मुकद्दस रमजान : रोजेदार के लिए समुंदर की मछलियां भी करती हैं दुआएं
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रमजान मुबारक महीने का पहला अशरा जारी है, इस मुबारक महीने में जो शख्स रोजे रखता है उसके सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। स्थानीय उलेमा एवं मुस्लिम बुद्घीजीवी बताते हैं कि अल्लाह ने इस्लामी महीनों में रजब, शाबान, मोहर्रम और माह रमजान को पसंद फरमाया और इनमें माह रमजान को खास किया। गोला कुआं क्षेत्र की दरियागंज मस्जिद के इमाम मौलाना जिब्राईल ने हदीस के हवाले से बताया कि नबी हजरत मोहम्मद सल. ने शाबान महीने के आखिरी दिनों में लोगों को हिदायत दी कि एक महीना आ रहा है जो बहुत बड़ा और मुबारक महीना है। अल्लाह ने इस मुबारक महीने के रोजो को फर्ज फरमाया।
कुरान इल्म का बहुत बड़ा जखीरा
कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया कि रमजान के महीने में कुराने करीम नाजिल हुआ, जिसकी वजह से इस मुबारक महीने में कुरान की तिलावत करना बहुत अफजल अमल है। तरावीह की नमाज में कुरान सुनना और पढ़ना बहुत बड़े सवाब का काम है। कुराने करीम दुनिया में हिदायत और इल्म लेकर आया इसलिये कुरान इल्म का बहुत बड़ा जखीरा है।
अल्लाह रदद नहीं करता रोजेदार की दुआ
हाजी मो. इकबाल अंसारी ने बताया कि इस मुबारक महीने में खूब दुआएं मांगनी चाहिए। क्योंकि अल्लाह रोजेदार की दुआ रद्द नहीं करता। इस महीने में झूठ बोलना, गाली देना, गाना सुनना, किसी का दिल दुखाना, किसी का हक दबाना, धोखा देना आदि बुराइयों को अपनाना बहुत बड़ा गुनाह है।
लोगों के साथ हमदर्दी करनी चाहिए
हाजी ताज मो. अलवी ने बताया कि रमजान का महीना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत है। इस महीने में लोगों के साथ हमदर्दी करनी चाहिए। जो शख्स इस महीने में रोजेदार का रोजा इफ्तार कराएगा उसके तमाम गुनाह माफ हो जाएंगे।
समुंदर की मछलियां भी दुआएं करती हैं
मदरसा दारूल उलूम के उस्ताद मौलाना खुर्शीद ने बताया कि इस मुबारक महीने के पहले दस दिन रहमत के, बीच के दस दिन मगफिरत के और आखिर के दस दिन जहेन्नुम (नर्क) से आजादी के हैं। उन्होंने बताया कि रोजेदार के लिये समुंदर की मछलियां भी दुआएं करती हैं।