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भारतीय संस्कृति को समझना है तो संस्कृत पढ़ो : श्रीरामभद्राचार्य
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मेरठ..कंवलजीत..विक्टोरिया पार्क में चल रही रामकथा सुनाते रामभद्राचार्य महाराज व कथा सुनते श्रद्
- विक्टोरिया पार्क में भजन, प्रवचन के साथ हुई श्रीराम कथा
- सभी को किया गया संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। विक्टोरिया पार्क में मंगलवार को आयोजित श्रीराम कथा में जगद्गुरु स्वामी श्रीराम भद्राचार्य महाराज ने कहा कि आजकल ठुमका लगाया और कथा हो गई। आजकल कई कथाओं में नाच होता है। मैं श्रीराम की शुद्ध कथा ही करता हूं। उन्होंने कहा कि मन में निष्ठा भाव होगा तो श्रीराम को प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय संस्कृति को समझना है तो संस्कृत पढ़ो।
विक्टोरिया पार्क में मंत्रोचारण के साथ कथा आरंभ हुई। चरण पादुका पूजन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर मां लाडलीनंद सरस्वती महाराज के साथ दीपक गुप्ता परिवार ने किया। सीता राम की जय जयकार के साथ भजन सीता राम, जय सीता राम, तुलसी सीता राम कहो महाराज ने कथा आरंभ की। उन्होंने राम जैसा न स्वाभाव देखा और न ही सुना है। राम पर विश्वास रखो सब मंगल ही मंगल होगा।
श्रीराम भद्राचार्य महाराज ने श्रीराम चरित मानस में 62 वें श्लोक का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत बिना जाने कोई भारतीय विद्वान नहीं हो सकता है। भारतीय संस्कृति का उपदेश देने वालों को संस्कृत का ज्ञान होना चाहिए। नेपाल में आग लगी है। भारत आज है, कल था और आगे भी मजबूती से खड़ा रहेगा। किसी को परिवार, किसी को धन तो किसी को अपने बल का स्वाभिमान है। हमें तो अपने गुरु, भारतीय संस्कृति और संस्कृत का स्वाभिमान है।
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- देश में पूर्ण रूप से गाेवध बंद करें
ऐतिहासिक नगरी मेरठ के विषय में उन्होंने कहा कि यहां से स्वतंत्रता का शंखनाद हुआ। चर्बी युक्त कारतूस को लेकर विद्रोह किया गया। देश से गोवध पूर्ण रूप से बंद होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि अपना घर अपना ही होता है। नमक रोटी खाकर भी स्वाभिमान से इंसान जीता है। ऐसे में गोवध को रोकना आवश्यक है।
मैं सेवक रघुपति का हमारे देश जैसा कोई नहीं
श्रीराम भद्राचार्य ने कथा के मध्य में भजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि मैं सेवक रघुपति हमारे देश जैसा कोई देश नहीं है। राम जैसा कोई भगवान नहीं। कथा के मध्य में मामूली से व्यावधान आने के बाद उन्होंने कहा कि मंगल भवन अमंगल हारी। सबको मंगल ही देते रहते हैं श्रीराम। उन्होंने कहा कि श्राद्ध पक्ष तो कौएं की पूंछ होती है। चांडाल पक्षी को भी श्रीराम ने जीवन दान दिया।
मेरे राम जैसा कृपालु कोई नहीं
कथा में भजन सुनाते हुए भावुक होकर उन्होंने कहा कि मेरे राम जैसा कृपालु कोई नहीं, राम जैसा दयालु कोई नहीं। उन्होंने कहा राम ने अहिल्या तारी। उन्होंने कहा कि शबरी को महतारी कहकर झूठा फल खाया। पवन तनय को सुत कहा और करुणा अमृत बरसाया।
घर में मंगलवार को करें सुंदरकांड पाठ
श्रीराम भद्राचार्य ने कहा कि घर में मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें। न तो कोई संकट आएगा। चकाचक हो जाओगे। उन्होंने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों के विषय में सुंदर व्याख्यान किया। बुद्ध ने वेद और वैदिक धर्म का प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भगवान वेद और वेद अनुकूल चलने वालों की रक्षा करते हैं। गायत्री मंत्र की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का साकार रूप है।
भगवान को निराकार कहने वाले वेद मंत्र पढ़ें
भगवान आकार में आकर हमें प्रेरणा देते हैं। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। महाराज जी ने कहा कि जो भगवान को निराकार कहते हैं वह वेद के मंत्र को पढ़े। भगवान ने संसार की उत्पत्ति की। चार विभूति के साथ भगवान श्रीराम रूप में आए। उन्होंने दावे के साथ कहा कि नासा ने माना है कि सूर्य में से ओम ध्वनि निकलती है। उन्होंने शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्षक मिशन के विषय में भी बताया।
कौशल्या की गोद में सोए रघुनंदन
कथा के मध्य महाराज श्री ने कौशल्या की गोद में सोए रघुनंदन बबुआ गीत सुनाकर सभी को सम्मोहित कर दिया। उन्होंने कहा कि हम वेदों से दूर जा रहे। गायत्री मंत्र के अर्थ को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान पर भरोसा रखो लेकिन बिना काम किए रोटी नहीं मिलेगी। दूसरों के लिए कर्म करते रहो। पलंग मत तोड़ो। जब कर्म करोगे तो भगवान स्वयं तुम्हारे लिए आकर खड़े हो जाएंगे।
भगवान के स्वरूप का किया वर्णन
श्रीराम चंद्र कृपालु भजन गाते हुए उन्होंने भगवान के युवा स्वरूप का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कि जो हार जाता है उसे हार पहनने का अधिकार नहीं होता है। महा मृत्युंजय मंत्र का जाप का भी महत्व बताया।
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- सभी को किया गया संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। विक्टोरिया पार्क में मंगलवार को आयोजित श्रीराम कथा में जगद्गुरु स्वामी श्रीराम भद्राचार्य महाराज ने कहा कि आजकल ठुमका लगाया और कथा हो गई। आजकल कई कथाओं में नाच होता है। मैं श्रीराम की शुद्ध कथा ही करता हूं। उन्होंने कहा कि मन में निष्ठा भाव होगा तो श्रीराम को प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय संस्कृति को समझना है तो संस्कृत पढ़ो।
विक्टोरिया पार्क में मंत्रोचारण के साथ कथा आरंभ हुई। चरण पादुका पूजन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर मां लाडलीनंद सरस्वती महाराज के साथ दीपक गुप्ता परिवार ने किया। सीता राम की जय जयकार के साथ भजन सीता राम, जय सीता राम, तुलसी सीता राम कहो महाराज ने कथा आरंभ की। उन्होंने राम जैसा न स्वाभाव देखा और न ही सुना है। राम पर विश्वास रखो सब मंगल ही मंगल होगा।
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श्रीराम भद्राचार्य महाराज ने श्रीराम चरित मानस में 62 वें श्लोक का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत बिना जाने कोई भारतीय विद्वान नहीं हो सकता है। भारतीय संस्कृति का उपदेश देने वालों को संस्कृत का ज्ञान होना चाहिए। नेपाल में आग लगी है। भारत आज है, कल था और आगे भी मजबूती से खड़ा रहेगा। किसी को परिवार, किसी को धन तो किसी को अपने बल का स्वाभिमान है। हमें तो अपने गुरु, भारतीय संस्कृति और संस्कृत का स्वाभिमान है।
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- देश में पूर्ण रूप से गाेवध बंद करें
ऐतिहासिक नगरी मेरठ के विषय में उन्होंने कहा कि यहां से स्वतंत्रता का शंखनाद हुआ। चर्बी युक्त कारतूस को लेकर विद्रोह किया गया। देश से गोवध पूर्ण रूप से बंद होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि अपना घर अपना ही होता है। नमक रोटी खाकर भी स्वाभिमान से इंसान जीता है। ऐसे में गोवध को रोकना आवश्यक है।
मैं सेवक रघुपति का हमारे देश जैसा कोई नहीं
श्रीराम भद्राचार्य ने कथा के मध्य में भजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि मैं सेवक रघुपति हमारे देश जैसा कोई देश नहीं है। राम जैसा कोई भगवान नहीं। कथा के मध्य में मामूली से व्यावधान आने के बाद उन्होंने कहा कि मंगल भवन अमंगल हारी। सबको मंगल ही देते रहते हैं श्रीराम। उन्होंने कहा कि श्राद्ध पक्ष तो कौएं की पूंछ होती है। चांडाल पक्षी को भी श्रीराम ने जीवन दान दिया।
मेरे राम जैसा कृपालु कोई नहीं
कथा में भजन सुनाते हुए भावुक होकर उन्होंने कहा कि मेरे राम जैसा कृपालु कोई नहीं, राम जैसा दयालु कोई नहीं। उन्होंने कहा राम ने अहिल्या तारी। उन्होंने कहा कि शबरी को महतारी कहकर झूठा फल खाया। पवन तनय को सुत कहा और करुणा अमृत बरसाया।
घर में मंगलवार को करें सुंदरकांड पाठ
श्रीराम भद्राचार्य ने कहा कि घर में मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें। न तो कोई संकट आएगा। चकाचक हो जाओगे। उन्होंने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों के विषय में सुंदर व्याख्यान किया। बुद्ध ने वेद और वैदिक धर्म का प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भगवान वेद और वेद अनुकूल चलने वालों की रक्षा करते हैं। गायत्री मंत्र की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का साकार रूप है।
भगवान को निराकार कहने वाले वेद मंत्र पढ़ें
भगवान आकार में आकर हमें प्रेरणा देते हैं। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। महाराज जी ने कहा कि जो भगवान को निराकार कहते हैं वह वेद के मंत्र को पढ़े। भगवान ने संसार की उत्पत्ति की। चार विभूति के साथ भगवान श्रीराम रूप में आए। उन्होंने दावे के साथ कहा कि नासा ने माना है कि सूर्य में से ओम ध्वनि निकलती है। उन्होंने शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्षक मिशन के विषय में भी बताया।
कौशल्या की गोद में सोए रघुनंदन
कथा के मध्य महाराज श्री ने कौशल्या की गोद में सोए रघुनंदन बबुआ गीत सुनाकर सभी को सम्मोहित कर दिया। उन्होंने कहा कि हम वेदों से दूर जा रहे। गायत्री मंत्र के अर्थ को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान पर भरोसा रखो लेकिन बिना काम किए रोटी नहीं मिलेगी। दूसरों के लिए कर्म करते रहो। पलंग मत तोड़ो। जब कर्म करोगे तो भगवान स्वयं तुम्हारे लिए आकर खड़े हो जाएंगे।
भगवान के स्वरूप का किया वर्णन
श्रीराम चंद्र कृपालु भजन गाते हुए उन्होंने भगवान के युवा स्वरूप का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कि जो हार जाता है उसे हार पहनने का अधिकार नहीं होता है। महा मृत्युंजय मंत्र का जाप का भी महत्व बताया।