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Meerut News: भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया
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- शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में चल रहा संस्कार शिक्षण शिविर
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में चल रहे श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में श्रमण परंपरा, आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया। शिविर में पंडित सर्वज्ञ जैन शास्त्री ने बताया कि रत्नकंड श्रावकाचार जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आचार ग्रंथ है। इसमें गृहस्थ जीवन के आदर्श, कर्तव्य, आचरण एवं धर्म पालन की विधियों का सरल और व्यवस्थित वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ सिखाता है कि व्यक्ति संसार में रहते हुए भी संयम, सदाचार, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर कैसे चल सकता है।
उन्होंने बताया कि ग्रंथ में दैनिक जीवन के नियम, पूजा, विधान, दान, विनम्रता, आत्मसंयम, क्रोध पर नियंत्रण एवं सात्विक जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई है। पंडित अक्षांश जैन शास्त्री ने बताया कि बालबोध भाग-1 एवं भाग-2 बच्चों के लिए तैयार किए गए अत्यंत उपयोगी जैन संस्कार ग्रंथ हैं। इनका उद्देश्य बालकों में प्रारंभ से ही नैतिकता, अनुशासन, धर्म एवं अच्छे संस्कारों का विकास करना है।
इस दौरान अक्षत, आस्था, परिधि, आरव, लविषा, आद्या, आर्जव, दर्शिका, प्रेक्षा एवं अनविका सहित अन्य बच्चों ने अपने सवाल भी किए। शिविर में आभा जैन, संजय जैन, कपिल जैन, सारिका जैन, शोभा जैन, सुनीता जैन, सुरेश जैन, हेमचंद जैन, अनामिका जैन, कुसुम जैन एवं दीपा जैन सहित अन्य मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में चल रहे श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में श्रमण परंपरा, आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया। शिविर में पंडित सर्वज्ञ जैन शास्त्री ने बताया कि रत्नकंड श्रावकाचार जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आचार ग्रंथ है। इसमें गृहस्थ जीवन के आदर्श, कर्तव्य, आचरण एवं धर्म पालन की विधियों का सरल और व्यवस्थित वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ सिखाता है कि व्यक्ति संसार में रहते हुए भी संयम, सदाचार, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर कैसे चल सकता है।
उन्होंने बताया कि ग्रंथ में दैनिक जीवन के नियम, पूजा, विधान, दान, विनम्रता, आत्मसंयम, क्रोध पर नियंत्रण एवं सात्विक जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई है। पंडित अक्षांश जैन शास्त्री ने बताया कि बालबोध भाग-1 एवं भाग-2 बच्चों के लिए तैयार किए गए अत्यंत उपयोगी जैन संस्कार ग्रंथ हैं। इनका उद्देश्य बालकों में प्रारंभ से ही नैतिकता, अनुशासन, धर्म एवं अच्छे संस्कारों का विकास करना है।
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इस दौरान अक्षत, आस्था, परिधि, आरव, लविषा, आद्या, आर्जव, दर्शिका, प्रेक्षा एवं अनविका सहित अन्य बच्चों ने अपने सवाल भी किए। शिविर में आभा जैन, संजय जैन, कपिल जैन, सारिका जैन, शोभा जैन, सुनीता जैन, सुरेश जैन, हेमचंद जैन, अनामिका जैन, कुसुम जैन एवं दीपा जैन सहित अन्य मौजूद रहे।
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