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हिंदी हैं हम: हिंदी में कामकाज को बढ़ावा दे रहा ईपीएफओ, पढ़िए खास रिपोर्ट

Thu, 26 Aug 2021 04:02 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 26 Aug 2021 04:02 PM IST
सार

कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय में एक से 15 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। इस दौरान हिंदी से संबंधित सात प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 20 हजार से अधिक हिंदी में शब्द लिखने वाले कर्मचारियों को विभागीय स्तर पर पुरस्कृत किया जाता है।

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Hindi Hai Hum: All employees and officers of EPFO department work in Hindi in Meerut
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय में हिंदी लाइब्रेरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में तीन हिंदी अनुवादकों के साथ सभी अधिकारी और कर्मचारी हिंदी में ही कार्य करते हैं। आयुक्त भी फाइलों में हस्ताक्षर तब करते हैं जब उनका शीर्षक और अन्य आवश्यक टिप्पणियां हिंदी में की जाती हैं। कार्यालय में स्थित पुस्तकालय में भी 600 पुस्तकों में 450 हिंदी में हैं। इसमें सर्वाधिक पुस्तकें मुंशी प्रेमचंद और कबीर दास की हैं। विभाग के सभी कंप्यूटरों में हिंदी यूनिकोड का प्रयोग किया जाता है।

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कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय में एक से 15 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। इस दौरान हिंदी से संबंधित सात प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 20 हजार से अधिक हिंदी में शब्द लिखने वाले कर्मचारियों को विभागीय स्तर पर पुरस्कृत किया जाता है। कर्मचारी भविष्य निधि आयुक्त मोहम्मद शारिक ने कहा कि हम हिंदी पखवाड़े तक ही सीमित नहीं हैं। कार्यालय में हिंदी पर नियमित कार्यशाला आयोजित की जाती है। हिंदी को हमने अपने कामकाज में पूरी तरह शामिल कर लिया है। 
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हिंदी की सेवा में जुटे
विभाग में कार्यरत अधिकारी निजी स्तर पर भी हिंदी की सेवा में जुटे हैं। निदेशक हिंदी एमपीएस राठौर ‘विवशता : एक कहानी संग्रह’, हिंदी अधिकारी कृपाल सिंह ‘सत्य की खोज’ हिंदी अधिकारी राजवीर सिंह ‘काव्य मंजरी’ नाम से हिंदी में किताब लिख चुके हैं। हिंदी अनुवादक के पद पर कार्यरत विजय पाल सिंह का कहना है कि कबीर दास, प्रेमचंद्र, जयशंकर प्रसाद, रामचंद्र शुक्ल समेत कई हिंदी लेखकों को न सिर्फ पढ़ा बल्कि उनकी बातों को अंतर्मन में उतारा भी।
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सार्थक परिणाम सामने आए
हमें पढ़ने की आदत डालनी होगी। बच्चों के सामने जब हम पुस्तक पढ़ेंगे तो उनमें भी जिज्ञासा होगी। मुंशी प्रेमचंद के लेखन में मिट्टी की खुशबू आती है। हिंदी उस मुकाम को हासिल करेगी जिसकी हम कल्पना कर रहे हैं। अमर उजाला का हिंदी हैं हम अभियान सराहनीय है। मेरठ कार्यालय में हिंदी को कामकाज में शामिल करने के लिए हिंदी अधिकारियों को कई विभागों में विभाजित कर दायित्व दिए गए। जिसका सार्थक परिणाम सामने आया है। - मोहम्मद शारिक, आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन

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