{"_id":"c14e6d63c2d1f9da42ea1cfb41f0ca35","slug":"indian-army-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"देशभक्ति, शौर्य और उत्साह का संगम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देशभक्ति, शौर्य और उत्साह का संगम
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 08 Oct 2015 02:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ कॉलेज परिसर बुधवार को देभक्ति के रंग में रंग गया। भारत माता और वंदे मातरम् के जयकारों से परिसर गूंज उठा। युवाओं का जोश और उत्साह देखते ही बनता था। सभी में सेना के शौर्य को जानने की उत्सुकता दिखी। मौका था 1965 के भारत-पाक युद्ध की स्वर्ण जयंती पर आयोजित कार्यक्रम का। सेना ने ‘संवाद’ कार्यक्रम के जरिये युद्ध के पहलुओं पर चर्चा की। पाकिस्तान से जीते हथियारों की प्रदर्शनी लगाई। युद्ध से जुड़ी तस्वीरों को प्रदर्शनी में लगाकर युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। उन्हें देशभक्ति का पाठ पढ़ाया गया।
जब नारों से गूंज उठा पूरा हॉल
कॉलेज के मूट कोर्ट हाल में टेली प्रोमटर के जरिये पूरे युद्ध पर प्रकाश डाला गया। हॉल में बैठे युवाओं ने भारत माता की जय के नारे लगाने शुरू कर दिए। तीन घंटे तक कार्यक्रम चला। युवाओं ने 20 से अधिक बार नारेबाजी की। सैन्य अधिकारी और अतिथि तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ा रहे थे। ब्रिगेडियर एसके सिंह ने कहा कि हम विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारते हैं, बल्कि साहस और धैर्य के साथ माकूल समय पर जवाब देते हैं। कर्नल जय सिंह ने कहा कि उस युद्ध में हर यूनिट शानदार तरीके से लड़ी और बहादुर जवानों ने करारा जवाब दिया।
‘गुलाम कश्मीर कब तक लेंगे’
कार्यक्रम के अंत में एक छात्र ने पूछा कि हम गुलाम कश्मीर को कब तक अपने कब्जे में लेंगे। क्या युद्ध में कभी परमाणु बम का इस्तेमाल हो सकता है। सेना के अधिकारियों ने कहा कि हमारा काम देश की रक्षा करना है। फैसला लेने का अधिकार सरकार को है।
विज्ञापन
जमकर लीं सेल्फी, ग्रुप फोटो भी खींचे
प्रदर्शनी में पाकिस्तान से छिने गए हथियारों के साथ भारत की तरफ से इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों को रखा गया। साथ ही कुछ अत्याधुनिक हथियार भी सेना की तरफ से प्रदर्शनी में रखे गए थे। शहीदों से लेकर युद्ध के दौरान के कुछ अहम फोटोग्राफ भी प्रदर्शनी में लगाए गए थे। युवाओं ने हथियारों के साथ जमकर सेल्फी लीं और ग्रुप फोटो खींचने की भी होड़ रही। 12 से अधिक स्कूलों के करीब 500 छात्रों ने प्रदर्शनी का मजा लिया।
प्रदर्शनी में रखे गए हथियार
पाक सेना से छिना गए हथियार
- यूएनजी कारतूस
- मैगजीन
- जीपीएस और रेडियो सिस्टम
- टेलीफोन
- पाक सेना की दूरबीन
- टैंक से कुछ हिस्से
भारतीय सेना के हथियार
- 88 एमएम मोटर्रा
- ऑटोमेटिक ग्रेनेड सिस्टम
- 84 एमएम राकेट लॉन्चर
- 20 एमएम एंटी मैटेरियल राइफल
- मशीन गन
- ऑटोमेटिक राइफल
- हैंड ग्रेनेड
- वायरलेस सिस्टम
‘युद्ध कई, समस्या एक, समाधान जीरो’
जेएनयू की प्रोफेसर सविता पांडे ने कहा कि पाकिस्तान से जो भी युद्ध हुआ है वह कश्मीर के लिए हुआ है। हर बार पाकिस्तान हार जाता है, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। 2001 तक आतंकवाद की समस्या कश्मीर तक सीमित थी, जो अब पूरे देश में फैल चुकी है। दिल्ली और मुंबई में बड़े हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का मतलब सिर्फ दुश्मन की के दिल में दहशत फैलना होना चाहिए। जिसे वह दोबारा आपके खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत न जुटा सके। लेकिन भारत अभी तक इसमें सफल नहीं हो पाया है।
पाक को कभी भी हरा देंगे : आरपी सिंह
1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्वर्ण जयंती के मौके पर बुधवार को मेरठ कॉलेज में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि 22 इंफ्रेंटी डिविजन के मेजर जनरल आरपी सिंह रहे। उन्होंने कहा कि हमारी फौज कभी भी पाकिस्तान की सेना को हरा सकती है। जवान हर परिस्थिति से निपटने को तैयार हैं। मेरठ कालेज के डिफेंस स्टडीज विभाग की तरफ से कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत-पाक युद्ध के गवाह रहे रिटायर्ड कर्नल जय सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के दिल्ली की प्रोफेसर सविता पांडे ने वर्तमान सैन्य ताकत से लेकर कश्मीर समस्या तक पर विचार रखे। कॉलेज के मूट कोर्ट हाल में करीब तीन घंटे तक टेली प्रोमटर के माध्यम से 1965 के युद्ध की स्थिति को समझाया गया।
ब्रिगेडियर एसके सिंह ने बताया कि युद्ध के समय पाक के पास ज्यादा सैन्य साजो सामान था, लेकिन हमारी सेना ने हर स्तर पर पाक सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया। प्रो. सविता पांडे ने जोर दिया कि 1965 से लेकर आज तक पाक सिर्फ उन्हीं जगहों से क्यों हमला करता है? इस पर मंथन की जरूर है। कार्यक्रम में डिफेंस स्टडीज विभाग के शिक्षक डॉ. संजय कुमार और डॉ. अनुराग जायसवाल द्वारा लिखा गई ‘इंडो पाक टेंशन कनफ्लिक्ट और कोऑपरेशन’ किताब का विमोचन किया गया। ब्रिगेडियर एसके सिंह, रिटायर्ड कर्नल जयसिंह व कालेज के प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह मौजूद रहे। कॉलेज में आयोजित प्रदर्शनी में हथियारों के साथ युद्ध की तस्वीरें भी रखी गईं। कई कॉलेजों के छात्रों ने प्रदर्शनी में हिस्सा लिया।
पाक ने शास्त्री जी को कमजोर समझा : ब्रिगेडियर एसके सिंह
संवाद कार्यक्रम में ब्रिगेडियर एसके सिंह ने कहा कि 1962 के युद्ध में नेहरू जी की सरकार थी। यह पहला युद्ध था जिसमें युद्ध के क्षेत्र पर सेना नहीं, राजनीतिक स्तर पर फैसले लिए जा रहे थे। सेना को यह बताया जा रहा था कि कहां पर आपको पीछे हटना है और कहां पर आक्रमण करना है, जबकि युद्ध होने के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हो जाता है। सेना अपने स्तर से फैसले लेती है। सेना मानती है कि 1962 में चीन से हार की गोद से ही 1965 के युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की गई थी। क्योंकि पाकिस्तान ने अंदाजा लगाया था कि भारतीय सेना का मनोबल गिर गया है। पाक ने लाल बहादुर शास्त्री को कमजोर प्रशासक भी समझ लिया था।
ब्रिगेडियर एसके सिंह ने कहा कि जब युद्ध शुरू हुआ तो हिंदुस्तान की सैन्य स्थिति ठीक नहीं थी। हर स्तर से सीमित संसाधन थे। फिर भी सेना ने मजबूती से युद्ध लड़ा और जीत हासिल की। क्योंकि जवान किसी मेडल या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ देश के लिए लड़ता है। उन्होंने कहा कि सेना और प्रधानमंत्री के बीच अच्छा तालमेल जरूरी है। इंदिरा गांधी और तत्कालीन सेना अध्यक्ष सैम मानेकशॉ के बीच अच्छा समन्वय था। 1972 की जीत को भारतीय सेना की सबसे बड़ी जीत कहा जा सकता है।
पाक का 60 फीसदी हुआ था नुकसान
ब्रिगेडियर एसके सिंह ने युद्ध के दौरान भारत-पाक की सैन्य क्षमता को टेली प्रोमटर के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध में सबसे ज्यादा सैन्य नुकसान हुआ था। उसके बाद भारत-पाक युद्ध में सबसे ज्यादा सैन्य क्षति हुई। पाकिस्तान के 60 फीसदी हथियार नष्ट हो गए थे। भारत के पास पाक से कम हथियार थे।
कश्मीर समस्या सिर्फ राजनीति देन : कर्नल जय सिंह
1965 युद्ध के साक्षी कर्नल जय सिंह (रिटायर्ड) ने कहा कि कश्मीर समस्या बहुत बड़ी नहीं है। सेना एक दिन में इसे हल कर देगी। लेकिन राजनीति के कारण समस्या को बढ़ाया जा रहा है। जनता सरकार बनाती है, जनता चाहे तो यह समस्या पल भर में हल हो जाएगी। हमने अब तक का राजनीतिक इतिहास देखा है जो समस्या विभाजन के समय से शुरू हुई थी वो आज तक कायम है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार आदेश दे तो सेना सब कुछ कर सकती है, बशर्ते सत्ता में बैठे लोगों के पास इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
विज्ञापन
जब नारों से गूंज उठा पूरा हॉल
कॉलेज के मूट कोर्ट हाल में टेली प्रोमटर के जरिये पूरे युद्ध पर प्रकाश डाला गया। हॉल में बैठे युवाओं ने भारत माता की जय के नारे लगाने शुरू कर दिए। तीन घंटे तक कार्यक्रम चला। युवाओं ने 20 से अधिक बार नारेबाजी की। सैन्य अधिकारी और अतिथि तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ा रहे थे। ब्रिगेडियर एसके सिंह ने कहा कि हम विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारते हैं, बल्कि साहस और धैर्य के साथ माकूल समय पर जवाब देते हैं। कर्नल जय सिंह ने कहा कि उस युद्ध में हर यूनिट शानदार तरीके से लड़ी और बहादुर जवानों ने करारा जवाब दिया।
विज्ञापन
‘गुलाम कश्मीर कब तक लेंगे’
कार्यक्रम के अंत में एक छात्र ने पूछा कि हम गुलाम कश्मीर को कब तक अपने कब्जे में लेंगे। क्या युद्ध में कभी परमाणु बम का इस्तेमाल हो सकता है। सेना के अधिकारियों ने कहा कि हमारा काम देश की रक्षा करना है। फैसला लेने का अधिकार सरकार को है।
विज्ञापन
जमकर लीं सेल्फी, ग्रुप फोटो भी खींचे
प्रदर्शनी में पाकिस्तान से छिने गए हथियारों के साथ भारत की तरफ से इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों को रखा गया। साथ ही कुछ अत्याधुनिक हथियार भी सेना की तरफ से प्रदर्शनी में रखे गए थे। शहीदों से लेकर युद्ध के दौरान के कुछ अहम फोटोग्राफ भी प्रदर्शनी में लगाए गए थे। युवाओं ने हथियारों के साथ जमकर सेल्फी लीं और ग्रुप फोटो खींचने की भी होड़ रही। 12 से अधिक स्कूलों के करीब 500 छात्रों ने प्रदर्शनी का मजा लिया।
प्रदर्शनी में रखे गए हथियार
पाक सेना से छिना गए हथियार
- यूएनजी कारतूस
- मैगजीन
- जीपीएस और रेडियो सिस्टम
- टेलीफोन
- पाक सेना की दूरबीन
- टैंक से कुछ हिस्से
भारतीय सेना के हथियार
- 88 एमएम मोटर्रा
- ऑटोमेटिक ग्रेनेड सिस्टम
- 84 एमएम राकेट लॉन्चर
- 20 एमएम एंटी मैटेरियल राइफल
- मशीन गन
- ऑटोमेटिक राइफल
- हैंड ग्रेनेड
- वायरलेस सिस्टम
‘युद्ध कई, समस्या एक, समाधान जीरो’
जेएनयू की प्रोफेसर सविता पांडे ने कहा कि पाकिस्तान से जो भी युद्ध हुआ है वह कश्मीर के लिए हुआ है। हर बार पाकिस्तान हार जाता है, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। 2001 तक आतंकवाद की समस्या कश्मीर तक सीमित थी, जो अब पूरे देश में फैल चुकी है। दिल्ली और मुंबई में बड़े हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का मतलब सिर्फ दुश्मन की के दिल में दहशत फैलना होना चाहिए। जिसे वह दोबारा आपके खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत न जुटा सके। लेकिन भारत अभी तक इसमें सफल नहीं हो पाया है।
पाक को कभी भी हरा देंगे : आरपी सिंह
1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्वर्ण जयंती के मौके पर बुधवार को मेरठ कॉलेज में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि 22 इंफ्रेंटी डिविजन के मेजर जनरल आरपी सिंह रहे। उन्होंने कहा कि हमारी फौज कभी भी पाकिस्तान की सेना को हरा सकती है। जवान हर परिस्थिति से निपटने को तैयार हैं। मेरठ कालेज के डिफेंस स्टडीज विभाग की तरफ से कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत-पाक युद्ध के गवाह रहे रिटायर्ड कर्नल जय सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के दिल्ली की प्रोफेसर सविता पांडे ने वर्तमान सैन्य ताकत से लेकर कश्मीर समस्या तक पर विचार रखे। कॉलेज के मूट कोर्ट हाल में करीब तीन घंटे तक टेली प्रोमटर के माध्यम से 1965 के युद्ध की स्थिति को समझाया गया।
ब्रिगेडियर एसके सिंह ने बताया कि युद्ध के समय पाक के पास ज्यादा सैन्य साजो सामान था, लेकिन हमारी सेना ने हर स्तर पर पाक सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया। प्रो. सविता पांडे ने जोर दिया कि 1965 से लेकर आज तक पाक सिर्फ उन्हीं जगहों से क्यों हमला करता है? इस पर मंथन की जरूर है। कार्यक्रम में डिफेंस स्टडीज विभाग के शिक्षक डॉ. संजय कुमार और डॉ. अनुराग जायसवाल द्वारा लिखा गई ‘इंडो पाक टेंशन कनफ्लिक्ट और कोऑपरेशन’ किताब का विमोचन किया गया। ब्रिगेडियर एसके सिंह, रिटायर्ड कर्नल जयसिंह व कालेज के प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह मौजूद रहे। कॉलेज में आयोजित प्रदर्शनी में हथियारों के साथ युद्ध की तस्वीरें भी रखी गईं। कई कॉलेजों के छात्रों ने प्रदर्शनी में हिस्सा लिया।
पाक ने शास्त्री जी को कमजोर समझा : ब्रिगेडियर एसके सिंह
संवाद कार्यक्रम में ब्रिगेडियर एसके सिंह ने कहा कि 1962 के युद्ध में नेहरू जी की सरकार थी। यह पहला युद्ध था जिसमें युद्ध के क्षेत्र पर सेना नहीं, राजनीतिक स्तर पर फैसले लिए जा रहे थे। सेना को यह बताया जा रहा था कि कहां पर आपको पीछे हटना है और कहां पर आक्रमण करना है, जबकि युद्ध होने के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हो जाता है। सेना अपने स्तर से फैसले लेती है। सेना मानती है कि 1962 में चीन से हार की गोद से ही 1965 के युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की गई थी। क्योंकि पाकिस्तान ने अंदाजा लगाया था कि भारतीय सेना का मनोबल गिर गया है। पाक ने लाल बहादुर शास्त्री को कमजोर प्रशासक भी समझ लिया था।
ब्रिगेडियर एसके सिंह ने कहा कि जब युद्ध शुरू हुआ तो हिंदुस्तान की सैन्य स्थिति ठीक नहीं थी। हर स्तर से सीमित संसाधन थे। फिर भी सेना ने मजबूती से युद्ध लड़ा और जीत हासिल की। क्योंकि जवान किसी मेडल या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ देश के लिए लड़ता है। उन्होंने कहा कि सेना और प्रधानमंत्री के बीच अच्छा तालमेल जरूरी है। इंदिरा गांधी और तत्कालीन सेना अध्यक्ष सैम मानेकशॉ के बीच अच्छा समन्वय था। 1972 की जीत को भारतीय सेना की सबसे बड़ी जीत कहा जा सकता है।
पाक का 60 फीसदी हुआ था नुकसान
ब्रिगेडियर एसके सिंह ने युद्ध के दौरान भारत-पाक की सैन्य क्षमता को टेली प्रोमटर के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध में सबसे ज्यादा सैन्य नुकसान हुआ था। उसके बाद भारत-पाक युद्ध में सबसे ज्यादा सैन्य क्षति हुई। पाकिस्तान के 60 फीसदी हथियार नष्ट हो गए थे। भारत के पास पाक से कम हथियार थे।
कश्मीर समस्या सिर्फ राजनीति देन : कर्नल जय सिंह
1965 युद्ध के साक्षी कर्नल जय सिंह (रिटायर्ड) ने कहा कि कश्मीर समस्या बहुत बड़ी नहीं है। सेना एक दिन में इसे हल कर देगी। लेकिन राजनीति के कारण समस्या को बढ़ाया जा रहा है। जनता सरकार बनाती है, जनता चाहे तो यह समस्या पल भर में हल हो जाएगी। हमने अब तक का राजनीतिक इतिहास देखा है जो समस्या विभाजन के समय से शुरू हुई थी वो आज तक कायम है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार आदेश दे तो सेना सब कुछ कर सकती है, बशर्ते सत्ता में बैठे लोगों के पास इच्छाशक्ति होनी चाहिए।