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हस्तिनापुर सेंक्चुरी बनेगी गैंडों का आशियाना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Dec 2016 01:48 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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भविष्य में हस्तिनापुर सेंक्चुरी में भारतीय गैंडे विचरण करते नजर आएंगे। भारी भरकम शरीर वाले जानवर को मेहमान बनाकर सेंक्चुरी में लाने की तैयारी है। वन विभाग सेंक्चुरी का महत्व बढ़ाने के लिए गैंडे से जुड़े एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। सेंक्चुरी में भारतीय गैंडा (एक सींग वाला) को पुर्नस्थापित करने की योजना है। गैंडा के आशियाना की तलाश कर ली गई है। करीब 7400 हेक्टेयर एरिया गैंडों को समर्पित करने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों ने क्लीन चिट दे दी है। गैंडे असम से लाएं जाएंगे।
मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक गैंडों की कम होती संख्या के कारण भारत सरकार ने इंडियन राइनो विजन 2020 की शुरुआत 2005 में की थी। लक्ष्य 2020 तक गैंडों की संख्या 3000 पहुंचाना है। इस काम के लिए सरकार ने असम सरकार के साथ मिलकर एक टास्क फोर्स का गठन किया। टास्क फोर्स का काम नए क्षेत्रों में गैंडों को पुर्नस्थापित करना है। सेंक्चुरी का प्रबंधन प्लान बनाने के लिए पिछले दिनों विशेषज्ञों की कोर कमेटी ने सेंक्चुरी का निरीक्षण किया था। कमेटी ने बिजनौर बैराज से लेकर शुक्रताल तक करीब 7400 हेक्टेयर का एरिया गैंडों को पुर्नस्थापित करने के उपयुक्त पाया। दोनों ओर गंगा का किनारा है। इस बारे में मुख्य वन संरक्षक को प्रस्ताव भेजा गया है। असम वन विभाग, दुधवा नेशनल पार्क, डब्लूडब्लूएफ या इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन के सहयोग से तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन के मुताबिक एक्सपर्ट ने उक्त क्षेत्र का दौरा किया तो उन्होंने क्लीन चिट दी है। अब सर्वे और मैपिंग का काम होना है।
भारत में हैं 1700 गैंडे
देश में एक सींग वाले 1700 गैंडे हैं। इनमें 85 प्रतिशत असम राज्य में हैं। एक सींग वाला गैंडा थ्रेटन्ड प्रजाति में चिह्नित किया गया है। शिकार की वजह से संख्या कम होने के कारण सरकार इनकी संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों को पुर्नस्थापित किया जा चुका है। पड़ोसी देश नेपाल में गैंडों की संख्या 500 है। अफ्रीका में काफी गैंडे हैं, लेकिन वह दो सींग वाले हैं।
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मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक गैंडों की कम होती संख्या के कारण भारत सरकार ने इंडियन राइनो विजन 2020 की शुरुआत 2005 में की थी। लक्ष्य 2020 तक गैंडों की संख्या 3000 पहुंचाना है। इस काम के लिए सरकार ने असम सरकार के साथ मिलकर एक टास्क फोर्स का गठन किया। टास्क फोर्स का काम नए क्षेत्रों में गैंडों को पुर्नस्थापित करना है। सेंक्चुरी का प्रबंधन प्लान बनाने के लिए पिछले दिनों विशेषज्ञों की कोर कमेटी ने सेंक्चुरी का निरीक्षण किया था। कमेटी ने बिजनौर बैराज से लेकर शुक्रताल तक करीब 7400 हेक्टेयर का एरिया गैंडों को पुर्नस्थापित करने के उपयुक्त पाया। दोनों ओर गंगा का किनारा है। इस बारे में मुख्य वन संरक्षक को प्रस्ताव भेजा गया है। असम वन विभाग, दुधवा नेशनल पार्क, डब्लूडब्लूएफ या इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन के सहयोग से तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन के मुताबिक एक्सपर्ट ने उक्त क्षेत्र का दौरा किया तो उन्होंने क्लीन चिट दी है। अब सर्वे और मैपिंग का काम होना है।
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भारत में हैं 1700 गैंडे
देश में एक सींग वाले 1700 गैंडे हैं। इनमें 85 प्रतिशत असम राज्य में हैं। एक सींग वाला गैंडा थ्रेटन्ड प्रजाति में चिह्नित किया गया है। शिकार की वजह से संख्या कम होने के कारण सरकार इनकी संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों को पुर्नस्थापित किया जा चुका है। पड़ोसी देश नेपाल में गैंडों की संख्या 500 है। अफ्रीका में काफी गैंडे हैं, लेकिन वह दो सींग वाले हैं।
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