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होम आइसोलेशन में बिगड़ रही मरीजों की हालत, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पड़ रही मरीजों पर भारी
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होम आइसोलेशन में बिगड़ रही मरीजों की हालत, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पड़ रही मरीजों पर भारी
मेरठ। एक तरफ जहंा कोरोना संक्रमित मरीज मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट नहीं होना चाह रहे हैं वहीं अन्य कोविड अस्पताल में र्र्कई-कई घंटों के इंतजार और सिफारिश के बाद भर्ती किया जा रहा है। वहीं अब होम आइसोलेशन भी मरीजों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण होम आइसोलेट मरीजों की तबीयत बिगड़ रही है। पिछले पांच दिन में होम आइसोलेट हुए 20 मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अलग-अलग कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मेरठ में बृहस्पतिवार शाम तक कोरोना के 600 मरीज होम आइसोलेट थे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बिना लक्षण वाले वह कोरोना संक्रमित मरीज जिनको कोई दूसरी बीमारी नहीं है वह होम आइसोलेशन में रह सकेंगे। हालांकि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की अनुमति जरूरी है। वहीं सिर्फ वहीं मरीज होम आइसोलेट हो सकेंगा जिसके घर पर कम से कम दो शौचालय हों और खुद के लिए अलग कमरे हों। वहीं मरीज को अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप में दिन में दो बार अपने स्वास्थ्य की जानकारी देनी होगी। साथ ही मरीज को जिला सर्विलांस अधिकारी या स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी को भी स्वास्थ्य की जानकारी देनी होगी। स्वास्थ्य विभाग को सरकार के निर्देश हैं कि डॉक्टर को होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी लेनी होगी, लेकिन देखने में आ रहा है कि इनमें से ज्यादातर निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। इसी लापरवाही के कारण मरीजों की तबीयत बिगड़ रही है। वहीं कुछ मरीज भी गलत जानकारी देकर होम आइसोलेट हो रहे हैं।
अस्पताल में भर्ती होने के लिए मशक्कत
तीन दिन पहले ही होम आइसोलेशन मे रह रहे परतापुर थाने के दरोगा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एसपी सिटी से लेकर एडीएम तक सिफारिश करते रहे। करीब आठ घंटे इंतजार के बाद उन्हें निजी अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती किया गया। इसी तरह गंगानगर निवासी 60 वर्षीय महिला होम आइसोलेशन में थी, 21 सितंबर को उनकी भी हालत बिगड़ गई। उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भर्ती किया गया। ऐसे ही सरधना के 40 वर्षीय युवक को भी होम आइसोलेशन में हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती करने के लिए ले जाया गया। काफी मशक्कत के बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
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फार्म भरवाया जा रहा
सीएमओ डॉ राजकुमार का कहना है कि होम आइसोलेशन के लिए बिना लक्षण वाले मरीज से एक फॉर्म भरवाया जा रहा है। जिसमें सभी शर्त पूरा होने के बाद ही होम आइसोलेशन में रह सकते हैं यदि कोरोना के लक्षण मरीज में सामने आए हैं तो फिर उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
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मेरठ। एक तरफ जहंा कोरोना संक्रमित मरीज मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट नहीं होना चाह रहे हैं वहीं अन्य कोविड अस्पताल में र्र्कई-कई घंटों के इंतजार और सिफारिश के बाद भर्ती किया जा रहा है। वहीं अब होम आइसोलेशन भी मरीजों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण होम आइसोलेट मरीजों की तबीयत बिगड़ रही है। पिछले पांच दिन में होम आइसोलेट हुए 20 मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अलग-अलग कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मेरठ में बृहस्पतिवार शाम तक कोरोना के 600 मरीज होम आइसोलेट थे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बिना लक्षण वाले वह कोरोना संक्रमित मरीज जिनको कोई दूसरी बीमारी नहीं है वह होम आइसोलेशन में रह सकेंगे। हालांकि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की अनुमति जरूरी है। वहीं सिर्फ वहीं मरीज होम आइसोलेट हो सकेंगा जिसके घर पर कम से कम दो शौचालय हों और खुद के लिए अलग कमरे हों। वहीं मरीज को अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप में दिन में दो बार अपने स्वास्थ्य की जानकारी देनी होगी। साथ ही मरीज को जिला सर्विलांस अधिकारी या स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी को भी स्वास्थ्य की जानकारी देनी होगी। स्वास्थ्य विभाग को सरकार के निर्देश हैं कि डॉक्टर को होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी लेनी होगी, लेकिन देखने में आ रहा है कि इनमें से ज्यादातर निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। इसी लापरवाही के कारण मरीजों की तबीयत बिगड़ रही है। वहीं कुछ मरीज भी गलत जानकारी देकर होम आइसोलेट हो रहे हैं।
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अस्पताल में भर्ती होने के लिए मशक्कत
तीन दिन पहले ही होम आइसोलेशन मे रह रहे परतापुर थाने के दरोगा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एसपी सिटी से लेकर एडीएम तक सिफारिश करते रहे। करीब आठ घंटे इंतजार के बाद उन्हें निजी अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती किया गया। इसी तरह गंगानगर निवासी 60 वर्षीय महिला होम आइसोलेशन में थी, 21 सितंबर को उनकी भी हालत बिगड़ गई। उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भर्ती किया गया। ऐसे ही सरधना के 40 वर्षीय युवक को भी होम आइसोलेशन में हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती करने के लिए ले जाया गया। काफी मशक्कत के बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
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फार्म भरवाया जा रहा
सीएमओ डॉ राजकुमार का कहना है कि होम आइसोलेशन के लिए बिना लक्षण वाले मरीज से एक फॉर्म भरवाया जा रहा है। जिसमें सभी शर्त पूरा होने के बाद ही होम आइसोलेशन में रह सकते हैं यदि कोरोना के लक्षण मरीज में सामने आए हैं तो फिर उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।