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Meerut News: विश्व नींद दिवस पर विशेष

Thu, 21 Mar 2024 06:03 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Mar 2024 06:03 PM IST
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विश्व नींद दिवस पर विशेष

नींद के लिए हर साल दो करोड़ रुपये की दवाएं गटक रहे मेरठी

मानसिक रोगों से परेशान 15 हज़ार मरीज़ों के अवलोकन में खुलासा, 53 प्रतिशत को निकली नींद न आने की बीमारी

अरीश रिज़वी
मेरठ। नींद किसी वरदान से कम नहीं, लेकिन कम मेहनत, ज्यादा तनाव और खराब दिनचर्या ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। इससे याददाश्त कमजोर हो रही है, मानसिक परेशानियां, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। मार्च 2023 से फरवरी 2024 तक जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में आए 15 हज़ार मरीज़ों के अवलोकन में खुलासा हुआ है कि इनमें से करीब 53 प्रतिशत लोगों को नींद न आने की बीमारी इनसोम्निया भी थी। और तो और नींद न आना लोगों की जेब भी ढीली कर रहा है। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक जिले में हर साल करीब दो करोड़ रुपये कीमत की नींद की गोलियां लोग गटक जा रहे हैं। इस संबंध में जागरूकता फैलाने के लिए 2008 से मार्च के हर तीसरे शुक्रवार को विश्व निद्रा दिवस मनाया जा रहा है।
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40 प्रतिशत मरीज़ निकले डिप्रेशन के शिकार
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ कमलेंद्र किशोर ने बताया कि जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी की स्टडी में पता चला है कि इनमें काफी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो किसी न किसी कारण से तनाव में रहते थे, जिस कारण उन्हें नींद नहीं आती थी। बाद में वह डिप्रेशन में चले गए। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने नींद के लिए लंबे समय तक स्लीपिंग पिल्स ली थीं। इन 15 हज़ार मरीजों में डिप्रेशन के शिकार 40 प्रतिशत थे। माइग्रेन के 35, स्कीजोफ्रेनिया के पांच, अल्जाइमर के पांच, अत्यधिक गुस्सा आने के तीन, मिर्गी के चार, हिस्टीरिया तीन व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। उन्होंने बताया कि इन सभी में से कुल करीब 53 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी।
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बढ़ रहा नींद की गोलियों का कारोबार
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि जिले में करीब पांच हज़ार मेडिकल स्टोर हैं। एक अनुमान के मुताबिक हर साल करीब दो करोड़ रुपये से ज्यादा की नींद से संबंधित गोलियां लोग खाते हैं।
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अनिद्रा दूसरी बीमारी का लक्षण भी

अनिद्रा: जानलेवा समस्या का बन सकती है कारण
जिला अस्पताल की क्लिनिकल साइकलोजिस्ट (नैदानिक मनोविज्ञानी) डॉ विभा नागर ने बताया कि अनिद्रा अपने आप में बीमारी ही नहीं बल्कि दूसरी बीमारियों का लक्षण भी है। इसकी वजह से उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा समस्याओं से ग्रस्त भी हो सकते हैं।
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कम सोने का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि कम सोने का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग तरोताजा नहीं हो पाता है। जिस समय हम सोते हैं, हमारे कई अंग शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करने का काम करते हैं। इससे हम तरोताजा रहते हैं। नींद पूरी न होने से ये विषाक्त पदार्थ नहीं निकलते।


गहरी नींद चाहिए तो यह बरतें एहतियात
- सोने और जागने का समय तय करें
- सोते समय मोबाइल से दूर रहें
- नींद नहीं आ रही तो गुनगुने पानी से पैर धो लें
- दिन में ज्यादा न सोएं, रात में ही पूरी नींद लें
- चाय-कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल न करें
- रोजाना सात से आठ घंटे की नींद जरूरी लें
- बिना चिकित्सक की सलाह के नींद की गोली न लें

अनिद्रा से घटती है एनर्जी
नींद नहीं आने से शरीर के हार्मोंस पूरी तरह से काम नहीं कर पाते। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। एनर्जी घटती है। याददाश्त पर भी फर्क पड़ता है। सामान्य तौर पर यह कोई दिमागी बीमारी नहीं है, लेकिन अगर दिमाग की कोई बीमारी है तो नींद नहीं आना उसका लक्षण हो सकता है।
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