{"_id":"63b5eafeace9885c04210a0c","slug":"if-you-eat-then-what-to-eat-attack-on-health-due-to-adulteration-meerut-news-mrt6205770107","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: खाएं तो खाएं क्या...मिलावट की मार से सेहत पर वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: खाएं तो खाएं क्या...मिलावट की मार से सेहत पर वार
विज्ञापन
खाएं तो खाएं क्या...मिलावट की मार से सेहत पर वार
मेरठ। आखिर खाएं तो क्या खाएं, बाजार में बिकने वाली शायद ही कोई खाने की चीज मिलावट से अछूती हो। बीते साल में एक अप्रैल से लेकर 31 दिसंबर तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लिए गए खाद्य पदार्थों के 806 नमूनों की रिपोर्ट आई, जिनमें से 391 नमूने जांच में फेल निकले हैं। इनमें 214 अधोमानक हैं, 71 असुरक्षित हैं, 76 मिथ्याछाप और 30 नियमों के विपरीत हैं।
ये नमूने पनीर, दूध, तेल, मिर्च, नमकीन, हल्दी, केक, मावा और मिठाइयों आदि के हैं। हल्दी में मेटानिल येलो केमिकल की मिलावट निकली है तो मिठाइयों को चमकाने के लिए ज्यादा मात्रा में फूड कलर मिलाए गए। सरसों के तेल में पाम आयल निकला है। मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक कोर्ट ने पांच करोड़ 56 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। हालांकि मिलावटखोर फिर भी सुधर नहीं रहे हैं। दरअसल, लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के कारण मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कस पाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है। सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है जबकि भारतीय दंड संहिता में मिलावटखोरों पर कड़ी सजा का प्रावधान है लेकिन मिलावट से संबंधित 90 फीसदी मामले प्रशासनिक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिस कारण वे न्यायालय की कार्रवाई से बच जाते हैं।
000
पांच सालों में वसूला गया जुर्माना
2022-23 : पांच करोड़ 56 लाख रुपये
2021-22 : 43 लाख 65 हजार रुपये
2020-21 : 41 लाख 33 हजार 500 रुपये
2019-20 : 70 लाख 88 हजार रुपये
2018-19 : 60 लाख 73 हजार रुपये
(नोट- साल 2022-23 के जुर्माने के आंकड़े अप्रैल से दिसंबर 2022 तक के हैं। यह साल मार्च 2023 में पूरा होगा।)
000
लगातार जारी है कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीमें लगातार सक्रिय रहती हैं। जो नमूने लिए जाते हैं, उन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा जाता है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है। जिन खाद्य पदार्थों में मिलावट साफ नजर आती है, उन्हें मौके पर भी नष्ट कराया जाता है।
विज्ञापन
- शिव कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
000
एसीजेएम कोर्ट में चलता है मुकदमा
जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाते हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलता है। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और तीन लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- दीपक सिंह, अभिहित अधिकारी
मिलावटी खाना सेहत के लिए नुकसानदेह
अखाद्य पदार्थों से बने खाद्य पदार्थ सेहत के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। मिलावटी खाने से किडनी और पेट संबंधी रोग हो सकते हैं। ऐसे खाने से दूर रहें। मिलावटी तेल और घी का दिल पर तेजी से असर होता है। धमनियों में चिकनाई जम जाती है। हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
- डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजिशियन
विज्ञापन
मेरठ। आखिर खाएं तो क्या खाएं, बाजार में बिकने वाली शायद ही कोई खाने की चीज मिलावट से अछूती हो। बीते साल में एक अप्रैल से लेकर 31 दिसंबर तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लिए गए खाद्य पदार्थों के 806 नमूनों की रिपोर्ट आई, जिनमें से 391 नमूने जांच में फेल निकले हैं। इनमें 214 अधोमानक हैं, 71 असुरक्षित हैं, 76 मिथ्याछाप और 30 नियमों के विपरीत हैं।
ये नमूने पनीर, दूध, तेल, मिर्च, नमकीन, हल्दी, केक, मावा और मिठाइयों आदि के हैं। हल्दी में मेटानिल येलो केमिकल की मिलावट निकली है तो मिठाइयों को चमकाने के लिए ज्यादा मात्रा में फूड कलर मिलाए गए। सरसों के तेल में पाम आयल निकला है। मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक कोर्ट ने पांच करोड़ 56 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। हालांकि मिलावटखोर फिर भी सुधर नहीं रहे हैं। दरअसल, लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के कारण मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कस पाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है। सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है जबकि भारतीय दंड संहिता में मिलावटखोरों पर कड़ी सजा का प्रावधान है लेकिन मिलावट से संबंधित 90 फीसदी मामले प्रशासनिक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिस कारण वे न्यायालय की कार्रवाई से बच जाते हैं।
विज्ञापन
000
पांच सालों में वसूला गया जुर्माना
2022-23 : पांच करोड़ 56 लाख रुपये
2021-22 : 43 लाख 65 हजार रुपये
2020-21 : 41 लाख 33 हजार 500 रुपये
2019-20 : 70 लाख 88 हजार रुपये
2018-19 : 60 लाख 73 हजार रुपये
(नोट- साल 2022-23 के जुर्माने के आंकड़े अप्रैल से दिसंबर 2022 तक के हैं। यह साल मार्च 2023 में पूरा होगा।)
000
लगातार जारी है कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीमें लगातार सक्रिय रहती हैं। जो नमूने लिए जाते हैं, उन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा जाता है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है। जिन खाद्य पदार्थों में मिलावट साफ नजर आती है, उन्हें मौके पर भी नष्ट कराया जाता है।
विज्ञापन
- शिव कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
000
एसीजेएम कोर्ट में चलता है मुकदमा
जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाते हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलता है। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और तीन लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- दीपक सिंह, अभिहित अधिकारी
मिलावटी खाना सेहत के लिए नुकसानदेह
अखाद्य पदार्थों से बने खाद्य पदार्थ सेहत के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। मिलावटी खाने से किडनी और पेट संबंधी रोग हो सकते हैं। ऐसे खाने से दूर रहें। मिलावटी तेल और घी का दिल पर तेजी से असर होता है। धमनियों में चिकनाई जम जाती है। हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
- डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजिशियन