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बिजनौर: जर्जर मकानों में रहने को मजबूर सैकड़ों परिवार,  योजना में भी नहीं बन सके जरूरतमंदों के आवास 

Wed, 26 Aug 2020 12:15 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 26 Aug 2020 12:15 AM IST
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Hundreds of families forced to live in dilapidated houses in Bijnor District
जर्जर मकान - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री आवास योजना ने बिजनौर जिले के खस्ताहाल मकानों की सूरत बदली तो है, लेकिन टपकते मकानों को अब तक पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है। अब भी जिले में सैकड़ों आवास ऐसे हैं जो लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। सिर पर पक्की छत न होने से अब भी सैकड़ों परिवार जर्जर आवासों में रहने को मजबूर हैं। 

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प्रधानमंत्री आवास योजना में नगरों में पिछले तीन सालों में 15742 और गांवों में 4018 मकान बन चुके हैं। टपकती कड़ी वाली छतों की जगह पक्की छतों ने ली। लेकिन अब भी खस्ताहाल मकानों से आजादी नहीं मिल पाई है। नगर पालिका, ग्राम पंचायतों में अब भी खस्ताहाल मकान देखे जा सकते हैं।
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हजारों परिवारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान बनाने को आर्थिक सहायता लेने के लिए आवेदन कर रखा है। लेकिन अभी कोविड 19 की वजह से उभरी परिस्थितियों की वजह से किस्त जारी नहीं हो पा रही है। तब तक परिवार ऐसे ही मकानों में रहने को मजबूर हैं।

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टपकती छतों को पॉलिथीन से ढक कर ही परिवार अपने आप को सुरक्षित मान लेते हैं। लेकिन बरसात के मौसम में ये मकान जान बचाने वाले नहीं जान लेने वाले साबित हो सकते हैं। घर के अंदर रहने वालों के ही नहीं पास से गुजरने वालों के लिए भी ये खतरे का सबब बन सकते हैं।

खस्ताहाल मकान लेते रहे हैं जान
जिले में भी मकान गिरने से जान जाना नई बात नहीं है। साल 2012 में तो एक स्कूल की छत गिरने से छह मासूमों की मौत हो गई थी व कई घायल हो गए थे। जिले भर में बरसात के मौसम में अब भी मकान गिरने के मामले सामने आते रहते हैं। जिला मुख्यालय पर मुख्य बाजार में दो कई दशक पुराने भवन हैं। यहां पर मार्केट बना हुआ है।

बिजनौर में लखोरी ईंट के बने गली मुहल्लों में भी कई मकान हैं। कई साल से नगरवासी इन भवनों के ध्वस्तीकरण की मांग कर रहे हैं। नगर पालिका इन भवनों की जांच के लिए पत्र पीडब्लूडी को भेज देती है। पीडब्लूडी ने जांच की या नहीं किसी को नहीं पता। लेकिन भवन आज भी वैसे ही खड़े हैं।

डीएम के यहां से जो शिकायत भेजी जाती हैं, उन पर जांच करा अपनी आख्या भेज देते हैं। - पीडब्लूडी के एक्सईएन सुनील सागर

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