा व्यापारी को थोक में भाव मिलता है, उसके किराए और अपने मुनाफे को जोड़कर उसी औसत में बेचते हैं। प्रतिस्पर्धा के कारण बाजार रेट पर सामान बेचना पड़ता है।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं किराना के थोक एवं खुदरा व्यापारी अनुज गर्ग ने बताया रोजाना कोरोना में मिली लॉकडाउन की चर्चा से बाजार में तेजी आ रही है। कई राज्यों में रात का लॉकडाउन लगाया भी गया है, जिससे ग्राहक को जरूरत से ज्यादा सामान खरीद कर घर रखने की आदत पड़ गई है।
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नवीन मंडी कूकड़ा के व्यापारी अनुज डिंपल बताते हैं कि बड़े पूंजीपतियों द्वारा खाद्य पदार्थों का स्टॉक महंगाई का कारण है। उन्हें बड़ी मंडियों के भाव पर जो माल मिलता है, उस पर उचित मुनाफा लिया जाता है। हालांकि बाहरी प्रांतों में कोरोना की वजह से मार्केट में कई वस्तुओं पर उछाल है।
- शहर के मिमलाना रोड पर किराना व्यापारी अरविंद गर्ग खुदरा भाव थोक के आधार पर तय होता है। पैदावार कम होना और बाहर से आयात नहीं होने के कारण कई वस्तुओं में उतार चढ़ाव है। खाद्य तेलों में लगातार रेट बढ़ने से व्यापारी भी चिंतित है और अनिश्चितता के कारण कई बार घाटा उठाना पड़ता है।
रामलीला टिल्ला निवासी अनीता अग्रवाल, शिव नगर निवासी मोनिका शर्मा और मंजू वर्मा, आदर्श कालोनी निवासी कविता त्यागी कहती है तेलों में महंगाई ने किचन की खुशबू छीन ली है। रसोई में रोजमर्रा लगने वाले तेल, रिफाइंड और आलू प्याज में बढ़ती महंगाई से बजट बिगड़ गया है।
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खाद्य पदार्थ रेट तीन महीने पहले रेट
तेल सरसों 135 105 प्रति लीटर
तेल सरसों 145-150 120-125 लीटर
रिफाइंड तेल 1820 (15 लीटर) 1400(15 लीटर)
उड़द दाल 130-135 किलो 115
चाय पत्ती 320-340 220-240