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रात गहराते ही अवैध खनन, एनजीटी के आदेश हवा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2017 02:05 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी सरकार ने कैबिनेट बैठक में जो फैसले लिए हैं, उनमें अवैध खनन भी शामिल है। मेरठ में बड़े पैमाने पर मिट्टी और रेत का अवैध खनन हो रहा है। एनजीटी के आदेशों को पूरी तरह हवा में उड़ाते खनन माफिया पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग तीनों से सेटिंग कर धड़ल्ले से अपना काम कर रहे हैं।
गंगा से निकाला जा रहा धड़ल्ले से रेत
मवाना तहसील क्षेत्र अंतर्गत गंगा का क्षेत्र आता है। यहां रात गहराते ही रेत खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं। हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़ और किठौर थाना क्षेत्रों से गुजरने वाली गंगा नदी में पुलिस और तहसील प्रशासन से साठगांठ कर सभी जगह बड़ा खनन हो रहा है। रात में ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ डंपर गंगा किनारे पहुंच जाते हैं और सुबह तक रेत ढुलाई का काम चलता है। इन रेत माफियाओं ने कई जगह गोदाम भी बनाए हुए हैं, जहां ये खनन करके लाए गए रेत का स्टॉक करते हैं और बाद में इसे दुकानदारों के साथ ही सीधे ग्राहकों को बेच दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो हर माह करीब पचास लाख रुपये की वसूली प्रशासन और पुलिस के बीच बंटती है।
मिट्टी खनन में जमकर खेल
मिट्टी खनन को लेकर ‘अमर उजाला’ कई बार स्टिंग कर प्रकाशित कर चुका है। लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद ही संबंधित जगह पर प्रशासन हरकत में आता है, इसके बाद सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। मिट्टी खनन करने वाले भी रात दस बजे से तड़के तीन बजे तक खनन करते हैं। जेसीबी से होने वाले खनन में पूरी रात डंपर भरकर मिट्टी बड़े प्लाटों में बनाए गए गोदामों या संबंधित जगह जहां पर भराव का ठेका लिया होता है, वहां पर डाल दी जाती है। ऐसा ही मिट्टी का एक बड़ा गोदाम नूरनगर के खाली प्लाट में बना हुआ है। जहां पर पूरी रात मिट्टी के डंपर भरकर आते रहते हैं और दिन में बुग्गी आदि से यह मिट्टी भराव के लिए जाती रहती है।
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भट्ठों पर भी नहीं लगा अंकुश
ईंट भट्ठों को पर्यावरण विभाग की एनओसी लेने के बाद ही संचालन का आदेश एनजीटी ने दिया हुआ है। जिले में सिर्फ दो ईंट भट्ठे ही यह एनओसी ले पाए हैं। बावजूद इसके सैकड़ों ईंट भट्ठे संचालित हैं और धड़ल्ले से पांच फुट तक मिट्टी खनन कर ईंट पाथ रहे हैं।
सरकार सख्त हुई तो रुकेगा खनन
यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में अवैध खनन रोकने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनी है, जो एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। ऐसे में यदि सरकार ने अवैध खनन पर रुख कड़ा किया तो मेरठ में खनन रुक सकता है। लेकिन हर माह खनन से लाखों कमाई करने वाले अधिकारी इस पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे, इसे लेकर संदेह है।
कमेटी के सामने रखूंगा मुद्दा
खनन मामले पर हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक का कहना है कि उनका क्षेत्र गंगा खादर में आता है। जहां पर पिछले कई सालों से गंगा में जमकर रेत खनन हो रहा है। इसमें पुलिस और प्रशासन दोनों की संलिप्तता है। मैं इस खनन की पूरी रिपोर्ट तीनों मंत्रियों की कमेटी को दूंगा।
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गंगा से निकाला जा रहा धड़ल्ले से रेत
मवाना तहसील क्षेत्र अंतर्गत गंगा का क्षेत्र आता है। यहां रात गहराते ही रेत खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं। हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़ और किठौर थाना क्षेत्रों से गुजरने वाली गंगा नदी में पुलिस और तहसील प्रशासन से साठगांठ कर सभी जगह बड़ा खनन हो रहा है। रात में ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ डंपर गंगा किनारे पहुंच जाते हैं और सुबह तक रेत ढुलाई का काम चलता है। इन रेत माफियाओं ने कई जगह गोदाम भी बनाए हुए हैं, जहां ये खनन करके लाए गए रेत का स्टॉक करते हैं और बाद में इसे दुकानदारों के साथ ही सीधे ग्राहकों को बेच दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो हर माह करीब पचास लाख रुपये की वसूली प्रशासन और पुलिस के बीच बंटती है।
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मिट्टी खनन में जमकर खेल
मिट्टी खनन को लेकर ‘अमर उजाला’ कई बार स्टिंग कर प्रकाशित कर चुका है। लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद ही संबंधित जगह पर प्रशासन हरकत में आता है, इसके बाद सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। मिट्टी खनन करने वाले भी रात दस बजे से तड़के तीन बजे तक खनन करते हैं। जेसीबी से होने वाले खनन में पूरी रात डंपर भरकर मिट्टी बड़े प्लाटों में बनाए गए गोदामों या संबंधित जगह जहां पर भराव का ठेका लिया होता है, वहां पर डाल दी जाती है। ऐसा ही मिट्टी का एक बड़ा गोदाम नूरनगर के खाली प्लाट में बना हुआ है। जहां पर पूरी रात मिट्टी के डंपर भरकर आते रहते हैं और दिन में बुग्गी आदि से यह मिट्टी भराव के लिए जाती रहती है।
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भट्ठों पर भी नहीं लगा अंकुश
ईंट भट्ठों को पर्यावरण विभाग की एनओसी लेने के बाद ही संचालन का आदेश एनजीटी ने दिया हुआ है। जिले में सिर्फ दो ईंट भट्ठे ही यह एनओसी ले पाए हैं। बावजूद इसके सैकड़ों ईंट भट्ठे संचालित हैं और धड़ल्ले से पांच फुट तक मिट्टी खनन कर ईंट पाथ रहे हैं।
सरकार सख्त हुई तो रुकेगा खनन
यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में अवैध खनन रोकने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनी है, जो एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। ऐसे में यदि सरकार ने अवैध खनन पर रुख कड़ा किया तो मेरठ में खनन रुक सकता है। लेकिन हर माह खनन से लाखों कमाई करने वाले अधिकारी इस पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे, इसे लेकर संदेह है।
कमेटी के सामने रखूंगा मुद्दा
खनन मामले पर हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक का कहना है कि उनका क्षेत्र गंगा खादर में आता है। जहां पर पिछले कई सालों से गंगा में जमकर रेत खनन हो रहा है। इसमें पुलिस और प्रशासन दोनों की संलिप्तता है। मैं इस खनन की पूरी रिपोर्ट तीनों मंत्रियों की कमेटी को दूंगा।