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पितरों को मोक्ष दिलाती है इंदिरा एकादशी, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ होगा रवि पुष्य योग
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पितरों को मोक्ष दिलाती है इंदिरा एकादशी, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ होगा रवि पुष्य योग
मेरठ। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी का व्रत किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान आने वाली यह एकादशी पितरों को मोक्ष दिलाती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ रवि पुष्य योग भी होगा। रविवार को यह व्रत किया जाएगा। आज शनिवार को दशमी का श्राद्ध पूजन होगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलोजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इंदिरा एकादशी का व्रत प्रभावशाली है कि यह बरसों पहले गुजरे पितरों को भी मोक्ष दिलवाने में समर्थ हैं। इस व्रत का महत्व स्वयं श्री कृष्ण ने धर्मराज युद्धिष्ठर को बताया था। इस व्रत का पितृपक्ष के समय में बहुत बड़ा महत्व है। यमलोक में यमराज जिन पितर को दंड स्वरूप नरक लोक का कष्ट देते हैं, वे इंदिरा एकादशी व्रत के पुण्य से मोक्ष पाते हैं। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति भी मृत्यु के बाद बैकुण्ठ धाम जाता है।
देवगुरु बृहस्पति हो रहे मार्गी
ग्रहों के देवता बृहस्पति रविवार 13 सितंबर को प्रात: 6.12 बजे मार्गी हो जाएंगे। बृहस्पति अपनी ही धनु में 14 मई 2020 से वक्री चल रहे थे। बृहस्पति 20 नवंबर 2020 को मार्गी चलते हुए अपनी राशि बदलेंगे और मकर राशि में प्रवेश करेंगे। बृहस्पति के मार्गी होने से सभी राशि वालों को कहीं न कहीं लाभ मिलने की संभावना बनेगी। अटके कार्य गति पकड़ेंगे। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ व श्रीमद्भागवत जी का पाठ करना शुभ रहेगा।
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मेरठ। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी का व्रत किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान आने वाली यह एकादशी पितरों को मोक्ष दिलाती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ रवि पुष्य योग भी होगा। रविवार को यह व्रत किया जाएगा। आज शनिवार को दशमी का श्राद्ध पूजन होगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलोजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इंदिरा एकादशी का व्रत प्रभावशाली है कि यह बरसों पहले गुजरे पितरों को भी मोक्ष दिलवाने में समर्थ हैं। इस व्रत का महत्व स्वयं श्री कृष्ण ने धर्मराज युद्धिष्ठर को बताया था। इस व्रत का पितृपक्ष के समय में बहुत बड़ा महत्व है। यमलोक में यमराज जिन पितर को दंड स्वरूप नरक लोक का कष्ट देते हैं, वे इंदिरा एकादशी व्रत के पुण्य से मोक्ष पाते हैं। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति भी मृत्यु के बाद बैकुण्ठ धाम जाता है।
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देवगुरु बृहस्पति हो रहे मार्गी
ग्रहों के देवता बृहस्पति रविवार 13 सितंबर को प्रात: 6.12 बजे मार्गी हो जाएंगे। बृहस्पति अपनी ही धनु में 14 मई 2020 से वक्री चल रहे थे। बृहस्पति 20 नवंबर 2020 को मार्गी चलते हुए अपनी राशि बदलेंगे और मकर राशि में प्रवेश करेंगे। बृहस्पति के मार्गी होने से सभी राशि वालों को कहीं न कहीं लाभ मिलने की संभावना बनेगी। अटके कार्य गति पकड़ेंगे। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ व श्रीमद्भागवत जी का पाठ करना शुभ रहेगा।
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