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धोखाधड़ी : खुद को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को कैद
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Thu, 01 Jun 2017 02:48 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गबन के मुकदमे से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने धोखाधड़ी और गबन करने का दोषी पाते हुए पांच साल कैद की सजा सुनाई है।
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मामला मथुरा से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मांठ मथुरा के अधीक्षक डॉ. डीके सक्सेना पर 1.47 लाख रुपये गबन करने का आरोप लगा था। जिसकी जांच उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान आगरा द्वारा की गई थी। विवेचना के बाद आरोपी डॉक्टर के खिलाफ फर्जी बिल बनाकर रुपये हड़पने के आरोप में चार्जशीट मेरठ की एंटी करप्शन कोर्ट में दाखिल की गई थी। डॉ. सक्सेना पर आरोप था कि उन्होंने 31 मार्च 1989 को कोषागार मांठ से बिल पास कराकर भारतीय स्टेट बैंक शाखा मांठ से रुपये का गबन किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी देवकी नंदन शर्मा ने कुल सात गवाह पेश किए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद डॉ. डीके सक्सेना को दोषी पाया।
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हो गए थे पत्रावली बंदी के आदेश
इस मामले में मुकदमा पंजीकृत हो जाने और कोर्ट में सुनवाई शुरू हो जाने के बाद डॉ. सक्सेना ने साजिश के तहत खुद को कोर्ट में मृतक दर्शा दिया था। इसके बाद कोर्ट ने पत्रावली बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। लेकिन बाद में कुछ धनराशि आरोपी डॉक्टर द्वारा निकाले जाने की सूचना मिलते ही कोर्ट को उसके जीवित होने की सूचना दी गई। इस पर कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे।
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