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यूपी के इस शहर में एक ऐसा स्कूल, जहां अक्तूबर में होती है पढ़ाई शुरू

Sat, 15 Jul 2017 12:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 15 Jul 2017 12:07 PM IST
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In this city of UP a school, where to start studies in October
यूपी का यह एक स्कूल
हस्तिनापुर के खेड़ीकलां में प्रदेश का शायद यह पहला ऐसा प्राथमिक स्कूल होगा, जहां ग्रीष्मावकाश चार माह का होता है। इसका कारण भी जायज है, क्योंकि जब बारिश के कारण गंगा उफान पर होती है तो शिक्षक जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने से डरते हैं। इसलिए यहां मई में ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल सीधे अक्तूबर में खुलता है। 
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इस सरकारी स्कूल में क्षेत्र के बधवा गांव के बच्चे भी पढ़ते हैं। जहां दो शिक्षक तैनात हैं और करीब 150 बच्चे पंजीकृत हैं। गांव के नरेंद्र कुमार आदि के अनुसार स्कूल 20 मई को ग्रीष्मावकाश के कारण बंद हो जाता है। उसके बाद जनपद के तमाम स्कूल तो एक जुलाई को खुल जाते हैं। लेकिन उनके गांव का स्कूल नहीं खुलता है। इसका कारण बारिश के कारण गंगा में लगातार बढ़ता पानी होता है। क्योंकि आने-जाने के लिए सिर्फ एक नाव ही सहारा है। गंगा में पानी बढ़ जाने के कारण नाव से चलना भी खतरा भरा होता है। यह पानी सितंबर के अंतिम सप्ताह तक कम होता है। इसके बाद ही शिक्षक स्कूल जाना शुरू करते हैं। 
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अक्तूबर में होती है पढ़ाई शुरू 
खेड़ी कला के प्राथमिक स्कूल में बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस आदि का वितरण अक्तूबर में शुरू होता है। साथ ही पढ़ाई भी शुरू होती है। अब 120 दिन का अतिरिक्त अवकाश होने के चलते इन बच्चों की पढ़ाई कैसे होती होगी, इसे सहज ही समझा जा सकता है।
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मिड-डे मील होता है वितरित

In this city of UP a school, where to start studies in October
ग्राम प्रधान सुशीला

ग्रामीणों के अनुसार शिक्षक आएं या न आएं। लेकिन स्कूल में पंजीकृत 150 बच्चों को मिड-डे मील प्रतिदिन वितरित होता है। खाना बनाने वाली रसोइया को ग्राम प्रधान द्वारा राशन व अन्य सामान समय से उपलब्ध करा दिया जाता है और वह नियमित मिड-डे मील तैयार कर वितरित करती है। 

सरकार कुछ करे तो बात बने
ग्राम प्रधान सुशीला का कहना है कि गंगा में पानी बढ़ जाने से स्थिति ज्यादा खराब होती है। ऐसे में नाव से आने-जाने का साधन भी बंद हो जाता है। शिक्षक भी जान जोखिम में डालकर कैसे आएं। क्योंकि बरसात में कोई रास्ता यहां तक आने का नहीं होता है। सरकार यदि गांव को मनोहरपुर की तरह विस्थापित करे तो बात बने। 

हरसंभव प्रयास करेंगे
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार का कहना है कि मैंने अभी चार्ज लिया है। इस गांव में जल्दी ही जाकर स्कूल देखूंगा और जो भी हो सकता है वह किया जाएगा। लेकिन अगर रास्ता ही नहीं है तो दिक्कत गंभीर है। फिर भी बच्चों की पढ़ाई समय से सुचारु हो इसके लिए हरसंभव प्रयास होगा।

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