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बिल नहीं चुकाया तो छुट्टी से किया इनकार : मुख्यमंत्री जी! लुट रही जनता, निजी अस्पतालों पर कसो शिकंजा

Sun, 16 May 2021 11:36 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 16 May 2021 11:36 AM IST
सार

अपर मुख्य सचिव ने सभी प्राइवेट कोविड संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए शुल्क संबंधी गाइडलाइन जारी की। इस आदेश को जारी एक वर्ष बीत चुका है। मेरठ में अब तक ऐसी व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है। 

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hospital denied to discharge the covid patient for not paying Bill in Meerut,Chief Minister, tighten the screws on private hospitals
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ शहर के निजी अस्पताल मरीजों से मनचाहे पैसे वसूल रहे हैं। एक दिन का एक लाख रुपये तक का बिल बनाया जा रहा है। लोगों ने अपनों की जिंदगी बचाने के लिए घर तक गिरवीं रख दिए हैं।
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रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ शहर में होंगे। लोगों को उनसे उम्मीद है कि इन प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगे। बेहतर इलाज भी मिल जाए और अपना आशियाना न बेचना पड़े। इस बीच सीएम ने आदेश दिया था कि प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों का खर्च सरकार उठाएगी, यह आदेश भी अभी जिले में लागू नहीं हुआ है। 
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दिल्ली में निजी चिकित्सालयों द्वारा चिकित्सा शुल्क के नाम पर अधिक राशि वसूलने के कारण सरकार ने नीति आयोग की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। समिति द्वारा जून 2020 के दूसरे पखवाड़े में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
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अपर मुख्य सचिव ने सभी प्राइवेट कोविड संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए शुल्क संबंधी गाइडलाइन जारी की। इस आदेश को जारी एक वर्ष बीत चुका है। मेरठ में अब तक ऐसी व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है।

जिला प्रशासन के सामने रखे मामले
संयुक्त व्यापार संघ के मंत्री सुधांशु महाराज ने बताया कि शास्त्री नगर के अस्पताल ने मरीज प्रमोद से आईसीयू के 15 हजार प्रतिदिन के वसूले। कुल 4.25 लाख का बिल बनाया गया।

रेमडेसिविर इंजेक्शन के 25 हजार रुपये लिए गए। गढ़ रोड गढ़ अड्डे के पास अस्पताल में मोदीनगर के सुनाहा गांव के प्रधान इरफान का 20 दिन का 5.33 लाख रुपये का बिल बनाया है। 11 दिन आईसीयू के प्रतिदिन के हिसाब से 22 हजार रुपये बताए गए। कमरे के लिए 20 हजार रुपये बताए गए। 

बिल नहीं चुकाया तो छुट्टी से किया इनकार
नौचंदी करीमनगर निवासी इरशाद को नौचंदी थाना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को छुट्टी का समय आया तो अस्पताल ने 7.32 लाख रुपये का बिल थमा दिया। बिल न देेने पर अस्पताल ने छुट्टी से इनकार कर दिया। सूचना पर युवा सेवा समिति के संस्थापक बदर अली अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने अफसरों से मदद मांगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

कोविड -19 अस्पताल के रूप में परिवर्तित ए श्रेणी के अस्पतालों के प्रतिदिन के रेट
अस्पताल की श्रेणी   मध्यम बीमारी  गंभीर बीमारी अति गंभीर बीमारी
एनएबीएच  आइसोलेटिड बेड पीपीई के साथ 10 हजार रुपये आईसीयू बिना वेंटिलेटर 15 हजार और दो हजार रुपये पीपीई के साथ आईसीयू वेंटिलेटर सहित 18 हजार और दो हजार रुपये पीपीई के साथ 
नॉन एनएबीएच  आइसोलेटिड बेड 8 हजार  और 1200 रुपये पीपीई   के साथ आईसीयू बिना वेंटिलेटर 13 हजार   रुपये और दो हजार रुपये पीपीई  के साथ  आईसीयू वेंटिलेटर के साथ 15 हजार रुपये और दो हजार रुपये पीपीई के साथ
       
(नोट: बी एवं सी श्रेणी के नगरों में स्थित सुपर स्पेशिलिटी के अस्पताल इन दरों का 80 प्रतिशत एवं 60 प्रतिशत शुल्क लेंगे)

शिकायत करें तीमारदार, होगी कार्रवाई 
अधिक बिल वसूलने की शिकायत जहां भी आ रही है, तत्काल उसकी जांच कराकर कार्रवाई कराई जा रही है। जिन मरीजों या तीमारदारों को लगता है कि बिल अधिक लिया गया है वह बिल की मूल प्रति के साथ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। - के. बालाजी, डीएम 

निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगे : महापौर
महापौर सुनीता वर्मा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर निजी अस्पतालों में इलाज के नाम अवैध वसूली और अन्य तरह की मनमानी पर अंकुश लगाने की मांग की। उन्होंने संक्रमण पर नियंत्रण के लिए निशुल्क दवाई, इंजेक्शन, ऑक्सीमीटर, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, थर्मल स्कैनर, थर्मामीटर आदि मुहैया कराने की भी मांग की।
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