हिंदी दिवस विशेष: कभी यहां पर थीं हिंदी साहित्य की पांच हजार से ज्यादा पुस्तकें, आज खंडहर में तब्दील हुआ भवन
मेरठ महानगर में पटेल नगर स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन अब सिर्फ एक खंडहर बनकर रह गया है। हिंदी साहित्य की कभी पांच हजार से ज्यादा पुस्तकों से सजा यह भवन अब केवल नाममात्र के लिए ही रह गया है।
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मेरठ महानगर में पटेल नगर स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन का नाम कभी हिंदी साहित्यकारों में न केवल चर्चित रहता था, बल्कि इतिहास के पन्नों में भी दर्ज था। दूर-दूर से साहित्यकार यहां साहित्य सृजन को जुटते थे। मगर समय के साथ यह भवन जीर्णशीर्ण होकर पूरी तरह ध्वस्त होकर खंडहर में तब्दील हो गया है।
हिंदी भवन की स्थापना 1965 में हुई थी, जबकि इसका भवन पुराना था। करीब 2800 वर्ग गज जमीन पर बने इस हिंदी भवन की समिति की शहर में अलग पहचान थी, लेकिन समय के साथ हिंदी भवन के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया और इसका भवन जर्जर हो गया। जीर्णशीर्ण भवन को पिछले वर्ष ध्वस्त करा दिया गया और अब वहां खाली मैदान है।
पहले हिंदी भवन जाने वाले रास्ते में डेयरी संचालित होती थी, जिसे कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने हटवाया था। आज भी यहां की खाली जमीन पर कबाड़ियों ने सामान डाल रखा है। अब सिर्फ द्वार पर लगे साइन बोर्ड से ही पता चलता है कि यहां कभी हिंदी भवन हुआ करता था।
कभी पांच हजार किताबें थी मौजूद
पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन में हिंदी साहित्य की करीब पांच हजार किताबें मौजूद थीं। छात्र पीएचडी के लिए न केवल यहां की किताबों का सहारा लेते थे, बल्कि हिंदी साहित्यकारों द्वारा बैठकों के साथ यहां हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए काव्य गोष्ठियां भी आयोजित की जाती थीं।
इसके अलावा इस यहां हिंदी के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाता था। तुलसी जयंती पर भी कार्यक्रम आयोजित होता था। इस भवन के परिसर में कार्यालय के अतिरिक्त एक बड़ी लाइब्रेरी, शौचालय के साथ कर्मचारियोें का कक्ष भी था।
नया हिंदी भवन बनेगा, डिजिटल लाइब्रेरी बनगी
हिंदी भवन की समिति के सचिव दिनेशचंद जैन ने बताया कि पुराना भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां से मलबा हटवा दिया गया है। कुछ लोगों ने खाली मैदान में सामान डाल कर रखा है। नगर निगम दूध की डेयरी को पहले ही हटवा चुका है।
अब यहां पर नया आधुनिक हिंदी भवन बनाने की तैयारी है, जिसमें डिजिटल लाइब्रेरी भी होगी। इसका मानचित्र मेरठ विकास प्राधिकरण से पास होते ही नए हिंदी भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा।