आयकर के शिकंजे में सिंचाई विभाग के धनकुबेर, एक क्लिक में पढ़ें पूरी खबर
सिंचाई विभाग के धनकुबेर ठेकेदार पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। लगभग 24 घंटे चली कार्रवाई में अजय कुमार की कोठी से नगदी, जेवरात के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए।
सिंचाई विभाग के धनकुबेर ठेकेदार पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। शुक्रवार को मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और मुजफ्फरनगर में आयकर विभाग की 10 टीमों ने ठेकेदार अजय कुमार, उसके परिजनों के आफिसों, आवासों के साथ ही अजय के करीबी रहे सिंचाई विभाग के कई मुख्य अभियंताओं और अभियंताओं के यहां छापेमारी की। अजय कुमार के मूल गांव जमालपुर स्थित आवास और मेरठ के गंगानगर स्थित कोठी पर आयकर विभाग की टीम देर रात तक जमी रही। इस दौरान तमाम दस्तावेज टीम ने अपने कब्जे में लिये। इन आवासों से बड़ी संपत्तियों, नगदी, ज्वैलरी आदि के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को आयकर विभाग की टीम ने अपने कब्जे में लिया है।
मूल रूप से मुजफ्फरनगर के ग्राम जमालपुर निवासी अजय कुमार सिंचाई विभाग में ठेकेदारी करते हैं। उनकी दो कंपनी अजय कुमार और अजय कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ ही उनके पिता और दो भाइयों की भी कंस्ट्रक्शन कंपनी है। अजय कुमार इस समय गंगानगर स्थित कृष्णा गार्डन कालोनी स्थित आलीशान कोठी में रहते हैं। नोटबंदी के दौरान अजय कुमार द्वारा शामली में चल रहे निर्माण कार्य स्थल पर करीब 300 करोड़ रुपये की डस्ट व रोडी आदि का स्टॉक किया गया था।
10 टीमें गठित कर छापेमारी की
आयकर विभाग ने तमाम चैनल पर काम करने के बाद शुक्रवार को एक साथ 10 टीमें गठित कर छापेमारी की। जिसमें ग्राम जमालपुर के आवास, मवाना रोड पर गंगानगर थाने के सामने स्थित कार्यालय, कृष्णा गार्डन कालोनी स्थित कोठी, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सुधीर कुमार शर्मा के बाउंड्री रोड स्थित सरकारी आवास बंगला नं ए-2, मुख्य अभियंता के कार्यालय, अजय कुमार के नोएडा, गाजियाबाद स्थित कार्यालयों के अलावा सिंचाई विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता के आवास व कार्यालय सहित दस जगह छापे मारे।
अजय कुमार की कृष्णा गार्डन स्थित कोठी पर आयकर विभाग की टीम ने सुबह 7.30 बजे छापा मारा। टीम के कुछ अधिकारी आवास पर ही रूक गये और कुछ अधिकारी अजय कुमार को उनके मवाना रोड स्थित कार्यालय ले गये। जहां से टीम ने तमाम दस्तावेज इकट्ठा किया। टीम तमाम दस्तावेज लेकर अजय कुमार के आवास पर आ गयी। इसके बाद रात तक आयकर विभाग के अधिकारियों का अजय कुमार के घर आना जाना लगा रहा। इस दौरान दोपहर को करीब 3.30 बजे भी एक टीम कुछ फाइलें लेकर अजय कुमार के घर में गयी।
जैन के बाद अजय
अजय कुमार के कृष्णा गार्डन कोठी के अलावा जमालपुर स्थित आवास से आयकर विभाग को बड़ी संपत्तियों के कागजात मिलने की बात कही जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इन संपत्तियों की कीमत कई सौ करोड़ है। इसके अलावा बैंक खाते और लॉकर भी आयकर विभाग ने अपने कब्जे में ले लिये हैं। वहीं घर की तलाशी भी हो रही है। जिसमें नगदी के अलावा बैंक खातों में जमा धन के अलावा लॉकर में भी बड़ी मात्रा में नगदी व ज्वैलरी होने की संभावना जताई जा रही है। आयकर विभाग की टीम को छापे में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। चर्चा है कि इन दस्तावेजों से कई सफेदपोश नेता और वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके जैन के यहां नोटबंदी के बाद जनवरी में आयकर विभाग ने छापा मारा था। जिसमें ईव्ज चौराहा स्थित पीएनबी में उनके लॉकर से 2.67 करोड़ रुपये की नगदी व 30 किलो चांदी की ईंटें बरामद हुई थी। आरके जैन के यहां जब छापा मारा तो अफसरों और ठेकेदारों में अजय चौधरी के नाम को लेकर चर्चा थी। सूत्रों की मानें तो आरके जैन को भी अजय चौधरी पर शक था। इस दौरान जब आयकर विभाग की विजीलेंस टीम ने आरके जैन से पूछताछ की तो उन्होंने अजय चौधरी के भी कारनामों का चिट्ठा खोल दिया। इसके बाद अजय चौधरी आयकर विभाग के निशाने पर आ गया और विजिलेंस टीम ने उसका पूरा रिकार्ड इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
300 करोड़ की रोड़ी, डस्ट का स्टॉक बना कार्रवाई का आधार
आयकर विभाग ने अजय चौधरी को अधिशासी अभियंता आरके जैन के यहां मारे गये छापे के बाद निशाने पर लिया। इसके बाद अजय चौधरी के खिलाफ लगातार टीम जांच करते हुए साक्ष्य जुटाती रही। जिसमें शामली की साइट पर इकट्ठा किया गया करीब 300 करोड़ की रोडी डस्ट के स्टॉक के साथ इसके बाद हुए लगातार भुगतान के सिलसिलों ने आयकर विभाग के कान खड़े कर दिये। यह स्टॉक ही अजय चौधरी के खिलाफ कार्रवाई का बड़ा आधार बना, जिसमें आयकर विभाग की नजर में कई अभियंताओं सहित नेता और अधिकारी भी आये।
लगातार भुगतान से संदेह हुआ मजबूत
नोट बंदी के बाद अजय चौधरी के कामों का लगातार प्राथमिकता पर भुगतान होने लगा। ऐसे में आयकर विभाग का संदेह और ज्यादा पुख्ता हुआ। वहीं आयकर विभाग को भी यह भी शक हुआ कि कहीं अजय चौधरी के कामों में विभागीय अधिकारियों की तो पार्टनरशिप नहीं है। क्योंकि सिंचाई विभाग के अधिकांश काम अजय चौधरी और उसके करीबियों के पास थे। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की हिस्सेदारी के सबूत आयकर विभाग ने जुटाने का प्रयास किया, लेकिन इस संबंध में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले।
संपत्ति के साथ जुटाये संसाधन
नवंबर में केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी का ऐलान होते ही अजय चौधरी की शामली की साइट पर करीब 300 करोड़ रूपये की डस्ट व रोडी का स्टॉक किया गया। बताया जाता है कि यह स्टॉक नोट बंदी के दौरान काले धन को खपाने के लिए किया गया। इसमें आयकर विभाग को यह भी इनपुट मिला कि कुछ अभियंताओं और अधिकारियों के रुपयों को बदलने के लिए इस स्टॉक में लगाया गया है। जिसका भुगतान अजय चौधरी बाद में अपने कामों के भुगतान होने के साथ समय-समय पर करता रहा।
अजय चौधरी ने एक तरफ जहां अपने काम को गति देने के लिए आधुनिक मशीनों से युक्त संसाधन जुटाये तो संपत्ति भी जुटायी। सिंचाई विभाग के निर्माण और विकास कार्यों के लिए उसकी कंपनी के पास करोड़ों रुपये की महंगी विदेशी आधुनिक मशीनों का पूरा बेड़ा मौजूद है। कई जगह मंहगे और बड़े प्लाट के साथ ऑफिस और आलीशान कोठियां, महंगी गाड़ियां आदि हैं। विदेश की सैर की और कराई भी अजय चौधरी की फेसबुक से साफ नजर आता है कि उसने खूब विदेश यात्रा की और व्यवस्था अपने खर्च से करता रहा है।
अकूत संपत्ति के साथ ही शासन में बनायी पकड़
सिंचाई विभाग के ठेकेदार अजय चौधरी यूं तो ठेकेदारों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों में पिछले चार साल से चर्चा में है। लेकिन अब उसके सफर और अंदाज को लेकर चर्चाएं तेज है। अजय चौधरी ने पिछले चार साल में सत्ता और शासन में पकड़ मजबूत बनाते हुए अकूत संपत्ति भी अर्जित की। उसने अपने काम के लिए हर हथकंडा अपनाया। अजय चौधरी की उम्र मात्र 38 वर्ष है। सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार ठेकेदारी में सक्रिय तौर पर आये हुए अजय चौधरी को लगभग 15 साल हुए हैं। लेकिन इन सालों में उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस समय हालात ये थे कि वह अभियंताओं को धमका कर ठेका लेता था और भुगतान भी अपनी हनक पर कराता था।पश्चिमी क्षेत्र ही नहीं पूर्वांचल के भी कई बड़े काम अजय चौधरी ने हासिल किये।
प्रभाव और पकड़ की मजबूत
कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से भी अजय चौधरी की गहरी घनिष्ठता रही। इसी दम पर वह सिंचाई विभाग के ठेके लेता रहा और कमाई करता रहा। उसने अपना प्रभाव इस कदर मजबूत कर लिया था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ ठेकेदार तो उत्तराखंड में जाकर ठेकेदारी करने को मजबूर हो गये। अजय चौधरी ने अपनी फेसबुक पर भी अपने इन संबंधों को लगतार पोस्ट के जरिये प्रदर्शित किया। उसके मंत्री, प्रशासनिक अधिकारियों, बड़ी चर्चित हस्तियों के साथ फोटो नजर आते हैं।
अजय ने रिश्तेदारों को भी बना दिया था ठेकेदार
अजय चौधरी ने सिंचाई विभाग पर कब्जा करने के लिए अपना पूरा सिंडिकेट तैयार किया। जिसमें बाहरी लोगों के लिए कोई जगह नहीं थी। उसके पिता राजवीर चौधरी ने अपने दोनों भाइयों का भी रजिस्ट्रेशन करा लिया। अजय चौधरी के साथ काम करने वाले ठेकेदारों के अनुसार अजय चौधरी ने पिछले दस सालों में सिंचाई विभाग के कामों पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगभग एक तरफा कब्जा कर लिया था। इसके लिए उसने जहां अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी बनायी तो अपने रिश्तेदारों के रजिस्ट्रेशन भी सिंचाई विभाग की ठेकेदारी में करा दिये। अजय जिसके नाम पर टेंडर लेना चाहता था, वह फाइनल करा देता था। स्थानीय ठेकेदारों को सिर्फ एक - दो करोड़ रुपये से नीचे के काम ही मिल पाते थे।
इसी माह सेवानिवृत्त होंगे मुख्य अभियंता गंगा
मुख्य अभियंता गंगा के आवास पर दिन निकलते ही आयकर विभाग की छापेमारी शुरू हो गयी। जिससे पूरे सिंचाई विभाग के अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया। विभागीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि सिंचाई विभाग गंगा के मुख्य अभियंता सुधीर कुमार शर्मा लगभग दो साल से मेरठ में इसी पद पर तैनात हैं। हाल ही में इन्हें नहर पश्चिम का भी मुख्य अभियंता का अतिरिक्त चार्ज दिया गया। विभागीय लोगों ने बताया कि मुख्य अभियंता इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अगले माह के प्रथम सप्ताह में इनकी बेटी की शादी है। मुख्य अभियंता के सेवानिवृत्त होने से कुछ ही दिन पहले इनकम टैक्स की छापेमारी को लेकर विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी अफसोस भी जताते नजर आए।
सुधीर शर्मा के आवास से मिले टेंडर के कागज
विभागीय सूत्रों के अनुसार मुख्य अभियंता सुधीर शर्मा के मेरठ स्थित सरकारी आवास से आयकर विभाग की टीम को अजय कुमार की कंपनियों के साथ ही उनके सहयोगियों के कंपनियों के टेंडरों की फाइलों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा।
अजय ने रिश्तेदारों को भी बना दिया था ठेकेदार
अजय चौधरी ने सिंचाई विभाग पर कब्जा करने के लिए अपना पूरा सिंडिकेट तैयार किया। जिसमें बाहरी लोगों के लिए कोई जगह नहीं थी। उसके पिता राजवीर चौधरी ने अपने दोनों भाइयों का भी रजिस्ट्रेशन करा लिया। अजय चौधरी के साथ काम करने वाले ठेकेदारों के अनुसार अजय चौधरी ने पिछले दस सालों में सिंचाई विभाग के कामों पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगभग एक तरफा कब्जा कर लिया था। इसके लिए उसने जहां अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी बनायी तो अपने रिश्तेदारों के रजिस्ट्रेशन भी सिंचाई विभाग की ठेकेदारी में करा दिये। अजय जिसके नाम पर टेंडर लेना चाहता था, वह फाइनल करा देता था। स्थानीय ठेकेदारों को सिर्फ एक - दो करोड़ रुपये से नीचे के काम ही मिल पाते थे।
अजय की मर्जी से तैयार होते थे टेंडर
सिंचाई विभाग की ठेकेदारी में अजय कुमार का एक तरफा प्रभाव कायम था। विभाग के छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदारों की मानें तो अजय कुमार की मर्जी से ही सिंचाई विभाग के टेंडर तैयार होकर निकलते थे। यही नहीं विभाग के पांच करोड़ से ऊपर के अधिकांश बड़े काम अजय कुमार या उसकी सहयोगी कंपनियों को ही जाते थे।
अजय चौधरी के पिता राजवीर सिंह सिंचाई विभाग में ठेकेदारी करते थे। उनकी ठेकेदारी अधिकांश बिजनौर जनपद में थी। लेकिन जब बेटे अजय, विनीत और विजय बड़े हुए तो उन्होंने भी ठेकेदारी में कदम रखा और अपने रजिस्ट्रेशन करा लिये। इसके बाद इन लोगों ने अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी बनायी। यह कंपनी आज यूपी में ए श्रेणी की कंपनी में शुमार है। अजय चौधरी ने 2002 में सपा की सरकार में अपने काम को बढ़ाना शुरू किया। बसपा सरकार में भी अजय चौधरी ने सिंचाई विभाग के बड़े काम लिये। लेकिन बिजनौर में एक काम को लेकर उसके खिलाफ जांच बैठ गयी। जिसमें दो इंजीनियर जहां सस्पेंड हुए तो अजय के खिलाफ भी रिकवरी तय हो गयी।
इसके बाद सपा सरकार आयी तो अजय चौधरी ने सपा सरकार के एक कद्दावर मंत्री से करीबी बना ली। इस करीबी का फायदा यह हुआ कि अजय चौधरी अपनी मर्जी टेंडर तैयार कराता था। छोटे छोटे कामों को भी एक काम का रूप दिया जाता था, उसका एक ही टेंडर निकाला जाता था। जिसमें अजय की कंपनी के अलावा वह स्वयं, उसके भाई और रिश्तेदार टेंडर डालते थे। लखनऊ से ही इन टेंडरों को लेकर दिशा निर्देश मिलता था। सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार पांच करोड़ से ऊपर के अधिकांश काम अजय चौधरी या उसके सिंडिकेट के खाते में जाते थे। जनपद मुख्यालयों से सिर्फ टेंडरों की औपचारिकता ही पूरी होती थी।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/