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दो पूर्व डीएम कटघरे में... अमीन ने ऐसे कमाए करोड़ों, होगी CBI जांच!

Fri, 06 Oct 2017 10:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 06 Oct 2017 10:53 AM IST
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In the two former DM law... amin earned crores of rupees, demand for CBI inquiry
करोड़ों का घोटाला

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे एवं ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे के लिए हुए जमीन अधिग्रहण में घोटाले का खुलासा हुआ है। इसमें गाजियाबाद में तैनात रहे डीएम विमल कुमार शर्मा एवं निधि केसरवानी कटघरे में आ गए हैं। तत्कालीन एडीएम एलए घनश्याम सिंह की संलिप्तता उजागर हो रही है। मंडलायुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार द्वारा कराई जांच में साफ हुआ है कि इस प्रकरण में बीस करोड़ से ज्यादा का गड़बड़झाला हुआ है। मंडलायुक्त ने तत्कालीन दोनों डीएम, एडीएम एलए, अमीन तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। साथ ही जांच सीबीआई से कराने की भी सिफारिश की है।

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भू-अधिग्रहण घोटाले की यह जांच कमिश्नर ने अपर आयुक्त रणधीर सिंह दुहन से कराई। इसकी जांच रिपोर्ट डीएम गाजियाबाद को भेजकर इसके विस्तृत परीक्षण को कहा गया। डीएम गाजियाबाद की अध्यक्षता में गठित जांच रिपोर्ट 8 सितंबर 2017 को कमिश्नर को भेजी गई। इसके अध्ययन के बाद यह साफ हो गया कि भू अधिग्रहण में भारी घोटाला किया गया है। जांच में साफ हुआ है कि तत्कालीन एडीएम भू अध्याप्ति घनश्याम सिंह ने नोटिफिकेशन के बाद अपने पुत्र शिवांग राठौर तथा उन्हीं के कार्यालय में तैनात अमीन संतोष कुमार ने अपने रिश्तेदारों के जरिए किसानों की जमीन पूर्व षडयंत्र द्वारा खरीद ली। क्योंकि उन्हें यह भरोसा था कि वह आर्बिट्रेशन में इसका मुआवजा अपने हिसाब से बढ़ावा लेंगे और बाद में हुआ भी यही। तत्कालीन डीएम के यहां आर्बिट्रेशन डाला तो उन्होंने भी सांठगांठ कर इसकी जमीन का मुआवजा 10 गुना तक बढ़ा दिया। इस खेल में अधिकारियों के अलावा कुछ स्थानीय दलाल भी शामिल रहे और एक पूरा रैकेट खड़ा किया गया। दलालों ने किसानों के साथ संयुक्त खाते खोले और प्रतिकर की धनराशि आते ही अपने खातों में ट्रांसफर कर ली।

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ऐसे किया घोटाला

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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे

एक्सप्रेस वे में जमीन अधिग्रहण के लिए अवार्ड होते ही यह ग्रुप सक्रिय हो गया। अवार्ड की रकम से बस थोड़ी ज्यादा दर पर कई गांवों में किसानों से जमीन खरीद ली गई। बाद में इस जमीन का मुआवजा आबिट्रेशन में कई गुना बढ़वाकर करोड़ों के वारे न्यारे किए गए। इसके अलावा गांव पट्टे की जमीन का भी गलत भुगतान करने की बात सामने आई।

एसएसपी भी कटघरे में
तत्कालीन एसएसपी भी इस प्रकरण में कटघरे में आ गए हैं। इन शिकायतों पर जांच तत्कालीन एसएसपी को दी गई थी ,जिन्होंने थानाध्यक्ष मसूरी से जांच कराई। एसओ ने जांच में कहा कि अर्जित भूमि का प्रतिकर राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा जांच के बाद राजस्व अभिलेखों में दर्ज लोगों को नियमानुसार दिया गया।

एनएचआई अधिकारियों की थी शह
जांच रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की इसमें संलिप्तता रही, क्योंकि उन्होंने मुआवजे में की गई इस बेतहाशा वृद्धि का सही ढंग से विरोध नहीं किया और खेल को चलने दिया। आर्बिट्रेशन में बढ़ी दर की सक्षम न्यायालय में अपील नहीं की गई। इससे एनएचएआई को भारी आर्थिक क्षति हुई।

सीबीआई जांच की सिफारिश
गाजियाबाद निवासी लियाकत अली, हापुड़ निवासी अब्दुल रज्जाक तथा छतरपुर दिल्ली निवासी केलव शर्मा आदि ने इस गड़बड़झाले की शिकायत की थी। इसके बाद यह जांच की गई। आयुक्त डा. प्रभात के मुताबिक इस प्रकरण में केवल 456 मामलों का ही परीक्षण किया गया है, जबकि 3672 किसानों से जमीन अधिग्रहण होना है। 1283 किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। कुल 1248.16 करोड़ रुपये की धनराशि बंटनी है जिसमें से 554.34 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई या किसी ऐसी ही विशिष्ट एजेंसी से कराई जाए।

आरोप

In the two former DM law... amin earned crores of rupees, demand for CBI inquiry
डॉ. प्रभात कुमार, आयुक्त मेरठ

1. तत्कालीन एडीएम एल घनश्याम सिंह- इनके पुत्र शिवांग राठौर ने गांव गाजियाबाद के गांव नाहल कुशलिया और हापुड़ के गांव पटना मुरादनगर में सात खसरा नंबरों की जमीन 30 सितंबर 2013 को 1582.19 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से खरीदी, जबकि यहां 1235.18 रुपये के हिसाब से अवार्ड हुआ था। जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना इससे पूर्व 07 अगस्त 2012 को ही हो चुकी थी और इसके बाद यहां जमीन नहीं खरीदी जा सकती थी। जमीन एक करोड़ 78 लाख पांच हजार 539 रुपये में खरीदी गई तथा आर्बिट्रेशन बाद इसका मूल्य 9 करोड़ 36 लाख 77 449 बना। ऐसे में इन्हें सात करोड़ 58 लाख 71 हजार 910 रुपये का लाभ हुआ। हालांकि नाहल गांव की जमीन दूसरों को क्रय कर प्रतिकर न उठाकर कुल पांच करोड़ से ज्यादा प्रतिकर प्राप्त किया गया। जमीन खरीद की स्वीकृति में शासन को भी गुमराह किया। जमीन पहले खरीद ली और स्वीकृति बाद में ली गई। कार्रवाई की संस्तुति- एडीएम को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराआें में उनके पुत्र शिवांग पर भी एफआईआर।
2. अमीन संतोष कुमार- संतोष की पत्नी लोकेश बेनीवाल, मामा रनवीर सिंह, रनवीर के पुत्र दीपक तथा पुत्र वधू दिव्या आदि ने नाहल गांव समेत कुल 9 खसरा नंबरों की जमीन किसानों से अधिसूचना जारी होने के बाद खरीदी। इसे 3 करोड़ 54 लाख 20 हजार 442 रुपये में  खरीदा गया। इसका मुआवजा बना 14 करोड़ 91 लाख 85 हजार 429। कुल फायदा हुआ 11 करोड़ 37 लाख 64 हजार 987 रुपये का।
कार्रवाई की संस्तुति- तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराआें में एफआईआर हो। रिश्तेदारों पर भी एफआईआर हो।
3. दलाल इदरीश, शाहिद, शमीम आदि- रसूलपुर सिकरोड़ में जमीन 2 करोड़ 56 लाख 16 हजार 500 सौ में खरीदी और आर्बिट्रेशन के बाद 4 करोड़ 74 लाख 98 हजार 75 रुपये प्राप्त किए। लाभ हुआ दो करोड़ 18 लाख 82 हजार 250 रुपये का।
कार्रवाई की संस्तुति- सुसंगत धाराओं में एफआईआर
4. पूर्व डीएम विमल कुमार शर्मा - गांव कुशलिया में अवार्ड की दर 617. 59 रुपये थी। तत्कालीन डीएम विमल कुमार शर्मा ने भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत इसका मुआवजा 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया जबकि यह अधिनियम एक जनवरी 2015 से लागू हुआ था। यानी दस गुने से भी ज्यादा मुआवजा दिया गया। रनवीर सिंह की जमीन के मामले में 1235.18 की दर को आर्बिट्रेशन में बढ़ाकर 5577 रुपये किया गया।
कार्रवाई की संस्तुति- समुचित कार्रवाई की जाए
5. पूर्व डीएम निधि केसरवानी- गांव नाहल के मामलों में तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी ने 1235 रुपये की दर को आर्बिट्रेशन में बढ़ाकर 6515 एवं 5577 रुपये किया। इसके अलावा इसकी शिकायतों की जांच की इन्होंने खुद ही पर तत्कालीन सीडीओ कृष्णा करुणेश, एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य, एसएसपी तथा एसओ मसूरी की जांच आख्या को आधार बनाकर शिकायत को निराधार मानते हुए क्लीन चिट दे दी।

डॉ. प्रभात कुमार, आयुक्त मेरठ काा कहना है कि अधिकारियोें, कर्मचारियों, उनके रिश्तदारों तथा स्थानीय दलालों आदि ने पूरा गैंग बनाकर एक्सप्रेस वे के लिए की गई जमीन के अधिग्रहण में भारी घोटाला किया है। तैनात रहे दो डीएम, एडीएम एल से लेकर अमीन, उनके परिवार के सदस्य सभी की संलिप्तता सामने आ रही है। शासन को इस बाबत रिपोर्ट प्रेषित कर दी है।

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